मोसाद ने जब किया 21वीं सदी का सबसे हैरतअंगेज ऑपरेशन, दुनिया चौंकी और डरी भी
हिजबुल्लाह पर इजरायल के पेजर और वॉकी-टॉकी अटैक का नैतिक और अनैतिक नजरिये से अलग-अलग विश्लेषण किया जा सकता है। मगर एग्जीक्यूशन के मामले में इससे शानदार ऑपरेशन कोई नहीं है। इस ऑपरेशन उस दावे को और भी स्थापित किया कि इजरायल कुछ भी अप्रत्याशित कर सकता है।

मोसाद का ऑपरेशन पेजर। (AI-generated image)
मोसाद- दुनियाभर में इजरायल के खुफिया अभियानों को अंजाम देने वाली एजेंसी। इसे देखने के दो नजरिये हैं। सहयोगी इसे दुनिया की एक प्रख्यात खुफिया एजेंसी मानते हैं, जबकि दुश्मन देश इसे कुख्यात कहते हैं। इस खुफिया एजेंसी ने दुनियाभर में सैकड़ों ऑपरेशनों को अंजाम दिया। इजरायली हितों की रक्षा की। दुनिया को स्तब्ध किया और अपने दुश्मनों में खौफ पैदा किया। मोसाद के कारनामों ने इजरायल जैसे छोटे देश की प्रतिष्ठा को बुलंदियों पर पहुंचाया। सीरिया, इराक और ईरान में हमलों की पृष्ठिभूमि तैयार की। हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे संगठनों में अपने एजेंटों की घुसपैठ करवाई।
ऑपरेशन फिनाले, ऑपरेशन डायमंड, ऑपरेशन एंतेबे और ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड जैसे तमाम अभियान मोसाद की कामयाबी के गवाह हैं। 20वीं सदी में सबसे अधिक किसी ऑपरेशन ने दुनिया को हैरत में डाला तो वह ऑपरेशन एंतेबे था। लेकिन 21वीं सदी के सबसे चौंकाने वाले ऑपरेशन को मोसाद ने साल 2024 में अंजाम दिया। इस ऑपरेशन की सफलता ने अमेरिकी राष्ट्रपति को भी स्तब्ध कर दिया। खुफिया गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी।
मोसाद के इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि दशकों पहले इसकी रणनीति बनी। सप्लाई चेन में घुसपैठ की गई और दुश्मन तक एक ऐसा हथियार पहुंचा दिया गया, जिसका कंट्रोल मोसाद हेडक्वार्टर में था। वर्षों तक मिशन की गोपनीयता को बनाए रखना इस ऑपरेशन का सबसे दिलचस्प पहलू था। इसी गोपनीयता पर पूरा ऑपरेशन टिका था। छोटी सी जानकारी लीक होने पर पूरा ऑपरेशन तबाह हो सकता था।
'विश्व व्यापी व्यू' की सीरीज में आज की कहानी हिजबुल्लाह पर मोसाद के पेजर अटैक और वॉकी-टॉकी अटैक की। कैसे ऑपरेशन की रणनीति बनी। इजरायल ने सप्लाई जेन में किस तरह घुसपैठ की। भारत का इससे क्या कनेक्शन था और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को इस ऑपरेशन ने कैसे चौंकाया। इसकी सफलता ने कैसे अमेरिकी के रक्षा और खुफिया अधिकारियों को एक असाधारण मिशन मानने पर मजबूर किया?
कैसे तैयार हुई पेजर अटैक की जमीन?
7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। उसी दिन इजरायल ने गाजा में हमास के खिलाफ पूर्ण युद्ध का एलान कर दिया। हजारों बम और मिसाइलों से गाजा पट्टी पर एक साथ हमला बोल दिया। लेबनान में बैठा हिजबुल्लाह यह देख नहीं सका। उसने अगले दिन यानी 8 अक्टूबर को हमास के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इजरायल के खिलाफ संघर्ष का एलान कर दिया। सैकड़ों रॉकेट से उत्तरी इजरायल पर अटैक किया। एक साल तक इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हल्की-फुल्की जंग चलती रही। हालांकि तब भी 60 हजार लोगों को उत्तरी इजरायल से दक्षिण की तरफ पलायन करना पड़ा।
इजरायल ने पहले संयम क्यों दिखाया?
इजरायल ने जानबूझकर हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष को तेज नहीं किया, क्योंकि उसे दो मोर्चे में फंस जाने का डर था। लेकिन एक साल बाद जब गाजा में हमास कमजोर पड़ने लगा। उसके टॉप लीडर्सशिप लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गए। तब इजरायल ने हिजबुल्लाह से निपटने का प्लान तैयार किया। इस बीच 31 जुलाई 2024 को ईरान की राजधानी तेहरान में हमास के मुखिया इस्माइल हानिया को मार दिया गया। हत्या का आरोप इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर लगा। इस घटना ने न केवल इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ाया, बल्कि हिजबुल्लाह के पूर्ण जंग में उतरने की नींव रख दी।

हिजबुल्लाह ने बनाया था 1000 रॉकेट अटैक का प्लान
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जंग 25 अगस्त 2025 से तेज होने लगी थी। सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन रोजाना एक-दूसरे पर दागे जा रहे थे। जेरूसलम पोस्ट के वरिष्ठ सैन्य विश्लेषक बॉब और वॉल स्ट्रीट जर्नल से जुड़े कॉफमैन की पुस्तक के कुछ अंश हाल ही में जेरूसलम पोस्ट में प्रकाशित हुए। इसमें उन्होंने बताया कि पेजर अटैक से पहले हिजबुल्लाह ने इजरायल पर करीब 1000 रॉकेट से हमला का प्लान बनाया था। उसके निशाने पर इजरायल का खुफिया मुख्यालय, सैन्य अड्डे, एयर डिफेंस सिस्टम और तमाम बस्तियां थीं।
जब हिजबुल्लाह को मिला सबसे बड़ा सरप्राइज
फिर आया 17 सितंबर 2024 का दिन। इस दिन लेबनान में एक आम सी सुबह हुई। दिनभर लोग अपने कामकाज में व्यस्त थे। राजधानी बेरूत में ट्रैफिक आम दिनों जैसा था। दोपहर ढलने वाली थी और दिन शाम की तरफ बढ़ रहा था। लोगों का हुजूम बाजारों में आने लगा। कोई फल खरीद रहा था। कोई सब्जी ले रहा था। कोई कपड़े पंसद करने में जुटा था। पार्कों में भी बच्चों, बड़े और बुजुर्गों का मेला था। लेकिन घड़ी की सुई 3 बजकर 30 मिनट पर पहुंची तो लेबनान में तहलका मच गया। देश के अलग-अलग हिस्सों में अचानक और एक साथ पेजर फटने लगे।
एक साथ भटे हजारों पेजर, पूरे लेबनान में मचा कोहराम
यह पेजर किसी के घर में फटा तो किसी के कार में। किसी के चेहरे सामने दग गया तो किसी के हाथ में ही फट गया। चलती बाइक, बाजारों और सड़कों तक पेजर फटने लगे। पूरे देश में कोहराम मच गया। पहले कुछ घंटे तक किसी को कुछ समझ नहीं आया। दुनियाभर की मीडिया इस अप्रत्याशित घटना को कवर करने लगी। लेबनान के अलग-अलग हिस्सों से घायलों के फोटो और वीडियो आने लगे। शक की सुई इजरायल की तरफ गई। बाद में इजरायल ने भी माना कि यह अटैक उसने ही करवाया था। जिसकी नींव वर्षों पहले रख दी गई थी।

24 घंटे में इजरायल का दूसरा सरप्राइज
17 सितंबर के पेजर धमाकों ने हिजबुल्लाह को संभलने का मौका नहीं दिया। संगठन ने अपने कम्युनिकेशन का मोड बदलने की रणनीति अपनाई। इजरायल को जबाव देने की तैयारी शुरू की। मगर 24 घंटे के अंदर इजरायल ने दूसरा सरप्राइज दे दिया। 18 सितंबर 2024 को इजरायल ने हिजबुल्लाह से जुड़े वॉकी-टॉकी को निशाना बनाया। इस बार लेबनान के अलावा सीरिया और इराक तक धमाकों की सूचना मिली। करीब 600 लोग घायल हुए।
आधुनिक खुफिया इतिहास और शायद अब तक के इतिहास में यह सबसे प्रभावशाली सप्लाई-चेन अभियान था। जनरल डेविड पेट्रायस, सीआईए के पूर्व निदेशक।
पेजर अटैक से पहले मोसाद हेडक्वार्टर में क्या हो रहा था?
जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक तेल अवीव स्थित मोसाद मुख्यालय में 3:20 मिनट तक काफी तनाव भरा माहौल था, क्योंकि मिशन के फेल होने का खतरा था। उस वक्त मोसाद के निदेशक डेविड बार्निया भारी दवाब में थे। वजह यह थी कि पेजर अभियान पर वर्षों का समय और भारी रकम लगाई गई थी। उससे भी बड़ी मोसाद की प्रतिष्ठा दांव पर थी। धमाकों के कई मिनट बाद तक मोसाद को ऑपरेशन की सफलता के बारे में पता नहीं चला। जब मीडिया में पूरे लेबनान से पेजर में विस्फोट की खबरें आने लगी तो मोसाद मुख्यालय में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
हमने एक बड़ा सरप्राइज प्लान किया था। उन्हें पता ही नहीं चला कि उन पर क्या आफत आई है। बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायली प्रधानमंत्री।
बीप-बीप के पीछे क्या थी मोसाद की रणनीति?
लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक राजधानी बेरूत के अलावा दहिया, दक्षिणी लेबनान और हिजबुल्लाह के गढ़ बेक्का घाटी में सबसे अधिक धमाके हुए। घायलों और पीड़ितों की संख्या भी सबसे अधिक यही थी।
धमाकों से पहले पेजर में बीप-बीप की आवाज आई। हिजबुल्लाह से जुड़े लोगों को लगा कि शायद कमांडर का कोई संदेश आया है। कमर पर बांधे पेजर को लड़ाकों ने निकाला और जैसे ही चेहरे पास संदेश पढ़ने के लिए ले गए, वैसे ही 10 सेकंड बाद धमाका हो गया।

कहा जाता है कि बीप-बीप आवाज के पीछे भी मोसाद की रणनीति थी, ताकि हिजबुल्लाह को अधिक से अधिक चोट पहुंचाई जा सके। अगर बिना आवाज के पेजर कमर पर बंधे-बंधे फट जाते तो शायद उतना नुकसान नहीं होता। जितना चेहरे के पास फटने से हुआ। इसका असर यह हुआ कि अधिकांश लोगों की आंखें चली गईं। हाथ उड़ गए। कान फट गए। चेहरे हमेशा-हमेशा के लिए बिगड़ गए।
लेबनान सरकार और यूएन क्या बोला?
19 सितंबर को लेबनान की सरकार ने यून सिक्योरिटी जनरल और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र भेजा। इसमें इजरायल पर पेजर और वॉकी-टॉकी अटैक का आरोप लगाया। पत्र में लेबनान की सरकार ने बताया कि दोनों हमलों में 37 लोगों की जान गई और पूरे देश में 3400 लोग घायल हुए। इसमें आगे बताया गया कि 17 सितंबर को हुई पहली घटना में गोल्ड अपोलो के मॉडल AR-924 rugged pagers में बड़ी संख्या में विस्फोट हुए। अगले दिन 18 सितंबर को Icom V82 वॉकी-टॉकी में एक साथ धमाकों को अंजाम दिया गया।
20 सितंबर 2024 को यूएन सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 17 सितंबर को लेबनान में हजारों पेजर एक साथ फटे। इन पेजरों का इस्तेमाल हिजबुल्लाह कम्युनिकेशन डिवाइस के रूप में कर रहा था।
कैसे चौंके अमेरिकी राष्ट्रपति?
इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने व्हाइट हाउस को पेजर अटैक की जानकारी इशारों- इशारों में दी थी। 17 सितंबर की सुबह गैलेंट ने अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन को फोन किया और बताया कि इजरायल की पास एक विशेष क्षमता है। तेल अवीव इसका लेबनान में अभ्यास करना चाहता है। इस बातचीत का खुलासा इजरायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत और बाइडेन प्रशासन में रक्षा उप सहायक सचिव रहे डैन शापिरों ने किया।

जब अमेरिकी मीडिया में लेबनान के भीतर से हजारों पेजर फटने की खबरें आने लगीं तो डैन शापिरों भी दंग रह गए। उन्हें समझ में आ गया था कि इजरायल के पास विशेष क्षमता क्या थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की टीम हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष बढ़ाने के पक्ष में नहीं थी। लेकिन इजरायल के ऑपरेशन पेजर ने उन्हें भी चौंका दिया। बाइडन की टीम ने न केवल इजरायल की प्रशंसा की, बल्कि हिजबुल्लाह को निशाना बनाने के तरीके पर हैरानी जताई।
एक दशक पहले बना प्लान
करीब एक दशक पहले मोसाद ने 'प्रलय के दिन' की तैयारी शुरू कर दी थी। उसकी रणनीति थी कि कैसे हिजबुल्लाह के रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उपकरण को हथियार में बदला जा सके। 2014 में मोसाद के मुखिया तामिर पार्डो और इजरायली रक्षा विभाग की खुफिया एजेंसी के प्रमुख हर्जी हालेवी ने हिजबु्ल्लाह के वॉकी-टॉकी को विस्फोटक में बदलने की नींव रखी। इसी बीच हिजबुल्लाह ने 15 हजार वॉकी टॉकी खरीदने का निर्माण लिया। यही सप्लाई चेन में मोसाद ने घुसपैठ की। वॉकी-टॉकी पर लगी बैटरी मोसाद की एक फैक्ट्री में बनी। इसमें विस्फोटक लगाया गया था। इन वॉकी-टॉकी को ऐसे डिजाइन किया गया कि हिजबुल्लाह के लड़ाके अपनी जैकेट की जेब में रख सके।
लेकिन वॉकी-टॉकी के साथ एक दिक्कत ये थी कि हिजबुल्लाह के लड़ाके इन्हें रोजमर्रा में इस्तेमाल नहीं करते थे। संघर्ष के दौरान छोड़कर बाकी दिन यह बैरक में पड़े रहते थे। मोसाद ने एक ऐसी डिवाइस की तरफ अपना ध्यान लगाया, जिसका हिजबुल्लाह के लड़ाके रोजाना इस्तेमाल करते हो। उसकी यह खोज पेजर पर आकर खत्म हुई।
एक भाषण से इजरायल को मिला बड़ा मौका
हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह को भी पेजर खूब पंसद थे, क्योंकि गुप्त तरीके बातचीत करना आसान था। लोकेशन ट्रैस करना नामुमकिन था। यही पर मोसाद को वह अवसर मिला जिसका, उसे वर्षों से इंतजार था। फरवरी 2024 में नसरल्लाह ने अपने एक टेलीविजन संबोधन में हिजबुल्लाह के लड़ाकों से कहा, 'तुम मुझसे पूछते हो कि एजेंट कहां है? मैं तुमसे कहता हूं कि तुम्हारे हाथों में जो फोन है, वही एजेंट है। इसे दफना दो। इसे लोहे के बक्से में बंद करके ताला लगा दो।'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नसरल्लाह के भाषण के बाद हिजबुल्लाह ने बड़े पैमाने पर पेजर खरीदे। मगर सप्लाई चेन और निर्माण में मोसाद ने घुसपैठ की। हिजबुल्लाह तक पेजरों के पहुंचने से पहले उनके साथ छेड़छाड़ की और अंदर लगभग 3 ग्राम विस्फोटक लगाया। नसरल्लाह के भाषण के लगभग 7 महीने बाद इजरायल ने हिजबुल्लाह पर पेजर अटैक करके पूरी दुनिया को चौंका दिया।
हमलावरों ने सचमुच 20वीं सदी के संचार उपकरणों को सामूहिक विनाश के हथियारों में बदल दिया। माया याह्या, कार्नेगी मिडिल ईस्ट सेंटर की निदेशक।
पेजर अटैक से क्या बदला?
पेजर अटैक ने हिजबुल्लाह के लड़ाकों में खौफ भर दिया। हर इलेक्ट्रॉनिक सामान को न केवल लेबनान में बल्कि दुनियाभर में शक की निगाह से देखे जाने लगा। यह पहली बार था जब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली किसी आम डिवाइस को हथियार में तब्दील कर दिया गया। इस्तेमाल करने वाले शख्स के खिलाफ ही उसका उपयोग किया गया।
पेजर और वॉकी-टॉकी अटैक हाइब्रिड युद्ध में तकनीक का सबसे खौफनाक उदाहरण था। भले ही इजरायल यह कह रहा हो कि उसने इन हमलों को हिजबुल्लाह के खिलाफ अंजाम दिया गया, लेकिन पीड़ितों में बड़ी संख्या बच्चों की थी। दो साल बीत जाने के बाद भी यह बच्चे आज तक इस घातक हमले को भूल नहीं पाए हैं। किसी बच्चे का हाथ कट चुका है तो किसी के आंख की रोशनी जा चुकी है। किसी बच्चे का चेहरा अजीवन के लिए खराब हो गया है। यह ऑपरेशन यह साबित करता है कि कैसे नागरिक उपकरणों को सामूहिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
पेजर अटैक से कितना खौफ पैदा हुआ?
अंतिम संस्कार और अन्य स्थानों में लोगों को उन वॉकी-टॉकी की बैटरियां निकालते देखा गया, जो अभी तक फटी नहीं थीं। उन्हें कूड़ेदानों और नालों में फेंक रहे थे। देशभर में कई माता-पिता ने अपने उपकरणों जैसे- बेबी मॉनिटर, आईपैड, होम सिक्योरिटी सिस्टम को अनप्लग कर दिया, ताकि कहीं उनमें भी विस्फोटक न लगा हो। कुछ बच्चों ने अपने फोन स्कूल ले जाने से मना कर दिया। बच्चों ने अपने माता-पिता से कहा कि वे मरना नहीं चाहते। - पत्रकार राया जलाबी ने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखा।

लेबनान में दो दिनों तक चले घातक पेजर और वॉकी-टॉकी धमाकों के बाद लोग रोजमर्रा के संचार उपकरणों से डरे हैं। अफवाहों का अंदाजा लगाने के लिए बता दें कि लोगों को तरह-तरह के संदेश भेजे जा रहे हैं। इनमें उन्हें अपने वाई-फाई राउटर बंद करने या कुछ उपकरणों से बैटरी निकालने को कहा जा रहा है। सचमुच घर में मौजूद सामान्य वस्तुओं को लेकर भी डर का माहौल है। पत्रकार नबीह बुलोस, लॉस एंजिल्स टाइम्स के मध्य पूर्व ब्यूरो प्रमुख ने 2024 में लिखा।
इजरायल को क्या फायदा हुआ
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेजर हमला करवाने से इजरायल को फायदा क्या मिला? दरअसल, इस हमले ने हिजबुल्लाह में खौफ पैदा किया। उसके लड़ाके किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को छूने से डरने लगे। हिजबुल्लाह का संगठन के अंदर अपने ही लोगों से संचार ठप गया। इजरायल पर पलटवार करने की क्षमता बाधित हुई। अधिकांश मामलों में पेजर निर्णय लेने वाले को दिया जाता है, ताकि निचले स्तर तक सुरक्षित तरीके से संदेश पहुंचाया जा सके।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी एक बयान में कहा, 'आमतौर पर जिन्हें बीपर मिलते हैं वे कमांड एंड कंट्रोल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर होते हैं। इसीलिए उन्हें बीपर की जरूरत होती है।' नेतन्याहू के इस बयान से ही आप समझ सकते हैं कि हिजबुल्लाह की निर्णय लेने की क्षमता और उसे निचले स्तर तक पहुंचाने का ढांचा कैसे प्रभावित हुआ।

हिजबुल्लाह जब तक संभालता तब तक इजरायल ने उसके खिलाफ भीषण बमबारी शुरू कर दी थी। इस अभियान की सफलता अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पेजर अटैक के 10 दिन बाद 27 सितंबर को हिजबुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह को इजरायल ने बेरूत में मार दिया।
हिजबुल्लाह से जुड़े दैनिक अखबार अल-अखबार के एडिटर इन चीफ इब्राहिम अल-अमीन ने 19 सितंबर 2024 को अपने लेख में लिखा, 'यह इस क्षेत्र में 'रेजिस्टेंस फोर्सेज' के साथ संघर्ष के इतिहास का सबसे बड़ा जासूसी ऑपरेशन था। यह ऑपरेशन इजरायल के लिए युद्ध के मैदान और लोगों के दिलों-दिमाग दोनों ही मोर्चों पर सफल रहा, क्योंकि पहली बार वह लेबनान के लोगों और हिजबुल्लाह समर्थकों का कमजोर करने में कामयाब रहा।'
कैसे किया गया बैटरी में धमाका?
शुरुआत में दुनियाभर ने पेजर और वॉकी-टॉकी को साइबर हमला माना। यह भी कहा गया कि किसी मैलवेयर से बैटरी को अत्याधिक गर्म करके धमाका करवाया गया। बाद में कई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी ने पेजर और वॉकी-टॉकी की सप्लाई चेन में घुसपैठ की। बैटरियों में विस्फोटक लगाया। वर्षों तक उपयुक्त समय का इंतजार किय गया।
17 सितंबर को सही समय आने पर मोसाद मुख्यालय से मिले एक कमांड से एक साथ हजारों धमाकों को अंजाम दिया गया। इतने व्यापक रूप में यह पहली बार था जब दुनिया ने देखा कि संचार के उपकरणों को कैसे हथियार में बदला जा सकता है। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता वर्षों तक इसके गोपनीय बने रहने की थी। अगर एक सूचना लीक होती तो पूरा ऑपरेशन विफल हो जाता। वर्षों की मेहनत और भारी भरकम रकम डूब जाती।
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