अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच एक और युद्ध का खतरा मध्य-पूर्व में गहराने लगा है। कई वर्षों बाद सऊदी अरब और हूती विद्रोही आमने-सामने आ चुके हैं। यमन के सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेरेबंदी की धमकी दी है। अगर तनाव बढ़ा तो इसका असर मध्य-पूर्व के दूसरे छोर बाब अल-मंडेब तक देखने को मिल सकता है।
चार साल पहले 2022 में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम का ऐलान किया था। हालांकि सना पर हमले के बाद हूती विद्रोहियों का दावा है कि यह समझौता टूट चुका है। आइये समझते हैं कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच ताजा झड़प की वजह क्या है, क्या अब सऊदी अरब जंग में तटस्थ रहने की जगह अमेरिका की तरफ झुक रहा है?
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कहां से शुरू हुआ मौजूदा तनाव?
मौजूदा तनाव की शुरुआत 3 जुलाई को हुई। एक ईरानी जहाज यमन की राजधानी सना में उतरा, लेकिन हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब की वायुसेना ने ईरानी जहाज को उतरने से रोकने का प्रयास किया। यह एक दशक में पहली बार था जब कोई ईरानी जहाज सना तक पहुंचा। इसी जहाज में सवार होकर हूती का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। जहां दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक रस्म में हिस्सा लिया। 13 जुलाई को यही प्रतिनिधिमंडल ईरान के विमान से वापस लौटा तो बवाल मच गया।
ईरानी विमान को क्यों नहीं उतरने दिया गया?
सऊदी अरब और यमन की सरकार नहीं चाहते हैं कि सना में ईरान के जहाज उतरे। उनका आरोप है कि इन फ्लाइट की आड़ में ईरान हूती विद्रोहियों को हथियारों की खेप भेज रहा है। संयुक्त राष्ट्र में यमन के राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन्हीं आरोपों को दोहराया। उनका कहना है कि राजधानी सना में उतरने का प्रयास कर रहा विमान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से संबंधित था। उसमें कर्मचारी, सैन्य और दोहरे उपयोग वाले उपकरण थे।
13 जुलाई को ईरान के महान एयर का एक विमान सना एयरपोर्ट पर उतरने वाला था। ऐन वक्त में सना एयरपोर्ट के रनवे पर बमबारी हो गई। विमान को आनन-फानन अपना रास्ता बदलना पड़ा। बाद में यह विमान लाल सागर तट पर स्थित होदेइदाह एयरपोर्ट पर उतारा गया। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने सना एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि यह कदम ईरानी विमान को सना में उतरने से रोकने की खातिर उठाया गया था।
तो सऊदी अरब को सजा जरूर मिलेगी!
हूती विद्रोहियों ने सना एयरपोर्ट हमले का दोषी सऊदी अरब को ठहराया। जवाब में दक्षिणी सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया। सऊदी अरब ने इन हमलों को रोकने का दावा किया। बाद में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेरेबंदी का ऐलान किया। आभा एयरपोर्ट हमले के बाद भी हूती के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि हम मानते हैं कि इन हमलों को सऊदी अरब से अंजाम दिया गया। इसकी सजा जरूर मिलेगी। उनसे इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संकट और गहराने वाला है।
हूती विद्रोहियों ने खींच दी लाल लकीर
हूती विद्रोहियों ने कहा कि सना से तेहरान के बीच उड़ानें जारी रहेंगी। अगर सऊदी अरब बाधा बना तो उसके एयरपोर्ट को ठप्प करने से भी नहीं हिचकेंगे। खतरा यह भी है कि हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब अल-मंडेब को बंद कर सकते हैं। अगर ऐसा करेंगे तो सऊदी अरब को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से सऊदी अरब बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात लाल सागर पर स्थित अपने यानबू बंदरगाह से कर रहा है। गाजा पर इजरायल के हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब में कई इजरायली और अन्य देशों के जहाजों को निशाना बनाया था।
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क्या अब खुलकर सामने आने लगा सऊदी अरब?
हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमला करके सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग में अब एक साइड लेने लगा है। अगर उसके हितों को ईरान खतरे में डालेगा तो सऊदी अरब न केवल हूती, बल्कि ईरान के खिलाफ भी खुलकर सामने आ सकता है। हालांकि अमेरिका के साथ ताजा झड़प में सऊदी अरब ने एक अलग रणनीति अपनाई है। उसने अबकी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बजाय कतर, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और ओमान जैसे देशों को अधिक निशाना बना रहा है।
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट
जंग की शुरुआत में ईरान ने सऊदी अरब को निशाना बनाया। रियाद के दबाव के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी सेना नहीं भेजी, जबिक दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता है। हालांकि तब किसी तरह बातचीत बन गई। युद्धविराम के बीच पाकिस्तान ने प्रतीकात्मक तौर पर कुछ जहाज और सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात किया है। मगर सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि अगर हूती विद्रोहियों के साथ सऊदी अरब का संघर्ष बढ़ता है तो क्या पाकिस्तान इसमें रियाद का साथ देगा? क्योंकि वह अपने आंतरिक मामले में ही चौतरफा घिरा है।