बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हत्या की घटनाएं खमने का नाम नहीं ले रही हैं। हिंसा का शिकार हिंदुओं में ताजा नाम राणा प्रताप बैरागी का जुड़ा है। राणा प्रताप बैरागी बांग्लादेश के जोसार जिले के मोनीरामपुर में हिंसा का शिकार हो गए। कुछ उपद्रवियों ने सोमवार 5 जनवरी को दिन के समय ही उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह पिछले तीन हफ्तों में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की पांचवी घटना है।
इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश में चुनाव से पहले देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है लेकिन इसके बावजूद भी बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। मोहम्मद यूनुस सरकार ने तो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को मानने से ही इनकार कर दिया है और इन्हें सामान्य आपराधिक घटना बताया है।
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पुलिस ने नहीं दिया बयान
आज बांग्लादेश में जिस हिंदु युवक की गोली मारकर हत्या की गई है, उनकी पहचान राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें दोपहर के आसपास जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। हत्या की इस घटना के बारे में अभी डिटेल्स सामने नहीं आई है। पुलिस ने इस घटना का संज्ञान ले लिया है और सूचना मिलने के बाद शव को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, अभी तक कोई भी कार्रवाई पुलिस की ओर से नहीं की गई है। खबर लिखे जाने तक पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक बयान दर्ज नहीं किया है।
कौन थे राणा बैरागी?
इस घटना में जिन राणा प्रताप बैरागी की मौत हुई है उन्हें पेशे से पत्रकार बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वॉइस ऑफ बांग्लादेशी हिंदू नाम के एक हैंडल से पोस्ट करके उनके बारे में जानकारी दी गई है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि राणा प्रताप बैरागी 'बीडी खबोर' नाम के एक बांग्लादेशी अखबार के कार्यवाहक संपादक थे। हालांकि, अभी तक हत्या के पीछे के कारण सामने नहीं आए हैं। दिन दहाड़े हुई इस वारदात से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पूरे बांग्लादेश में पत्रकार समुदाय के बीच भी लोग इस घटना से डरे हुए हैं।
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हिंदुओं के खिलाफ हिंसा
यह हत्या बीते कुछ हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई पांचवी हिंसक घटना बताई जा रही है। इन वारदातों ने देश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता खड़ी कर दी है। कुछ दिन पहले बांग्लादेश के मेमनसिंह जिले के भालुका में एक फैक्ट्री में काम करने वाले 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। दीपू दास की हत्या के बाद से हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर बांग्लादेश पर प्रश्न उठने लगे हैं।