समुद्री डाकुओं का अड्डा, एक भी मूल निवासी नहीं, सेशेल्स के बनने की कहानी क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के 3 दिवसीय दौरे पर हैं। यह देश, कई देशों के नागरिकों की मिली जुली संस्कृति की उपज है। क्यों खास है यह देश, आइए जानते हैं।

सेशेल्स। Photo Credit: PTI
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
को सेशेल्स देश के सबसे बड़े पर्यावरण सम्मान 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' से सम्मानित किया गया है। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दिया है। सेशेल्स में यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में बेहतरीन नेतृत्व के लिए दिया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा पर गए हैं। सोमवार को वे सेशेल्स के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति से द्विपक्षीय सहयोग पर विस्तार से बातचीत की।
115 द्वीपों के समूह से बना यह देश खास क्यों हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां क्यों गए हैं, कैसे सेशेल्स बना था, कौन इस देश के मूल निवासी हैं, भारत के लिए यह देश क्यों खास है, ऐसे कई सवाल हैं, जो अब लोग पूछ रहे हैं। क्या है इस देश की कहानी, आइए जानते हैं।
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अनोखा क्यों है द्वीप?
यह दुनिया का इकलौता ऐसा द्वीप समूह है, जिसका निर्माण ग्रेनाइट चट्टानों से हुआ है। यह हजारों साल पहले 'गोंडवानालैंड' महाद्वीप से टूटा और समुद्र के अलग हुए हिस्से सेशेल्स बने। कई द्वीप ऐसे हैं जो मूंगा चट्टानों (कोरल रीफ्स) से बनी हैं। यहां सदियों तक कोई मूल निवासी ही नहीं था। 16वीं शताब्दी तक यहां समुद्री लुटेरे छिपते थे। यह एक निर्जन द्वीप था।
115 द्वीपों का समूह है सेशेल्स
सेशेल्स हिंद महासागर में 115 छोटे खूबसूरत द्वीपों का देश है। यह अफ्रीका के पूर्वी तट से दूर है। सेशेल्स के बिखरे द्वीपों को सदियों से व्यापारी जानते थे लेकिन ये समुद्री लुटेरों के छिपने के अड्डे थे। इसकी अपनी पहचान नहीं थी बल्कि यह देश, मॉरिशस का हिस्सा था। साल 1609 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सबसे पहले इन द्वीपों पर अपने कदम रखे।
साल 1742-44 में फ्रांसीसी यात्री लाजारे पिकॉल्ट ने इन्हें खोजा और 1756 में फ्रांस ने इन्हें अपना हिस्सा बना लिया। फ्रांस का कब्जा यहां बरकरार नहीं रह पाया। साल 1814 में जंग हुई और फ्रांस इसे हार बैठा। इसी साल, फ्रांस ने सेशेल्स ब्रिटेन को सौंप दिया।
कैसे बसा यह देश?
साल 1830 के दशक में यूरोप, गुलामी की बेड़ियों से धीरे-धीरे आजाद होने लगा। वहां के लोगों को मजदूर मिलने बंद हो गए। अंग्रेज मजदूर बनने के लिए तैयार नहीं थे, अश्वेतों ने भी बगावत शुरू कर दी थी। तब तक यहां कुछ बस्तियां बस गईं थीं। फ्रांस की वजह से यहां आबादी ठीक-ठाक स्थिति में पहुंच गई थी।
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सेशेल्स को पहचान कैसे मिली?
सेशेल्स में कपास और अनाज की खेती हो जाती थी। नारियल, वेनिला और दालचीनी जैसी फसलें लोगों लोगों ने उगाई तो कामयाबी मिली। साल 1903 तक, सेशेल्स को बांटने का फैसला ब्रिटेन कर चुका था। 10 नवंबर 1903 को मॉरीशस से इसे अलग कर दिया गया। अब यह ब्रिटेन की अलग क्राउन कॉलोनी बन गई। साल 1948 में यहां चुने हुए सदस्यों वाली संसद बनाई गई। 1963 में अमेरिका ने मुख्य द्वीप महे पर सैटेलाइट ट्रैकिंग स्टेशन बनाया, जिससे देश में पहली बार नियमित हवाई सेवा शुरू हुई।
कब आजाद हुआ सेशेल्स?
ब्रिटैनिका की एक रिपोर्ट बताती है कि सेशेल्स को 1975 में आंतरिक स्वशासन मिला और 1976 में पूर्ण स्वतंत्रता मिली। वह राष्ट्रमंडल का सदस्य बना। शुरुआत में जेम्स मांचम राष्ट्रपति और फ्रांस-अल्बर्ट रेने प्रधानमंत्री बने। 1977 में रेने ने तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली। साल 1979 में नया संविधान बनाकर देश को एकदलीय समाजवादी राज्य बना दिया गया।
तब तक वहां फ्रांस-अल्बर्ट रेने की पार्टी, इकलौती वैध पार्टी थी, जिसका नाम पीपुल्स पार्टी था। 1990 के दशक में दुनिया की नजर पड़ी, उसके बाद देश लोकतांत्रिक रास्ते पर आगे बढ़ा। यहां तभी बहुदलीय चुनाव शुरू हुए। सेशेल्स में नया संविधान बना और धीरे-धीरे यह देश समाजवादी अर्थव्यवस्था को बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलाता चला गया।
कैसे आगे बढ़ा सेशेल्स?
90 के दशक में सेशेल्स का निजीकरण शुरू हुआ। सेशेल्स के पास पर्यटन के कई अवसर थे, जिन्हें इस देश ने खूब भुनाया। 21वीं सदी में सेशेल्स ने कई चुनौतियां झेलीं। 2004 में सुनामी से भारी नुकसान हुआ। पर्यटन की संभावनाओं वाला यह देश लगातार आगे बढ़ रहा है।
कैसा है यहां का लोकतंत्र?
जेम्स मिशेल 2006, 2011 और 2015 में राष्ट्रपति चुने गए। 2016 में संविधान बदलकर राष्ट्रपति के लगातार तीन टर्म की जगह दो टर्म कर दिए गए। उसी साल संसदीय चुनावों में विपक्षी गठबंधन 'लिनयोन डेमोक्रेटिक सेसेल्वा' (LDS) ने बहुमत हासिल किया। मिशेल ने इस्तीफा दे दिया और डैनी फॉरे राष्ट्रपति बने।
2020 के चुनाव में पहली बार यूनाइटेड सेशेल्स (US) पार्टी हारी। वावेल रामकलावन राष्ट्रपति बने। उन्होंने कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को संभाली। सेशेल्स में भ्रष्टाचार हमेशा चुनावी मुद्दा रहा। सितंबर 2025 में उन्हें पैट्रिक हर्मिनी से हार मिली। अब पैट्रिक हर्मिनी वहां के राष्ट्रपति हैं।
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सेशेल्स में मूल निवासी ढूंढ नहीं पाएंगे आप
सेशेल्स बहुभाषी लोगों की मिश्रित आबादी वाला देश है। यहां अफ्रीकन, एशियन, अरबी और यूरोपियन मूल के लोग रहते हैं। 92 फीसदी लोग इसी मूल के हैं। यह बहुसंख्यक समूह देश की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सद्भाव का मुख्य आधार है। देश की मुख्य भाषाएं क्रेओल, अंग्रेजी और फ्रेंच हैं, जिन्हें सभी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। यहां ये सभी भाषाएं बोली जाती हैं। यहां ईसाई समाज बहुसंख्यक है, जिनकी आबादी 82 फीसदी है। अल्पसंख्यक समुदायों में हिंदू 2.1 प्रतिशत और मुस्लिम 1.1 प्रतिशत हैं। यहां सारे लोग बाहर से आकर बसे हैं, कोई मूलनिवासी नहीं है।
सेशेल्स में कैसा चलता है कारोबार?
सेशेल्स, हिंद महासागर में 115 द्वीपों वाला छोटा सा देश, आज आर्थिक रूप से काफी मजबूत और स्थिर हो गया है। महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे है। सार्वजनिक कर्ज 2030 से पहले 50 प्रतिशत से कम करने की सरकार कोशिश कर रही है। प्रति व्यक्ति आय पूरे सब-सहारा अफ्रीका में सबसे ज्यादा है। 20 साल पहले यह देश गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ था।
कब डगमगाई थी अर्थव्यवस्था?
साल 2000 के मध्य में सेशेल्स में बड़े-बड़े घाटे, भारी कर्ज और विदेशी मुद्रा के भंडार खत्म हो चुके थे। 2008 तक सरकारी कर्ज जीडीपी का 192 प्रतिशत हो गया था और विदेशी मुद्रा सिर्फ दो हफ्ते के आयात के लिए ही बची थी। वैश्विक वित्तीय संकट के समय देश विदेशी कर्ज चुकाने में असफल हो गया और क्रेडिट रेटिंग गिर गई।
कैसे संकट से बाहर निकला सेशेल्स?
सरकार ने IMF और अन्य देशों की मदद से बड़े सुधार शुरू किए। सभी विदेशी मुद्रा प्रतिबंध हटा दिए गए,मुद्रा अवमूल्यन हुआ, सरकारी खर्च पर काबू किया गया, सरकारी कंपनियों में सुधार किया गया और सब्सिडी की जगह जरूरतमंदों को सीधे मदद देने की व्यवस्था की गई। कर्ज में छूट भी मिली। इन सुधारों से जल्दी अच्छे नतीजे आए। महंगाई घटी, विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़कर तीन महीने से ज्यादा का हो गया। 5 साल में कर्ज जीडीपी का 70 प्रतिशत से नीचे आ गया। इससे निवेशकों का भरोसा लौटा और देश स्थिरता की राह पर चल पड़ा है।
भारत और सेशेल्स के बीच कारोबारी रिश्ते कैसे हैं?
भारत सेशेल्स के अहम व्यापारिक साझेदारों में से एक है। सेशेल्स को भारत चावल, प्रॉसेस्ड फूड, सीमेंट, वस्त्र, कपास, गाड़ियां, दवाइयां और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट बेचता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 84.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत ज्यादा है। भारत ने 76.19 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के उत्पाद बेचे हैं। सेशेल्स से आयात 8.69 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। दोनों देशों के बीच व्यापार स्थिर है।
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