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स्टारशील्ड: अमेरिका का खुफिया हथियार, कैसे मस्क का स्टारलिंक इससे जुड़ा?

एलन मस्क का विवादित स्टारशील्ड प्रोजेक्ट अमेरिकी सेना और खुफिया विभाग से जुड़ा है। इसका कंट्रोल भी अमेरिका सरकार के पास है। स्टारलिंक और स्टारशील्ड एक ही सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।

Starshield Project

स्टारशील्ड प्रोजेक्ट। (Photo Credit: Khabargaon)

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स्टारलिंक... अमेरिका और एलन मस्क का वह विवादित प्रोजेक्ट, जिसे अभी भारत समेत दुनियाभर के तमाम देशों में सुरक्षा कारणों से मंजूरी नहीं मिली है। पिछले दिनों एलन मस्क ने भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी पर स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया। उन्हें देश का 'प्रधानमंत्री' कहकर संबोधित किया। मस्क का दावा है कि उनका स्टारलिंक भारत के दूर-दराज क्षेत्रों में इंटरनेट उपलब्ध कराएगा और गरीबों की मदद करेगा। यह अलग बात है कि भारत का गरीब स्टारलिंक के इंटरनेट को वहन करने के योग्य नहीं है।

 

मगर स्टारलिंक के सबसे विवादित प्रोजेक्ट 'स्टारशील्ड' ने दुनियाभर की सरकारों को अलर्ट कर दिया। अभी तक स्वतंत्र रूप से यह साफ नहीं हो पाया कि स्टारलिंक और स्टारशील्ड अलग-अलग हैं। प्रोजेक्ट में अमेरिकी सेना के दखल ने आशंका और बढ़ा दिया है। 

 

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'स्टारशील्ड' स्टारलिंक का मिलिट्री वर्जन है। यह प्रोजेक्ट इतना गोपनीय है कि अमेरिका में इस पर अधिक चर्चा नहीं होती है। मीडिया पर भी इससे जुड़ी जानकारी सीमित है। इसके फंडिंग के सोर्स का भी खुलासा नहीं हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टारशील्ड पर किसका नियंत्रण हैं... अमेरिकी सरकार या स्पेसएक्स का। 

 

हाल ही में स्टारशील्ड ने यूक्रेन में अपनी सेवाओं को अचानक बंद कर दिया। इससे यूक्रेन भड़क उठा। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि स्टारशील्ड की सेवाओं को बंद करने का आदेश एलन मस्क की कंपनी नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार ने दिया था। इसके बाद से दुनियाभर में यह सवाल उठने लगा कि क्या स्टारशील्ड पर अमेरिकी प्रशासन का प्रभाव है?

क्या है स्टारशील्ड?

स्पेसएक्स का स्टारशील्ड दुनियाभर की सरकारों को सैटैलाइट नेटवर्क सेवाएं प्रदान करता है। यह स्टारलिंक का मिलिट्री वर्जन है। मतलब आम आदमी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता है। स्टारशील्ड स्पेसएक्स के उपग्रहों और स्टारलिंक की तकनीक का इस्तेमाल करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह एक सुरक्षित संचार नेटवर्क उपलब्ध कराता है। स्टारशील्ड में क्रिप्टोग्राफिक क्षमता है। इससे यह नेटवर्क गोपनीय जानकारी को भी संभाल सकता है। इसके अलावा लेजर संचार तकनीक से एक सैटेलाइट दूसरे से भी जुड़ सकते हैं। यह सिस्टम पृथ्वी अवलोकन, संचार और होस्टेड पेलोड में उपयोगकर्ता देश को मदद करता है।

कौन बन सकता है स्टारशील्ड का ग्राहक?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्टारशील्ड का इस्तेमाल कोई भी देश कर सकता है? इसका उत्तर काफी पेचीदा है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट अमेरिकी हितों से सीधे तौर पर जुड़ा है। मसलन, जिस देश के साथ अमेरिकी हित जुड़े होंगे... वहां इसका एक्सेस जल्दी और आसानी से मिल सकता है। वहीं अमेरिकी विरोधी रुख रखने वाले देशों के लिए इसकी मंजूरी मिलना आसान नहीं है। दिक्कत यह भी है कि अमेरिका कभी पलटी भी मार सकता है। जैसा कि उसने यूक्रेन के मामले में किया। अचानक से इंटरनेट बंद होने से यूक्रेन की सुरक्षा खतरे में पड़ चुकी है।

स्टारशील्ड पर किसका कब्जा?

स्पेसएक्स एक प्राइवेट कंपनी है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि इसका स्टारशील्ड अमेरिकी सरकार से अलग है। कंपनी की वेबसाइट खुद बताती है कि उसका अमेरिकी रक्षा मंत्रालय समेत अन्य भागीदारों के साथ सहयोग है। 

 

स्टारशील्ड पर किसका कब्जा है? इसका जवाब यूक्रेन की घटना से भी मिलता है। यूक्रेन का आरोप है कि स्पेसएक्स ने अचानक स्टारशील्ड को बंद कर दिया। कंपनी ने इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी। कीव का आरोप है कि इससे उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ी है। 

 

यूक्रेन के आरोपों पर स्पेसएक्स के CEO एलन मस्क का कहना है कि स्टारशील्ड सिस्टम वाशिंगटन के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं। इसके इस्तेमाल की सीमा तय करने का अधिकार अमेरिकी सेना और राष्ट्रपति के पास है।

 

स्टारशील्ड प्रणाली अमेरिकी सरकार के अधीन और नियंत्रण में है। गति या इस्तेमाल पर कोई भी सीमा अमेरिकी सेना और अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति तय करते हैं। - एलन मस्क, स्पेसएक्स के सीईओ।

 

स्टारलिंक से कितना अलग है स्टारशील्ड? 

स्पेसएक्स के मुताबिक स्टारलिंक का इस्तेमाल आक्रामक सैन्य कार्रवाई में नहीं किया जाएगा। यह सिर्फ नागरिक और रक्षात्मक गतिविधियों में काम आएगा। स्पेसएक्स स्टारलिंक के तहत वाणिज्यिक ब्राडबैंड सेवा प्रदान करता है। इससे नागरिक इस्तेमाल के लिए हाईस्पीड इंटरनेट की सेवा मिलती है।  

 

स्टारशील्ड का विकास अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के लिए खुफिया और सैन्य उपग्रह सिस्टम विकसित करने के तौर पर किया गया। यह तकनीक 11 हजार सैटेलाइट के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करती है। 

 

स्टारशील्ड नेशनल सिक्योरिटी में सहयोग देने के लिए स्पेसएक्स की स्टारलिंक तकनीक और प्रक्षेपण क्षमता का लाभ उठाता है। स्टारलिंक को उपभोक्ता और वाणिज्यिक उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि स्टारशील्ड को सरकारी इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। - स्पेसएक्स

 

स्टारशील्ड: विवाद और इससे जुड़ी चिंताए क्या हैं?

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेज इंटरनेट पहुंचाने के उद्देश्य से साल 2019 में पहली बार स्टारलिंक उपग्रहों कों लॉन्च किया। कंपनी का दावा है कि आज 160 से अधिक देशों में स्टारलिंक कार्यरत है। आज आम नागरिक से एयरलाइंस और युद्ध के मैदान तक 13 मिलियन से अधिक स्टारलिंक के ग्राहक है।

 

स्टारलिंक और स्टारशील्ड में बहुत खास अंतर नहीं है। यह दोनों ही तकनीक एक ही सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। अभी तक इसका कोई सबूत नहीं मिला है कि स्टारलिंक से मिले डेटा का स्पेसएक्स या अमेरिकी रक्षा विभाग कैसे इस्तेमाल करता है। भले ही एलन मस्क का कहना है कि स्टारलिंक अलग है। मगर सवाल यह है कि क्या जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना इसका सैन्य इस्तेमाल कर सकती है या नहीं।

 

 

स्टारलिंक स्पेसएक्स के स्वामित्व और नियंत्रण वाली एक व्यावसायिक सेवा है। स्टारलिंक का इस्तेमाल नागरिक या रक्षात्मक गतिविधियों तक सीमित है। इसका उपयोग आक्रामक सैन्य कार्रवाई में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा करना एक व्यावसायिक कंपनी के लिए अनुचित होगा। एलन मस्क, स्पेसएक्स के सीईओ।

अमेरिका खुफिया विभाग से जुड़ाव

2021 में द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सबसे पहली बार स्टार शील्ड प्रोजेक्ट का खुलासा किया। 2021 में ही न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने खुलासा किया कि एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया कार्यालय के लिए एक जासूसी उपग्रह नेटवर्क बना रही है। इसमें अमेरिकी सरकार ने 1.8 अरब डॉलर का सहयोग दिया।

पूरी दुनिया में नजर रख रही अमेरिकी सेना

आज अमेरिकी रक्षा विभाग स्पेसएक्स के सैटेलाइट के माध्यम से पूरी दुनिया में रियल टाइम निगाह रख सकती है। इससे दुनियाभर में अमेरिकी सेना को संभावित टारगेट को पहचाने की क्षमता भी मिलती है। अमेरिकी खुफिया विभाग और सेना से जुड़ाव ने दुनियाभर के देशों को स्टारलिंक और स्टारशील्ड के प्रति सतर्क किया। चीन और रूस खुलकर इसके खिलाफ आ चुके हैं। अन्य देशों को भी आगाह किया है।

क्या पेंटागन का प्रोजेक्ट है?

कई बार देखा गया है कि जब स्टारलिंक के नेटवर्क में कोई समस्या आई है तो उसी वक्त स्टारशील्ड की सेवाओं पर भी असर पड़ता है। इससे भी यह साफ होता है कि स्टारलिंक और स्टारशील्ड अलग-अलग नेटवर्क न होकर, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हैं।  2026 में ही स्पेसएक्स ने अमेरिका के युद्ध विभाग और स्पेस फोर्स के साथ 6 अरब डॉलर के समझौते किए। 

 

2.29 बिलियन डॉलर का पहला अनुबंध अमेरिकी स्पेस फोर्स के साथ किया। इसके तहत स्टारशील्ड अंतरिक्ष डेटा नेटवर्क विकसित करेगा। वहीं 4.16 बिलियन डॉलर का अनुबंध युद्ध विभाग से किया। इसमें भी उपग्रह नेटवर्क को विकसित किया जाएगा, ताकि हवाई लक्ष्यों की ट्रैकिंग की जा सके। यह भी आरोप लगते हैं कि अमेरिका रक्षा विभाग स्टारशील्ड को भारी भरकम फंडिंग कर रहा है। हालांकि अधिकांश फंडिंग गोपनीय है। इनका दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। दुनियाभर के देश स्टारशील्ड को पेंटागन का प्रोजेक्ट मानते हैं।


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