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गोद लेने के नियमों ढील, महिला नहीं बनेगी सम्राट; जापान ने क्यों बदला शाही कानून?

जापान में सिर्फ पुरुषों को सम्राट के सिंहासन में बैठने का अधिकार है। हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां महिलाओं का कभी शासन नहीं रहा। जापान में कुल आठ महिला शासकों ने शासन किया। 1762 से 1770 तक शासन करने वाली महारानी गोसाकुरामाची आखिरी महिला शासक थीं।

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प्रतीकात्मक फोटो। (AI-generated image)

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जापान के शाही परिवार का कुनबा लगातार घट रहा है। यही कारण है कि शुक्रवार को जापान की संसद ने 19वीं सदी के शाही परिवार कानून में संशोधन करके शाही उत्तराधिकार नियमों में ढील दी है। नए कानून के तहत शाही परिवार 15 वर्ष से अधिक उम्र के अपने दूर के पुरुष रिश्तेदार को गोद ले सकता है। वहीं परिवार की राजकुमारी अगर किसी आम आदमी से शादी करती है तो भी उसका शाही दर्जा बनेगा, लेकिन महिलाओं को सिंहासन पर बैठने की अनुमति अब भी नहीं मिली है।

 

साल 1949 के बाद शाही परिवार कानून में हुआ यह अब तक सबसे बड़ा संशोधन है। नए कानून के तहत शाही परिवार की उन 11 शाखाओं के पुरुषों को गोद लेने की अनुमति होगी, जिन्हें दूसरे विश्वयुद्ध के बाद शाही परिवार से अलग कर दिया गया था। जापान सरकार का मानना है कि इससे शाही परिवार का दायरा बढ़ेगा और लगातार घट रही पुरुष उत्तराधिकार की चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।

 

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आम आदमी से शादी करने पर भी राजकुमारी का बना रहेगा शाही दर्जा 

साल 2021 में जापान की राजकुमारी माको ने अपने प्रेमी से विवाह कर लिया था। इसके बाद उन्हें अफनी शाही उपाधियों को छोड़ना पड़ा था। यहां तक कि परिवार से भी अलग कर दिया गया था। मगर अब नए कानून में बड़ी ढील दी गई। अगर शाही परिवार की कोई महिला आम आदमी से शादी करती है तो उसका शाही दर्जा बना रहेगा। लेकिन उनकी संतानें सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं होंगी। 

सिंहासन तक अब भी नहीं पहुंच पाएंगी महिलाएं

जापान के शाही परिवार की कोई महिला सिंहासन पर नहीं बैठ सकती। मतलब कोई महिला शाही परिवार का उत्तराधिकारी नहीं बन सकती है। जापान के मौजूदा सम्राट नारुहितो की इकलौती संतान बेटी है। उनका नाम राजकुमारी आइको (24) है। नए कानून के तहत भी राजकुमारी आइको सम्राट नहीं बन पाएंगी। हालांकि जापान में उनकी खूब लोकप्रियता है। बड़ी संख्या में लोग चाहते हैं कि वह ही अगली सम्राट बनें। 

 

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क्यों किया कानून में बदलाव?

जापान में लगभग 2600 वर्ष पुराना वंशानुगत राजतंत्र है। सिंहासन के उत्तराधिकार के क्रम में पहला नाम मौजूदा सम्राट के 60 वर्षीय छोटे भाई फुमिहितो का है। इसके बाद फुमिहितो के 19 वर्षीय बेटे राजकुमार हिसाहितो दूसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर सम्राट के 90 वर्षीय चाचा का नाम आता है। जापान के शाही परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तराधिकारियों की बढ़ती उम्र और अगर राजकुमार हिसाहितो का कोई बेटा नहीं हुआ तो उत्तराधिकार की परंपरा खत्म हो जाएगी। इसी चुनौती से निपटने के लिए कानून में संशोधन किया गया, ताकि दूर के परिवार से बच्चे को गोद लिया जा सके। 

कितना बड़ा उत्तराधिकार का संकट?

जापान के शाही परिवार में उत्तराधिकार संकट कितना बड़ा है, उसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि राजकुमार हिसाहितो पिछले 40 साल में परिवार में पैदा होने वाले इकलौते लड़के हैं। परिवार के 16 सदस्यों में पांच पुरुष हैं और एक भी बच्चा नहीं है। 

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