अमेरिका के राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
ने अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलने वाली नागरिकता के नियम कड़े करने के लिए दो नए आदेशों पर दस्तखत कर दिए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कुछ हफ्ते पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में ट्रंप के पहले के आदेश को रद्द कर दिया था। गुरुवार को साइन किए गए आदेशों में से एक उन लोगों पर निशाना साधता है जो पैसे देकर बर्थ टूरिज्म चुनते हैं और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के इरादे से अमेरिका आते हैं। इस आदेश का मकसद ऐसे लोगों को अमेरिका में आने से रोकना है। दूसरा आदेश उन लोगों के दायरे को बड़ा करता है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के योग्य नहीं माना जाएगा। इसमें दूसरे देशों की सरकारों के लिए काम करने वाले विदेशी लोगों के बच्चे भी शामिल हैं।
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को ट्रंप के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 साल से ज्यादा पुरानी व्यवस्था को सही बताते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में इन आदेशों पर साइन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में अदालत के 30 जून के फैसले की आलोचना की और कहा कि नया कदम कुछ जरूरी बदलाव करने के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अदालत का फैसला बहुत खराब था इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं। इस दौरान ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर, कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लटनिक, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीयर और व्हाइट हाउस स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ मौजूद थे।
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पुराना नियम कब और क्यों बना था?
9 जुलाई 1868 को अमेरिका के संविधान में 14वां संशोधन किया गया था। इस नियम के तहत अमेरिका में पैदा होने वाले कानून के मुताबिक नागरिकता पाने वाले सभी लोगों को अमेरिका की नागरिकता मिल गई थी जिसमें पहले गुलाम रहे लोग भी शामिल थे। ट्रंप ने कहा कि यह नियम लड़ाई के ठीक बाद बनाया गया था ताकि गुलामों के बच्चों को नागरिकता मिल सके लेकिन अब लोग इसका गलत फायदा उठाकर पूरा बिजनेस चला रहे हैं। ट्रंप की इमीग्रेशन विरोधी टीम के स्टीफन मिलर ने बताया कि लोग घूमने वाले बनकर अमेरिका आते हैं लेकिन उनका असली मकसद वहां बच्चा पैदा करना होता है, ताकि वह बच्चा अपने आप अमेरिकी नागरिक बन जाए। मिलर ने यह भी कहा कि इस कमजोर व्यवस्था की वजह से ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा आगे चलकर वोट देने का अधिकार और वे सभी हक मिल जाते हैं जो सिर्फ अमेरिकी नागरिकों के लिए होने चाहिए।
नए आदेशों में शामिल लोग
इन आदेशों में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिनके तहत बच्चों को अमेरिकी नागरिकता के कागज नहीं मिलने चाहिए। इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता-पिता ने पैसे देकर ऐसा इंतजाम किया हो जिससे प्रेग्नेंट महिला अमेरिका में बच्चा पैदा कर सके। इसके अलावा, आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे, दूसरे देशों की सरकारों के लिए काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चे और अमेरिका के इलाकों में पैदा हुए ऐसे बच्चे जिन्हें कानून के मुताबिक नागरिकता नहीं मिलती उन्हें भी इस लिस्ट में रखा गया है।
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जानकारों का विरोध
इमीग्रेशन के जानकारों ने ट्रंप के इन नए आदेशों का कड़ा विरोध किया है और इन्हें संविधान के खिलाफ बताया है। न्यूयार्क के इमीग्रेशन वकील साइरस मेहता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ट्रंप का नया आदेश साफ तौर पर संविधान के खिलाफ है। अगर किसी के माता-पिता ने अमेरिका में बच्चे का जन्म तय करने के लिए पैसों का लेन-देन किया है तो इसके आधार पर नागरिकता से मना करना 14वें संशोधन के नियम को तोड़ता है।
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक हर साल अमेरिका में 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म बर्थ टूरिज्म की वजह से होता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में दूसरे देशों के पते वाली महिलाओं से सिर्फ 9,600 बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ था। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ने एक बयान में कहा कि अदालत पहले ही यह साफ कर चुकी है कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान से मिली है, इस अधिकार पर हमला करने वाले किसी भी आदेश का वही हाल होगा जो पहले वाले आदेश का हुआ था।