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वे 3 नेता जिन्हें मादुरो की तरह उनके देश से उठा ले गया अमेरिका

वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अलावा अमेरिका तीन अन्य नेताओं को सैन्य हस्तक्षेप से हटा चुका है। अपनी मनमर्जी से इन्हें सजा भी दिया। एक केस तो बिल्कुल वेनेजुएला से मिलता-जुलता है।

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सद्दाम हुसैन, निकोलस मादुरो और जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज़। ( Photo Credit: wikipedia)

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अमेरिका ने भीषण बमबारी के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया है। यह भी बताया कि निकोलस को पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ देश से बाहर ले जाया गया है। उधर, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पैड्रिनो लोपेज हार नहीं मानने की बात कही और दावा किया कि अमेरिकी आक्रामकता के खिलाफ उनका देश जीत हासिल करेगा। बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं जब अमेरिका ने किसी देश के राष्ट्रपति को निशाना बनाया हो। पहले भी तीन बार ऐसा ही कर चुका है। आइये जानते हैं उन नेताओं के बारे में जिन्हें अमेरिका उनके ही देश से उठा ले गया।

 

सद्दाम हुसैन: 1980 के दशक में इराक-ईरान युद्ध में सद्दाम हुसैन ने खुलकर अमेरिका का साथ दिया। मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे अहम सहयोगी बनकर उभरे। मगर अमेरिका के साथ उनकी यह दोस्ती अधिक दिनों तक नहीं चल सकी। एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन परमाणु बम बनाने की कोशिश में है। इससे खफा अमेरिका ने 20 मार्च 2003 को इराक पर हमला कर दिया। करीब 9 महीने बाद 13 दिसंबर 2003 को अमेरिकी सेना ने सद्दाम हुसैन को पकड़ा। इराक की अदालत से सजा मिलने के बाद 30 दिसंबर 2006 को फांसी दी गई। 

 

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने वेनेजुएला पर क्यों किया हमला, क्या है 'वोट चोरी' का आरोप?

 

जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज: अमेरिका ने निकोलस मादुरो की तर्ज पर ही 2022 के फरवरी महीने में होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को पकड़ा गया था। अमेरिकी खुफिया एजेंटों और सेना के अभियान के बाद तेगुसिगाल्पा स्थित आवास से हर्नांडेज को पकड़ा गया था। एक महीने बाद अप्रैल में जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को अमेरिका प्रत्यार्पित कर दिया गया। वहां उन पर भ्रष्टाचार और मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में मुकदमा चला। दो महीने बाद जून में जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को 45 साल की सजा सुनाई गई। पिछले साल 1 दिसंबवर को डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें क्षमादान दे दिया है।

 

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मैनुअल नोरीगा: लैटिन अमेरिकी देश पनामा पर अमेरिका ने साल 1889 में आक्रमण किया था। वहां के सैन्य नेता मैनुअल नोरीगा को पद से हटा दिया था। उन पर भी तानाशाही और नशा तस्करी के आरोप लगाए थे। मादुरो की तरह ही 1988 में अमेरिका ने मैनुअल नोरीगा के खिलाफ एक मुकदमा मियामी में चलाया था। यह केस भी ड्रग्स तस्करी से जुड़ा था। साल 2010 तक मैनुअल नोरीगा को अमेरिकी जेल में रखा गया। इसके बाद फ्रांस भेजा गया। बाद में फ्रांस से अपने वतन पनामा लौटे, लेकिन 2017 में जेल में ही आखिरी सांस ली।

 

 


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