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कंडोम महंगा, वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म की, फिर भी कम होती जा रही चीन की जनसंख्या

चीन अपनी घटती जनसंख्या और बढ़ती बुजुर्ग आबादी से निपटने के लिए 'थ्री-चाइल्ड पॉलिसी' और भारी सब्सिडी जैसे कदम उठा रहा है, फिर भी आर्थिक दबाव और जीवनशैली में बदलाव के कारण ये प्रयास विफल हो रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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चीन में जनसंख्या में लगातार गिरावट एक गंभीर और खुली सच्चाई बन चुकी है। देश की आबादी लगातार चौथे वर्ष कम हुई है। यह जानकारी चीन की राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से सामने आई है। 19 जनवरी को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन में केवल 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ जबकि 2024 में यह संख्या 95.4 लाख थी। यानी एक साल के भीतर जन्म दर में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने इससे निपटने के लिए कई उपाय किए जैसे कंडोम पर भारी टैक्स लगाया, वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म की फिर भी यह चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

 

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि 1949 से, जब चीन ने जनसंख्या के आधिकारिक रिकॉर्ड रखना शुरू किया तब से यह अब तक की सबसे कम जन्म दर है। इससे पहले 2023 में सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया था लेकिन मौजूदा आंकड़े उससे भी नीचे चले गए हैं। जनसंख्या में यह गिरावट चीन के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती बन गई है। सरकार के लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद, इस समस्या से उबरना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

 

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जनसंख्या संकट के कारण

चीन में जनसंख्या संकट की सबसे बड़ी वजह दशकों तक लागू रही कठोर ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ और तेजी से बदलता सामाजिक ढांचा है। वर्तमान में चीन की टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) लगभग 1.0 रह गई है, जबकि जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए यह 2.1 होनी चाहिए।

 

आज की युवा पीढ़ी शादी और बच्चों को आर्थिक बोझ मानने लगी है। इसी कारण चीन ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जिसे विशेषज्ञ 'अमीर होने से पहले बूढ़ा होना' कहते हैं।

सरकार का बदला रुख

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए चीनी सरकार ने अपनी नीति में पूरी तरह बदलाव किया है। जहां पहले ज्यादा बच्चे पैदा करने पर जुर्माना लगाया जाता था, अब सरकार कैश बेनेफिट, टैक्स में छूट और पैटरनिटी लीव जैसे प्रोत्साहन दे रही है।

हालांकि, ये कदम समस्या की गहराई तक असर नहीं डाल पा रहे हैं, क्योंकि जनसंख्या गिरावट की जड़ें काफी मजबूत हो चुकी हैं।

चीन के प्रमुख प्रयास

  • 2016 में ‘टू-चाइल्ड पॉलिसी’ और 2021 में ‘थ्री-चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की गई।
  • कई प्रांतों में अब बच्चों की संख्या की कोई सीमा नहीं है।
  • कुछ शहरों में तीसरे बच्चे पर मासिक भत्ता और एकमुश्त बेबी बोनस दिया जा रहा है।
  • बच्चों की पढ़ाई का खर्च कम करने के लिए प्राइवेट ट्यूशन इंडस्ट्री पर सख्ती की गई है।
  • सरकार ने कंडोम पर टैक्स बढ़ाया और कंपनियों पर दबाव बनाया कि वे मैटरनिटी लीव बढ़ाएं, हाउसिंग में प्राथमिकता दें और वर्क–लाइफ बैलेंस सुधारें।

 

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प्रयास क्यों असफल हो रहे हैं?

चीन के बड़े शहरों में घर खरीदना और बच्चों की परवरिश करना बेहद महंगा है। 9 से 9, हफ्ते में 6 दिन काम करने की संस्कृति के कारण युवाओं के पास परिवार के लिए समय नहीं बचता।

महिलाएं अब करियर और आजादी को ज्यादा महत्व दे रही हैं। नौकरी जाने या भेदभाव के डर से वे बच्चे पैदा करने से बचती हैं। इसके अलावा, युवा पीढ़ी ‘लाइंग फ्लैट’ या ‘दांगपिंग’ कल्चर अपना रही है, यानी बिना पारिवारिक जिम्मेदारी के साधारण जीवन जीना।

देश पर पड़ने वाला असर

  • कामकाजी आबादी घटने से फैक्ट्रियां प्रभावित होंगी और ‘दुनिया की फैक्ट्री’ कहलाने वाले चीन की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
  • युवाओं की कमी से पेंशन फंड पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि टैक्स देने वाले कम और पेंशन लेने वाले ज्यादा होंगे।
  • बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कई गुना बढ़ जाएगा।
  • युवा आबादी की कमी से घरेलू बाजार और जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

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