वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को अमेरिकी सेना ने 'पकड़ लिया' है। दुनिया को कानून और शांति का पाठ पढ़ाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर हमला किया, राष्ट्रपति भवन के पास 150 से ज्यादा विमानों के साथ घुसपैठ की, सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति को ही बंधक बना लिया। वेनेजुएला की राजधानी काराकास में अब राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने निकोलस मादुरो पर ड्रग तस्करी के संगीन आरोप लगाए और उन्होंने वेनेजुएला की सत्ता व्यवस्था ही बदल दी। डोनाल्ड ट्रंप की इस कार्रवाई को इंटरनेशनल लॉ के जानकार वैश्विक अपराध बता रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, अपने इस फैसले की वजह से अमेरिका में ही घिर गए हैं। अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गैरजरूरी सैन्य कार्रवाई की है। उन्होंने निकोलस मादुरो को क्रूर और अवैध शासक तो बताया लेकिन ट्रंप की सैन्य कार्रवाई को गलत ठहराया।
कमला हैरिस, पूर्व उपराष्ट्रपति, अमेरिका:- डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं थी। निकोलस मादुरो भले ही एक क्रूर और अवैध तानाशाह हों, लेकिन इससे यह सच्चाई नहीं बदलती कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और गलत थी। हमने ऐसा पहले भी देखा है।
क्या वेनेजुएला की संप्रभुपता पर हमला सही है? वैश्विक कानून क्या कह रहे हैं?
दीवान लॉ कॉलेज में इंटनरनेशनल लॉ पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता ने कहा, 'अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की कई शर्तों का उल्लंघन किया है। अमेरिका ने अक्टूबर 1945 में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर हस्ताक्षर किया था। वैश्विक संघर्षों में कई बार अमेरिका ने ऐसे कानूनों की धज्जियां उड़ाई हैं। चार्टर, दुनिया को विश्व युद्धों से बचाने के लिए बना था। ट्रंप, अमेरिका के वादे से मुकरे हैं।'
डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्ट राष्ट्र के चार्टर 2 (4) का उल्लंघन किया है। यह अनुच्छेद, दूसरे संप्रभु देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से बचने की बात कहता है। यह अनुच्छेद संप्रभुता के सम्मान से संबंधित है। वेनेजुएला पर हमला करके अमेरिका ने यूनाइटेड नेशंस चार्टर का उल्लंघन किया है। उन्होंने न केवल हमला किया है, बल्कि वहां संवैधानिक तौर पर नियुक्त राष्ट्रपति को उनकी पत्नी के साथ बंधक बनाया है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल स्टडीज के स्कॉलर रहे डॉ. दीपक कुमार भी अमेरिकी कार्रवाई को वैश्विक नियमों के खिलाफ कहा है। उन्होंने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप अब तानाशाह हो गए हैं। वेनेजुएला में बिना किसी उकसावे के उन्होंने कार्रवाई की है। उन्होंने एक संप्रभु देश में अराजकता फैलाई है, जबकि वह खुद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो पावर वाले राज्य हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता ने बताया कि अमेरिका ने अपने देश का ही कानून तोड़ा है। अमेरिका में वार पावर्स रेजोल्यूशन लागू है। इस कानून को अमेरिकी कांग्रेस ने 7 नवंबर 1973 को पारित किया था। वियतनाम युद्ध के दौरान राष्ट्रपति की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने के लिए इसे बनाया गया था। राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कंबोडिया में बिना कांग्रेस की मंजूरी के सैनिक भेजे थे। उसके बात यह अधिनियम आया था।
अधिकारियों के संग बैठक करते डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI
सफाई क्या दे रही है अमेरिका?
अमेरिकी सरकार, इस कार्रवाई को उपलब्धि बता रही है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, 'मैंने अमेरिका का शानदार अवतार देखा है। मैंने उन्हें देखा जो देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं। यह एक कानून से जुड़ा अभियान था, लेकिन हम कांग्रेस को इसमें शामिल रखते रहेंगे।'
दुनिया इन हमलों पर क्या कह रही है?
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक स्तर पर इसका संदेश गलत गिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय अखडंता के सिद्धांत को तोड़ दिया है। किसी भी दूसरे देश की संप्रभुता में इस तरह दखल देना, वैश्विक संधि का अपमान करना है। चीन, ईरान, मैक्सिको जैसे देशों ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का घोर उल्लंघन कहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई है कि यह कार्रवाई मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हैं। एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति को उनकी पत्नी के साथ बिना किसी अधिकार के उठा लेना कानूनी तौर पर गलत है।