ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के 4 दिन बीत चुके हैं। आयतुल्लाह खामेनेई के मारे जाने के बावजूद ईरान ने हथियार नहीं डाले हैं और वह अरब के देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के कई देशों को जमकर सुनाया है। उन्होंने स्पेन से सारे रिश्ते खत्म करने को कहा है और यूनाइटेड किंगडम से भी नाराजगी जाहिर की है। डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी जैसे देशों की तारीफ भी की है। UK के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को आड़े हाथ लेते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने यह तक कह दिया कि विंस्टन चर्चिल से बात नहीं हो रही है।
डोनाल्ड ट्रंप के स्पेन पर भड़कने की मुख्य वजह यह रही कि स्पेन ने अमेरिका को अपना एयरबेस नहीं दिया। अमेरिका चाहता था कि वह ईरान पर हमला करने के लिए स्पेन के एयरबेस का इस्तेमाल करे और वहां से उड़ान भरे। हालांकि, स्पेन ने इससे साफ इनकार कर दिया। इसी पर डोनाल्ड ट्रंप भड़के हुए हैं। स्पेन के इनकार के बाद अमेरिका को अपने एयरक्राफ्ट फ्रांस और जर्मनी ले जाने पड़े।
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यूरोपीय देशों का जिक्र करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, 'यूरोप के कुछ देश काफी मददगार रहे हैं लेकिन मैं हैरान हूं कि कुछ देशों ने कोई मदद नहीं की। जर्मनी ने अच्छा काम किया लेकिन स्पेन ने कुछ नहीं किया। मैंने तो स्कॉट से साफ कह दिया है कि स्पेन के साथ सारी डीलिंग रोक दें। मैं UK से भी खुश नहीं हूं।'
किस तरफ है स्पेन?
दरअसल, स्पेन ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले का विरोध किया है। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुएल अलबरेस ने साफ कहा है कि UN चार्टर के अतिरिक्त किसी देश पर एकतरफा हमला करना हिंसा को उकसाता है और इसमें रणनीतिक उद्देश्य भी साबित नहीं होता है। इससे पहले भी स्पेन ने अमेरिका को तब झटका दिया था जब अमेरिका ने कहा था कि NATO में शामिल देश अपना डिफेंस बजट GDP के 5 पर्सेंट के बराबर करें। स्पेन ने इससे साफ इनकार कर दिया था।
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UK पर क्यों भड़के ट्रंप?
हाल ही में कीर स्टार्मर ने अपने देश की संसद में कहा था कि सरकार अपनी पिछली गलतियों से सीख रही है। उन्होंने 2003 में इराक पर हुए अमेरिकी हमले का जिक्र किया जब UK ने अमेरिका का साथ दिया था। स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह आसमान से किसी देश की सत्ता बदल डालने में भरोसा नहीं रखते हैं। हालांकि, UK ने स्पेन की तरह कदम नहीं उठाया है। वह सीमित स्तर पर अमेरिका की मदद कर रहा है। साइप्रस में एक ब्रिटिश बेस पर हुए हमले के बाद UK ने एक डेस्ट्रॉयर प्लेन और कोई हेलिकॉप्टर भी भेजे हैं।
इसी के चलते डोनाल्ड ट्रंप ने कीर स्टार्मर की खूब आलोचना की। उन्होंने कहा, 'यह विंस्टन चर्चिल नहीं हैं जिनसे हम डील कर रहे हैं।' स्टार्मर ने चागोस की संप्रभुता का जिक्र करते हुए इसका इस्तेमाल करने देने से रोक दिया था। इस पर ट्रंप ने कहा, 'ये लोग इस स्टुपिड आइलैंड के जरिए बिल्कुल भी मदद नहीं कर रहे हैं।' ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी करके यह भी कहा है कि वे अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े हैं।
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बाकी देश क्या कर रहे हैं?
ईरान के खिलाफ इस जंग में फ्रांस खुलकर साथ दे रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने परमाणु संचालित फ्रांसीसी जहाज को बाल्टिक सागर से भूमध्य सागर भेजने का आदेश दिया है। मैक्रों ने कहा कि चार्ल्स डी गॉल की वायुसेना विंग और सहायक फ्रिगेट इसे सुरक्षा प्रदान करेंगे। फ्रांसीसी टीवी पर प्रसारित एक पूर्व-रिकॉर्डेड भाषण में मैक्रों ने कहा कि पिछले कुछ घंटों में पश्चिम एशिया में राफेल लड़ाकू विमान, वायु रक्षा प्रणाली और हवाई रडार प्रणाली तैनात की गई हैं।
यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेएन ने ईरान में एक भरोसेमंद बदलाव का समर्थन किया है। ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया और साइप्रस जैसे देशों ने ईरान की ओर से किए गए हमले की निंदा की है।