इटली की सरकार ने हाल ही में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के बाद एक नया और सख्त कानून लागू कर दिया है। इस कानून के तहत प्रदर्शनों के दौरान हिंसा करने, चेहरे छिपाने और उपद्रव मचाने वालों को भारी जुर्माना और जेल की सजा भुगतनी होगी। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने यह साफ किया है कि जो लोग भी विरोध प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाएंगे उनके खिलाफ सरकार सख्ती से पेश आएगी।
उन्होंने साफ किया कि देश की संपत्ति को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आता है। सरकार ने शांति बनाए रखने के लिए जगह-जगह पर सख्ती बढ़ा दी है। खासकर उत्तरी इटली में शांति बनाए रखने के लिए सेना तक की तैनाती कर दी है।
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नए कानून के तहत सजा का प्रावधान
सरकार ने यह साफ किया है कि जो लोग भी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने का काम करेंगे उन्हें 5 साल तक की जेल और लगभग 20 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जो लोग चेहरे छिपाकर हिंसा करेंगे उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस कानून के तहत माता-पिता पर वित्तीय जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यदि 14 से 17 साल के नाबालिग किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं या लूटपाट करते हैं तो उसकी भरपाई उनके माता-पिता को करनी होगी। पुलिस को यह भी विशेष अधिकार होगा कि 14 से 17 साल के बच्चों को अपराध करने से पहले भी एहतियातन हिरासत में लिया जा सकेगा।
मिलान में सेना की तैनाती
उत्तरी इटली के बड़े शहरों, खासकर मिलान में पिछले दिनों हुई तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट के बाद सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए 500 सेना के जवानों की तैनाती की घोषणा की है। ये जवान 2026 के अंत तक पुलिस के साथ संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा करेंगे।
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महंगाई और विरोध का माहौल
इटली में दोनों तरफ से विरोध झेल रहा है। एक तरफ जहां उत्तरी इलाकों में युवा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं वहीं दूसरी तरफ देश के दक्षिणी हिस्सों में ट्रक ड्राइवरों ने डीजल के बढ़ते दामों और महंगाई के खिलाफ चक्का जाम कर रखा है। सप्लाई रुकने की वजह से कई फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं और फल-सब्जियां खराब होने की कगार पर हैं।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने माना कि लोग आर्थिक तंगी और महंगाई से परेशान है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कहा कि आर्थिक समस्याओं का हवाला देकर हिंसा और उपद्रव को सही नहीं ठहराया जा सकता।