अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में डोनाल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी शांति बोर्ड की बैठक हुई। भारत पहली बार बतौर ऑब्जर्वर शामिल हुआ। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया भी पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में पहुंचा। बैठक में कुल चार दर्जन से अधिक देशों ने हिस्सा लिया। मगर इनमें से आधे ही पीस बोर्ड के सदस्य है। पहली बैठक में पांच देशों ने अपने सैनिक गाजा भेजने पर सहमति जताई। वहीं मिस्र और जॉर्डन ने ट्रेनिंग देने का वादा किया है। पीस बोर्ड का मकसद गाजा पट्टी का पुनर्निर्माण करना है, जहां 2023 से जारी जंग में अब तक 72 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है। वहीं सीजफायर के बाद से 600 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
कौन-कौन गाजा में भेज रहा अपनी आर्मी?
पीस बोर्ड के तहत एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) का गठन शामिल है। अभी तक पांच देशों ने गाजा में अपनी सेना भेजने की हामी भरी है। इनमें इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया शामिल हैं। अमेरिकी सेना के जनरल जैस्पर जेफर्स को आईएसएफ का मुखिया बनाया गया है। इंडोनेशिया को उप कमांडर का पद दिया गया है। इंडोनेशिया अपने 8 हजार जवानों के भेजेगा। हालांकि इंडोनेशिया के अलावा किसी देश ने अपने जवानों की संख्या ऐलान नहीं किया है। उधर, मिस्र और जॉर्डन ने ट्रेनिंग देने का बात कही है।
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कहां फंस रहा पाकिस्तान का पेंच?
तुर्की ने अभी तक अपने सैनिकों को भेजने का ऐलान नहीं किया है। मगर तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि तुर्की आईएसएफ में अपने सैनिकों को भेजने को तैयार है। अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर सेना भेजने का दबाव बना रहा है। हालांकि पाकिस्तान में जनता की राय बंटी हुई है। यही कारण है कि वहां की सरकार फूंक-फूंककर पैर रख रही है। पाकिस्तान का कहना है कि वह अपनी सेना भेजने को तैयार है। मगर उसके जवान सिर्फ शांति मिशन में हिस्सा लेंगे। हमास को हथियार विहीन बनाने वाले किसी भी अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे।
पाकिस्तान के सामने आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति बन चुकी है। अगर सैनिक भेजने से पीछे हटता है तो ट्रंप की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। अगर जल्दबाजी में सैनिकों को भेज दिया और बाद में हमास से जंग लड़नी पड़ी तो देश के भीतर जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।
पीस बोर्ड ने कितनी धनराशि जुटाई?
पीस बोर्ड में शामिल 9 देशों ने 7 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। वहीं अमेरिका अकेले 10 अरब डॉलर देगा। यानी शांति बोर्ड कुल 17 अरब डॉलर की धनराशि जुटाएगा। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 75 मिलियन डॉलर देने का वादा किया। माना जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण में किया जाएगा। दो साल से अधिक समय से जारी युद्ध में पूरी गाजा पट्टी तबाह चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के मुताबिक तबाह चुके गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण में करीब 70 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
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इन देशों ने दी 7 अरब डॉलर की धनराशि
- बहरीन
- कतर
- सऊदी अरब
- उज्बेकिस्तान
- कुवैत
- संयुक्त अरब अमीरात
- कजाकिस्तान
- रोमानिया
- उज्बेकिस्तान
किसका विरोध कर रहा इजरायल?
पीस बोर्ड में शामिल सिर्फ दो देशों पर इजरायल ने आपत्ति जताई। यह देश कतर और तुर्की है। इजरायल नहीं चाहता है कि तुर्की की सेना गाजा में तैनात हो। इजरायल प्रशासन तुर्की को शक की निगाह से देख रहा है। उसका मानना है कि तुर्की मौजूदगी से इजरायल के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं कतर पर हमास को समर्थन देने का आरोप है। मीडिया के माध्यम से कतर ने इजरायल के खिलाफ खूब अभियान भी चलाया। यही बात इजरायल को आज भी अखर रही है। लांकि इजरायल ने अभी तक पाकिस्तान का विरोध नहीं किया है।