बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। खबर है कि बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या कर दी गई है। भीड़ ने धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। बांग्लादेश में किसी हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना है।
अब जिस हिंदू युवक की हत्या की गई है, उसका नाम मोनी चक्रवर्ती है, जो नरसिंगड़ी जिले में किराने की एक दुकान चलाता था। बताया जा रहा है कि सोमवार रात करीब 10 बजे कुछ लोगों ने मोनी पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। बाद में उसकी मौत हो गई।
बांग्लादेश में जुलाई विद्रोह के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद से ही हिंसा जारी है। इस हिंसा में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। भीड़ ने अब तक कई हिंदुओं की हत्या कर दी है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा पर भारत ने चिंता जताई है।
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फैक्ट्री मालिक की गोली मारकर हत्या
इससे कुछ घंटों पहले ही 45 साल के फैक्ट्री मालिक राणा प्रताप की भी हत्या कर दी गई थी। जोसार जिले में एक फैक्ट्री चलाने वाले राणा प्रताप की कुछ लोगों ने गोली मारकर दी थी। इतना ही नहीं, उनका गला भी रेत दिया गया था।
जानकारी के मुताबिक, राणा प्रताप कोपालिया बाजार में बर्फ की फैक्ट्री चलाते थे। सोमवार शाम को कुछ लोगों ने उन्हें फैक्ट्री के बाहर बुलाया और गोली मार दी। बताया जा रहा है कि उनके शव के पास से गोलियों के 7 खोखे मिले हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ लोग मोटरसाइकल से आए थे। राणा प्रताप के साथ पहले तो उन्होंने बहस की और फिर गोली मारकर फरार हो गए। पुलिस ने बताया कि प्रताप के सिर पर तीन गोलियां मारी गई हैं।
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हिंदुओं को निशाना बना रही भीड़
उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा में भीड़ हिंदुओं को निशाना बना रही है।
हाल ही में झेनाइदा जिले में एक हिंदू महिला से गैंगरेप की घटना सामने आई है। दो आरोपियों ने महिला को एक पेड़ से बांध दिया, उसके बाल काट दिए और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया। बाद में बेहोशी की हालत में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इससे पहले राजधानी ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर खोकोन चंद्र दास पर भी भीड़ ने हमला कर दिया था और जिंदा जला दिया था। यह घटना तब हुई थी, जब वह दुकान बंद कर अपने घर जा रहे थे। भीड़ उन्हें जलाकर भाग गई थी। खुद को बचाने के लिए वह तालाब में कूदे लेकिन 3 जनवरी को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

29 दिसंबर को मेमेनसिंह में बजेंद्र बिस्वास की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बजेंद्र बिस्वास भालुका में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। उन्हें उनके ही कलीग नोमान मियां ने गोली मार दी थी।
इससे पहले 24 दिसंबर को अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। वहीं, 18 दिसंबर को 25 साल के दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और बाद में उन्हें जला दिया था।