अमेरिका और इजरायल का मानना है कि ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र के नीचे लगभग 400 किलो संवर्धित यूरेनियम दफन है। पिछले साल जून महीने में 12 दिनों की जंग में अमेरिकी वायुसेना ने ईरान तीन परमाणु प्लांट फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर बंकर बस्टर बमों से हमला किया था। कुछ खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फोर्डो प्लांट के मलबे के नीचे ही 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम दबा है।
इजरायल का मानना है कि इसमें से कुछ हिस्सा निकालने में ईरान सफल रहा। उसने यह यूरेनियम पास में स्थित पहाड़ियों के अंदर बनी सुरंग में छिपा दिया है। ईरान के अलावा एक और देश है, जिसके परमाणु प्लांट के नीचे 29 साल से परमाणु सामग्री दफन है।
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दो साल पहले वहां तख्तापलट हुआ तो इजरायल की टेंशन बढ़ गई। उसने परमाणु प्लांट के दरवाजे पर भीषण बमबारी की, ताकि चरमपंथी सगंठन के हाथों यह सामग्री न लगे। हाल ही में परमाणु संयंत्र के आसपास हुई गतिविधियों ने इजरायल की चिंता और बढ़ा दी। मामला इतना बढ़ गया कि अमेरिका को दखल देना पड़ा। अब ईरान से पहले इस देश में दफन परमाणु सामग्री को निकालने पर प्लान बनाया जा रहा है। आइये समझते हैं कि यह मामला क्या है?
तीन देश, वजह एक और इजरायल का हमला
सामूहिक विनाश के हथियार विकसित करने के आरोप में इजरायल तीन देशों पर हमला कर चुका है। पहली बार साल 1981 में इराक के खिलाफ ऑपरेशन ओपेरा चलाया। इजरायल की वायुसेना ने राजधानी बगदाद के नजदीक स्थित ओसिरिस परमाणु रिएक्टर पर बमबारी की। बाद में अमेरिका ने इराक के खिलाफ एक बड़ा युद्ध छेड़ा। 2007 में सीरिया के अल-किबार क्षेत्र में ऑपरेशन ऑर्चर्ड के तहत हमला किया। यहां गुप्त रूप से परमाणु स्थल विकसित किया जा रहा था। हाल ही में इजरायल ने ईरान के नतांज समेत कई परमाणु ठिकानों पर बमबारी की।
सीरिया ने कैसे बढ़ाई टेंशन?
अब करीब 29 साल बाद तबाह हो चुका सीरिया का अल-किबार परमाणु संयंत्र चर्चा में है। खबर आ रही है कि अमेरिका सीरिया के इस परमाणु प्लांट के नीचे दफन परमाणु सामग्री को हटाने का प्लान बना रहा है। यह घटनाक्रम सीरिया और इजरायल के बीच हुए समझौते के बाद सामने आया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के आखिरी तक सामग्री हटा लिया जाएगा।
गेट पर बमबारी की, ताकि परमाणु सामग्री हाथ न लगे
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में बशर अल असद के अपदस्थ होने के बाद इजरायल ने अल-किबार परमाणु प्लांट के मुख्य दार पर बमबारी की। इसके बाद एक साल तक यहां की 'साइट 99' पर अमेरिका के साथ विस्तृत बातचीत की। रिपोर्ट में दावा किया गया साल 2007 में इजरायली हमले के बावजूद यहां कुछ अनुसंधान और भंडारण स्थल सुरक्षित बच गए थे। बाद में असद सरकार ने हमले में बची सामग्री को 'साइट 99' में ही सुरक्षित रूप से जमा कर दी।
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इजरायल की धमकी के आगे झुका सीरिया
इजरायल को डर था कि सीरिया की नई सरकार परमाणु सामग्री तक पहुंच रोक सकती है और सामग्री को वहां से निकाल भी सकती है। इसके बाद इजरायल ने अमेरिका के साथ न केवल कूटनीतक प्रयास तेज किए, बल्कि सीरिया को हमला करने की धमकी भी दी। नतीजा यह हुआ कि पिछले साल ही सीरिया की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को प्लांट के निरीक्षण की मंजूरी दे दी।
तुर्की के दखल ने बढ़ाई टेंशन
सीरिया में तुर्की का दखल काफी अंदर तक है। सीरिया की नई सरकार उसकी सहयोगी भी है। इजरायल को यह डर भी सता रहा था कि तुर्की सीरियाई सरकार को परमाणु सामग्री निकालने में मदद कर सकता है। कुछ दिनों पहले परमाणु प्लांट के आसपास हुई कुछ गतिविधियों ने इजरायल के कान खड़े कर दिए। इजरायल को लगा कि सीरिया की सरकार परमाणु सामग्री तक पहुंचने की कोशिश में है। इसके बाद इजरायल की धमकी और कूटनीतिक दबाव के बाद तीन हफ्ते पहले सीरिया की सरकार ने इजरायल के साथ समझौता किया और परमाणु सामग्री निकालने में मदद का ऐलान किया। अब अमेरिका और इजरायल को उम्मीद है कि परमाणु सामग्री के निकालने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। साल के आखिरी तक इसे बाहर निकाल लिया जाएगा।
डर्टी बम बनाने का था खतरा
इजरायली खुफिया एजेंसी के मुताबिक सीरिया के परमाणु प्लांट में येलोकेक सामग्री शामिल हो सकती है। इसको संवर्धित करके परमाणु बम बनाया जा सकता है। इसके अलावा डर्टी बम बनाना और आसान है। यह बम वातावरण में रेडियाधर्मी पदार्थ फैलाता है।
ईरान से कैसे निपटेंगे इजरायल और अमेरिका
अगर अमेरिका और इजरायल ने सीरिया से परमाणु सामग्री को हटाने में कामयाब हो गए तो भी उनकी टेंशन कम होने वाली नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती ईरान में दफन 400 किलो संवर्धित यूरेनियम है। यह 60 फीसद तक संवर्धित है। 90 फीसद तक सवर्धित करने पर परमाणु बम बनाने के योग्य हो जाएगा। अमेरिका और इजरायल को सामग्री की लोकेशन पता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती ईरान के अंदर घुसकर इसे निकलना है।
ईरान में सीरिया की तर्ज पर कोई सहयोग करने वाली सरकार नहीं है। न ही यहां कोई कमांडो ऑपरेशन चलाना आसान है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती अधिकांश सामग्री पहाड़ के नीचे बनी सुरंग में दफन है। इजरायल को डर है कि अगर यह सामग्री ईरान से नहीं हटाई गई तो तेहरान किसी भी वक्त परमाणु बम हासिल करने का प्रयास शुरू कर देगा।