शशि कपूर की फिल्म 'जब जब फूल खिले' 1965 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के गाने बेहद पॉपुलर हुए थे। आप को जानकर हैरानी होगी 'परदेसियों से न अखियां मिलाना' को तीन वर्जन में रिकॉर्ड किया गया था।
हिंदी सिनेमा के कुछ ऐसे ऑइकोनिक गाने हैं जिन्हें आप कभी भी सुन सकते हैं। इन गानों को सुनकर आप उस दौर की यादों में खो जाते हैं। साल 1965 में फिल्म 'जब जब फूल खिले' रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शशि कपूर और अभिनेत्री नंदा ने साथ काम किया था। यह फिल्म सुपरहिट हुई थी। यह फिल्म उस समय पर्दे पर आई थी जब कोई बड़ी हीरोइन शशि कपूर के साथ काम नहीं करना चाहती थीं।
फिल्म के निर्माता ने उस समय की मशहूर अभिनेत्री नंदा को कहानी सुनाई। फिल्म की कहानी उन्हें पसंद आई और वह काम करने को तैयार हो गई थीं। इस फिल्म का गाना 'परदेसियों से न अखियां मिलाना' आज भी दर्शकों को याद है। क्या आप जानते हैं इस गाने को तीन अलग-अलग वर्जन में रिकॉर्ड किया गया था और तीनों वर्जन का इस्तेमाल हुआ था।
इस गाने को म्यूजिक क्लायणजी और आनंद जी ने दिया था। इसके गीतों ने आनंद बख्शी ने लिखा था। आनंद बख्शी उस समय में संघर्ष कर रहे थे और इस गाने ने उनकी तकदीर बदल दी।
फिल्म में पहले वर्जन का इस्तेमाल मोहम्मद रफी की आवाज में हुआ था। इस गाने को रफी साहब ने खुशनमा अंदाज में गाया था जो कहानी में प्यार की खुशी को दिखाता है। इसी गाने को दूसरे वर्जन में भी रफी ने ही गाया था। इस वर्जन में जुदाई के दुख को बताया गया है। इसमें नायक अपने दुख को बयां करता है। इस गाने के तीसरे वर्जन को लीजेंडरी सिंगर लता मंगेशकर ने अपने अंदाज में गाया। यह उनका सोलो वर्जन है जिसमें अभिनेत्री नंदा अपनी स्थितियों को दर्शाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गाने को पहले मशहूर सिंगर मुबारक बेगम की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था लेकिन बाद में फैसला हुआ कि इस गाने को किसी और सिंगर से भी गवाना चाहिए। कई नामों पर चर्चा हुई और बाद में यह गाना लता मंगेशकर ने गाया। इस फिल्म के कई गाने हिट हुए थे जिसमें 'ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे', 'एक था गुल और एक थी बुलबुल', 'ये समां समां है ये प्यार का' और 'यहां मैं अजनबी हूं' का नाम शामिल है।