logo

ट्रेंडिंग:

तिलक लगाने पर हिंदू छात्र के साथ भेदभाव, स्कूल तक छोड़ना पड़ा

ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू छात्रों के साथ भेदभाव के मामले थमते नहीं दिख रहे हैं। अब आठ साल के एक बच्चे को तिलक लगाने के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा है। स्कूल प्रबंधन पर भेदभाव के आरोप हैं।

Hindu Students

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

लंदन के एक स्कूल में हिंदू छात्र के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। इस स्कूल में तीन से 11 साल तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। यहां भेदभाव का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तीन हिंदू बच्चों को भेदभाव के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा। ताजा मामला 8 वर्षीय बच्चे के साथ भेदभाव से जुड़ा है। तिलक लगाने के कारण बच्चे को स्कूल प्रशासन ने निशाना बनाया। इससे खफा हिंदू माता-पिता ने बच्चे को स्कूल से निकाल लिया है। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आठ वर्षीय बच्चा एल्परटन के विकार्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। यहां तिलक-चंदलो के कारण बच्चे के साथ भेदभाव किया गया। स्कूल का तर्क है कि तिलक-चंदलो ड्रेस कोड का उल्लंघन है। इसके तहत स्किन पर निशान लगाने की अनुमति नहीं है। धार्मिक पद्धत्ति के कारण ब्रेक के समय बच्चे की निगरानी की गई और उसे अहम जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया। 

 

यह भी पढ़ें: गरीब परिवारों को होली पर सरकार देगी 1 मुफ्त सिलेंडर, सीधे खाते में आएंगे पैसे

 

ब्रिटेन में हिंदुओं से जुड़ी संस्था NSIGHT UK के मुताबिक स्कूल प्रबंधन को समझाने का प्रयास किया। मगर उन्होंने हिंदू-रीति रिवाज को ही चुनौती देना शुरू कर दिया। यह तक दावा किया कि तिलक-चंदलो हिंदू धर्म की अनिवार्य प्रथाओं का हिस्सा नहीं है। इनसाइट यूके ने अपने जवाब में विभिन्न धर्मग्रंथों का हवाला दिया और बताया कि यह हिंदू धर्म का अभिन्न अंग है।

 

संस्था ने अपने पत्र में कहा कि तिलक-चंदलो को स्किन मार्क्स कहना न केवल अपमानजनक है, बल्कि समानता अधिनियम का भी उल्लंघन है। पूरे विवाद पर स्कूल ने भी अपना पक्ष रखा। स्कूल के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे स्कूल में बड़ी संख्या में हिंदू के अलावा 50 से अधिक भाषाओं वाले छात्र हैं।

 

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश: हिंदुओं के खिलाफ नहीं रुक रही हिंसा, लापता युवक की लाश नदी में मिली

 

 स्कूल ने आगे कहा कि पॉलिसी के मुताबिक धार्मिक समेत किसी भी तरह का निशान छात्रों के त्वचा पर नहीं होना चाहिए। हमने छात्र के माता-पिता से मुलाकात की। उनकी धार्मिक मान्यताओं को समझा। नीति में छूट देकर कहा कि प्रतीकों को शरीर के उन हिस्सों में पहना जा सकता है, जहां कम दिखाई पड़े। हालांकि माता-पिता ने इसे स्वीकार नहीं किया। 

Related Topic:#Hindu Dharma

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap