logo

मूड

ट्रेंडिंग:

कहां हैं विनोद राठौड़? जिन्होंने शाहरुख-संजय की फिल्मों में दिए आइकॉनिक गाने

सिंगर विनोद राठौड़ ने अपने करियर में 3500 गाने गाए हैं। उन्होंने अपने करियर में कई आइकॉनिक हिट गाने दिए हैं। आज वह कहां हैं?

shah rukh khan and vinod rathod

विनोद राठौड़ और शाहरुख खान, Photo Credit: Social media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

हिंदी सिनेमा में विनोद राठौड़ ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए हैं। उनहोंने 'कोई न कोई चाहिए', 'ऐसी दीवानगी', 'अंग से अंग लगाना', 'किताबें बहुत सी', 'छुपाना भी नहीं आता' जैसे कई हिट गाने गाए हैं। उनके गीतों को लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं। उनकी दमदार आवाज कई स्टार्स की पहचान बनी हैं। इस लिस्ट में शाहरुख खान का नाम भी शामिल है।

 

शाहरुख की पहली फिल्म 'दीवाना' थी जो 1992 में रिलीज हुई। इस फिल्म में विनोद राठौड़ ने 'ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं', 'कोई ना कोई चाहिए प्यार करने वाला' जैसे हिट गाने गाए। इस फिल्म के बाकी गाने भी सुपरहिट रहे थे। शाहरुख की डेब्यू फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी। वह अपनी पहली फिल्म से ही स्टार बन गए थे। 

 

यह भी पढ़ें: अभी तक कर्ज नहीं चुका पाए राजपाल यादव, अब संपत्ति की कुर्की हो जाएगी?

शाहरुख के लिए लकी थे विनोद राठौड़

'दीवाना' के बाद शाहरुख की छह फिल्में रिलीज हुई थी जिसमें 'चमत्कार', 'दिल आशना है', 'राजू बन गया जेंटलमैन' समेत अन्य फिल्में थीं। इनमें से कुछ फिल्में फ्लॉप रही तो कुछ सेमी हिट थी। 1993 में उनकी 'बाजीगर' और 'डर' जैसी फिल्में रिलीज हुई थी। ये दोनों फिल्में सुपरहिट रही थी।

 

इन दोनों फिल्मों में विनोद राठौड़ ने अपनी आवाज दी। उन्होंने 'अंग से अंग लगाना', 'छुपाना भी नहीं आता', 'समझकर चांद जिसको' जैसे कई हिट गाने गाए जो दर्शकों की जुबान पर चढ़ गए थे। शाहरुख के करियर की शुरुआत में विनोद रौठड़ ने उनके लिए गाया था। बाद में शाहरुख की फिल्मों में कुमारा सानू, उदित नारायण और अभिजीत भट्टाचार्य ने अपनी आवाज दी।

 

यह भी पढ़ें: 'आवारापन 2' का ट्रेलर रिलीज, इमरान हाशमी से ज्यादा चमकीं शबाना आजमी

अब कहां हैं विनोद राठौड़?

विनोद राठौड़ ने फिल्मी गानों से दूरी बना ली है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि आज की फिल्मों के म्यूजिक में पहले वाली बात नहीं है। म्यूजिक कहां है? मैं बहुत ही इमोशनल व्यक्ति हूं। लक्ष्मीकांत शांताराम कुडाळकर और आर.डी बर्मन की मौत के बाद में मेरी संगीत में दिलचस्पी खत्म हो गई थी। मेरे लिए म्यूजिक एक साधना है। मैं अपनी साधना के साथ समझौता नहीं कर सकता हूं। इसी वजह से मैं ज्यादा सोशल नहीं होता है। 

 

View on Instagram

 

 

वह इन दिनों म्यूजिक कॉन्सर्ट करते हैं। इन कॉन्सर्ट में वह अपने पुराने गानों को गाते हैं। उन्होंने हिंदी, तमिल, बंगाली, मराठी समेत अन्य भाषाओं में 3500 से ज्यादा गाना गाए हैं। उन्होंने 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं', 'ढोली तारो ढोल बाजे', 'चलक चलक' समेत कई सुपरहिट गाने दिए थे।

Related Topic:#Shah Rukh Khan

और पढ़ें