अमेरिका में एक महिला टेक कंपनी की CEO को 25 महीने की जेल की सजा हुई है। बताया जा रहा है कि यह फैसला निवेशकों की याचिका पर हुआ है जिसमें उन्होंने करीब 7 मिलियन डॉलर यानी लगभग 62 करोड़ भारतीय रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। आरोपी महिला की पहचान तुर्की की 27 साल की गोकचे गुवेन के रूप में हुई है और वह न्यूयॉर्क की टेक स्टार्टअप कंपनी काल्डर की फाउंडर और पूर्व CEO रह चुकी हैं। यह मामला दुनियाभर में चर्चा में है क्योंकि गुवेन को साल 2025 में प्रतिष्ठित मैगजीन Forbes की 30 अंडर 30 लिस्ट में जगह मिली थी।
गुवेन को Forbes की लिस्ट में मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग कैटेगरी में शामिल किया गया था। वह इस कैटेगरी के कवर पेज पर भी नजर आई थीं, जिसके बाद दुनिया की नजर उन पर गई थी। दुनियाभर के युवाओं के लिए वह प्रेरणा बनीं लेकिन अब उन्हें निवेशकों से धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में जेल जाना होगा।
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गुवने ने कबूला जुर्म
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में जज लुईस ए. कपलान ने 30 अक्टूबर को उन्हें 25 महीने की जेल की सजा सुनाई है। बताया जा रहा है कि गुवेन ने 15 मई 2026 को सिक्योरिटीज फ्रॉड के एक आरोप में अपना जुर्म कबूल कर लिया था।
पूरा मामला समझिए
दरअसल, गोकचे गुवेन ने साल 2022 में काल्डर नाम की कंपनी शुरू की थी। यह एक टेक और फिनटेक स्टार्टअप था, जो दूसरी कंपनियों को ग्राहकों के लिए लॉयल्टी और रिवॉर्ड प्रोग्राम बनाने में मदद करता था। आसान भाषा में समझें तो कंपनी के जरिए ब्रांड अपने ग्राहकों को कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट और दूसरे फायदे दे सकते थे। अप्रैल 2024 में गुवेन ने अपनी कंपनी के लिए सीड फंडिंग जुटाने की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कई वेंचर कैपिटल निवेशकों से संपर्क किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को दिए गए प्रेजेंटेशन और डॉक्यूमेंट्स में कंपनी की कमाई और उसके साथ काम करने वाले ब्रांड्स की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई। उन्होने दावा किया कि 26 ब्रांड काल्डर की सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 53 दूसरे ब्रांड उसके फ्री बेसिक प्रोग्राम से जुड़े हैं। हालांकि, जांच में सामने आया कि कुछ ब्रांड केवल सीमित समय के पायलट प्रोजेक्ट के लिए कंपनी से जुड़े थे और वह भी काफी कम कीमत पर।
वीजा में धोखाधड़ी का आरोप
गुवेन पर सिर्फ निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के ही आरोप नहीं लगे हैं बल्कि वीजा हासिल करने के लिए भी गलत जानकारियां और फर्जी जस्तावेज देने का आरोप लगा है। उनका स्टूडेंट वीजा खत्म होने के बाद उनकी कंपनी ने उनके लिए O-1A वीजा अप्लाई किया। यह वीजा असाधारण क्षमता रखने वालों को दिया जाता है। आरोप है कि इस आवेदन में भी कंपनी की कमाई और ब्रांड पार्टनरशिप को लेकर वही गलत दावे दोहराए गए, जो निवेशकों के सामने किए गए थे। जांच में पता चला कि इन पत्रों पर संबंधित अधिकारियों की जानकारी या सहमति के बिना गुवेन ने खुद डिजिटल सिग्नेचर किए थे।
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अब देना होगा मुआवजा
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, कोर्ट ने गुवेन को पीड़ित निवेशकों को 6,717,997 डॉलर मुआवजे के तौर पर देने और इतनी ही रकम जब्त कराने का आदेश भी दिया है। यानी उन्हें करीब 6.7 मिलियन डॉलर की रकम लौटाने के साथ इतनी ही राशि जब्त भी करानी होगी। अमेरिकी अटॉर्नी जेमी मैकडोनाल्ड ने कहा कि गुवेन ने निवेशकों को कंपनी की कमाई और ग्राहकों की संख्या को लेकर ऐसे दावे किए, जो सच नहीं थे। इसके बाद उन्हीं झूठे दावों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल इमिग्रेशन लाभ पाने के लिए किया गया।