logo

मूड

ट्रेंडिंग:

इजरायल, इंडिया और फ्रांस की तिकड़ी ने कैसे बढ़ाई तुर्की की टेंशन?

इजरायल, इंडिया और फ्रांस की तिकड़ी ने तुर्की की टेंशन बढ़ा दी है। इसकी झलक तुर्की के मीडिया और राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन के बयान में साफ दिखती है।

Recep Tayyip Erdoğan

रेचेप तैय्यप एर्दोगन। Photo Credit: RTErdogan/FB

शेयर करें

google_follow_us

इजरायल, इंडिया और फ्रांस की तिकड़ी ने तुर्की की टेंशन बढ़ा दी है। इसकी झलक तुर्की के मीडिया और राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन के बयान में साफ दिखती है। राजधानी अंकारा में अपनी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के संसदीय समूह की बैठक में एर्दोगन ने साइप्रस के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने वाले देशों खासकर इजरायल को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि तुर्की अपनी संप्रभुता और पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की साइप्रसियों के अधिकारों की खातिर किसी भी खतरे का कड़ा और स्पष्ट जवाब देगा।

 

एर्दोगन का दावा है कि साइप्रस द्वीप के आसपास तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। तुर्की हर घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। चेतावनी दी कि तुर्की साइप्रस समुदाय के अधिकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

तुर्की को तीन तरफ से घेर रहा भारत

पाकिस्तान के साथ तुर्की के बढ़ते सैन्य सहयोग का जवाब भारत ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ रणनीतिक संबंध प्रगाढ़ करके दे रहा है। भारत की इस रणनीति से तुर्की अब तीन तरफ से घिर रहा है। आर्मेनिया भारत से पिनाका रॉकेट, आकाश मिसाइल और रडार समेत भारी भरकम रक्षा खरीद कर चुका है। अब खबर है कि ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने पर भी रुचि दिखाई है। अगर यह समझौता हो जाता है तो तुर्की की मुश्किल बढ़ना बिल्कुल तय है। भारत ने अभी तक सिर्फ फिलीपींस को ही ब्रह्मोस मिसाइल बेची है।

 

यह भी पढ़ें: 'भारत के जहाजों पर ईरान कर रहा हमला', ट्रंप का दावा, धमकी भी दी

ब्रह्मोस पर साइप्रस की निगाह

पिछले महीने ही साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलीडेस भारत की तीन दिवसीय यात्रा की थी। नई दिल्ली में उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की थी। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया कि इस दौरान साइप्रस ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, नागास्ट्रा-1 और स्काईस्ट्राइकर आत्मघाती ड्रोन खरीदने पर दिलचस्पी जाहिर की। पिछले साल पाकिस्तान के साथ संघर्ष में इनका इस्तेमाल भी किया गया था।

 

रक्षा मामलों पर लिखने वाले तुर्की के राउफ कोसे का कहना है कि तुर्की के खिलाफ भारत और इजरायल ने साइप्रस को हथियार मुहैया कराने के लिए हाथ मिला लिया है। बदले में हमें पाकिस्तान को और अधिक समर्थन देना होगा। पाकिस्तान और तुर्की को भारत-साइप्रस से मुकाबला करना होगा।

तुर्की ने खींची सीमा रेखा, क्या उलझ जाएगा इजरायल?

इजरायल जहां एक ओर साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा तो वहीं  सीरिया और लेबनान में इजरायल के दखल ने भी तुर्की को परेशान कर रखा है। इजरायल ने लेबनान के एक बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया है। उसकी सेना अब भी बढ़ती जा रही है। यही बात एर्दोगन को खटक रही है। 

 

एर्दोगन ने कहा कि दमिश्क और बेरूत इंस्ताबुल के दो जुड़वां शहर है। तुर्की की की सुरक्षा सिर्फ हाटे (सीमा पर बसा एक शहर) से शुरू नहीं होती है। इसकी शुरुआत दमिश्क, अलेप्पो और बेरूत से होती है। बता दें कि सीरिया में इजरायली सेना की मौजूदगी दमिश्क के करीब है। वहीं लेबनान की राजधानी बेरूत में आए दिन बमबारी से इजरायल संदेश देता है कि उसकी सेना तुर्की के बेहद करीब है।

 

एर्दोगन ने अपने बयान से एक लकीर खींच दी है। इससे साफ हो गया कि तुर्की कब इजरायल को प्रतिक्रिया देगा। एर्दोगन ने कहा कि सीरिया और लेबनान में थोपी गई व्यवस्थाओं को तुर्की बर्दाश्त नहीं करेगा। दोनों देशों के लोगों के खिलाफ हमलों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मतलब साफ है कि अगर इजरायल लेबनान या सीरिया में और अधिक कार्रवाई करता है तो तुर्की के साथ संघर्ष छिड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

 

यह भी पढ़ें: अहमदाबाद फ्लाइट हादसा: एक साल बाद AAIB ने बताया कहां तक पहुंची जांच

फ्रांस से क्यों खफा तुर्की?

फ्रांस और साइप्रस ने हाल ही में सेना की स्थिति संबंधी समझौता (SOFA) किया है। समझौते के मुताबिक फ्रांस की सेना साइप्रस के सैन्य ठिकानों पर तैनात हो सकती है। उसके बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल कर सकती है। तुर्की फ्रांस के इस कदम को तनाव बढ़ाने वाला मान रहा है। गुरुवार को ही तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने एक कड़ी चेतावनी जारी की।

 

तुर्की ने कहा कि फ्रांस का यह समझौता अंतरराष्ट्रीय कानून और 1960 की साइप्रस संधियों के खिलाफ है। तुर्की सशस्त्र बलों के पास साइप्रस तुर्कों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले शत्रुतापूर्ण रवैये का कड़ा जवाब देने की ताकत है। तुर्की का मानना है कि फ्रांस का यह कदम क्षेत्र के संवेदनशील संतुलन को बदल देगा और इसके घातक परिणाम होंगे।

जमीन पर दिखने लगा तनाव

साइप्रस और तुर्की के बीच तनाव का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। तुर्की की सेना युद्धाभ्यास में लगी है। ग्रीक मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि यूरोपीय मंत्रियों और ग्रीक के रक्षा मंत्री के विमान को तुर्की के फाइटर जेट ने परेशान किया। हालांकि तुर्की ने इन खबरों का खंडन किया। उधर, तुर्की ने आरोप लगाया कि 7 जून को ग्रीस-साइप्रस मार्ग पर चार उड़ानों ने तुर्की-साइप्रस हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया। एहतियात के तौर पर तुर्की ने तुरंत दो एफ-16 फाइटर जेट को भेजा। उधर, अंताल्या की खाड़ी में तुर्की की नौसेना बड़ा अभ्यास कर रही है। अभ्यास में 60 विमान, 125 जहाज और 18000 सैनिक शामिल है।

साइप्रस से तुर्की की क्यों नहीं बनती?

दशकों से तुर्की और साइप्रस के बीच नहीं बनती है। 1974 से तुर्की ने साइप्रस के करीब एक तिहाई हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है। तुर्की इस इलाके को उत्तरी साइप्रस कहता है। पिछले साल पीएम मोदी ने साइप्रस की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती इलाके का भी दौरा किया था।

Related Topic:#Israel

और पढ़ें