जजों की नियुक्ति से राष्ट्रपति के वीटो तक, पोलैंड के न्यायिक संकट की पूरी कहानी
पोलैंड में सत्तापक्ष और विपक्ष की लड़ाई में न्यायिक संकट खड़ा हो गया है। विपक्ष दल के समर्थकों ने कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के बाहर डेरा डाल दिया है और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पोलैंड में हराया न्यायिक संकट। (Photo Credit: Social Media)
यूरोपीय देश पोलैंड में न्यायिक संकट खड़ा हो गया है। मामला इतना बढ़ गया है कि देश की टॉप कोर्ट के बाहर दंगा रोधी पुलिस तैनात करनी पड़ी। राष्ट्रपति को अपना विदेश दौरा बीच में ही छोड़ना पड़ा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के बाहर जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अदालत की दीवार तोड़ दी।
अधिकारियों पर सामान भी फेंका है। झड़प के बाद तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। प्रदर्शनकारी और पोलैंड के विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने टॉप कोर्ट के हेड जज बोगदान स्वीकोव्स्की और उनके डिप्टी को सस्पेंड करके संविधान और अदालती व्यवस्था को कमजोर कर रही है। आइये समझते हैं कि पौलैंड का न्यायिक संकट क्या है?
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कहां से शुरू हुआ ताजा विवाद?
वारसॉ कोर्ट के हेड बोगदान स्वीकोव्स्की ने पिछले छह महीने में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके उन जजों को कोर्ट का काम करने से रोक दिया, जिन्हें मौजूदा पार्लियामेंट्री मेजॉरिटी से चुना गया था। इसके बाद पोलैंड के न्याय मंत्री ने जजों को काम नहीं करने देने पर हेड जज स्वीकोव्स्की और उनके डिप्टी की इम्यूनिटी को खत्म करने की सिफारिश की थी। शुक्रवार को ही जजों के एक समूह ने कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के हेड को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा।
कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल की वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान में कहा गया कि प्रेसिडेंट बोगदान स्वीकोव्स्की और उनके डिप्टी को एक महीने के लिए सस्पेंड किया गया है। उनकी जगह जज एना कोर्विन-पियोट्रोस्का अदालत को लीड करेंगी। इसी बयान के बाद पोलैंड में न्यायिक संकट शुरू हुआ। हेड जज के निलंबन के बाद से अदालती कामकाज ठप है। टॉप कोर्ट के बाहर प्रदर्शन का दौर जारी है।
क्या कोर्ट पर सियासत हावी?
पोलैंड में साल 2015 से 2023 तक आठ साल लॉ एंड जस्टिस पार्टी पार्टी सत्ता में रही। उसने कई न्यायिक सुधारों को अंजाम दिया। हालांकि आरोप लगे कि इससे अदालतों की स्वतंत्रता पर असर पड़ा। न्यायिक व्यवस्था में सियासत हावी हुई। इस बीच लॉ एंड जस्टिस पार्टी ने स्वीकोव्स्की को कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल का हेड बना दिया।
विपक्ष ने नियुक्ति की आलोचना की और आरोप लगाया कि अदालतों का सियासीकरण किया जा रहा है। 2023 के चुनाव में डोनाल्ड टस्क के सिविक कोएलिशन जीत हासिल की। गठबंधन ने एलान किया कि न्यायिक व्यवस्था में लॉ एंड जस्टिस पार्टी के विवादित रिफॉर्म को वापस लेगी।
सत्तापक्ष और विपक्ष में फंसी अदालत?
पोलैंड का मौजूदा न्यायिक संकट कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल पर नियंत्र को लेकर छिड़ा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष अपना-अपना कंट्रोल चाहते हैं। लॉ एंड जस्टिस पार्टी ने अपनी सरकारों में उन लोगों को जज नियुक्त किया, जो राजनीतिक रूप से पार्टी की विचारधारा से जुड़े थे। पोलैंड की सांसद ने पांच जजों को नॉमिनेट किया, लेकिन राष्ट्रपति करोल नॉवरोकी ने इन्हें शपथ नहीं दिलाई।
बाद में जजों ने कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के सामने शपथ ली। मगर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष स्वीकोव्स्की ने इन जजों को कोर्ट की इमारत में घुसने नहीं दिया। पोलैंड के राष्ट्रपति का संबंध विपक्षी लॉ एंड जस्टिस पार्टी से है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस ने भी ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष स्वीकोव्स्की की नियुक्ति में गंभीर गड़बड़ियों की बात मानी और कहा कि इस कारण से कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल को स्वतंत्र अदालत नहीं माना जा सकता है।
तख्तापलट का आरोप
विपक्षी लॉ एंड जस्टिस पार्टी के कार्यकर्ता टॉप कोर्ट के बाहर जुटे हैं। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बाद दंगा पुलिस को तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने 'टस्क गद्दार' जैसे नारेबाजी की। इस बीच कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल ने अपने आधिकारिक अकाउंट पर लिखा, 'तख्तापलट हुआ है।'
कोई दूसरा रास्ता नहीं: पीएम डोनाल्ड टस्क
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क कहा, 'कानून का राज बहाल करना हमारा कर्तव्य है। लॉ एंड जस्टिस पार्टी की अगुवाई में वर्षों से चली आ रही अराजकता के बाद यह एक मुश्किल प्रक्रिया है... कभी-कभी दर्दनाक भी और इसके लिए पक्के कदम उठाने की जरूरत है। कोई दूसरा रास्ता नहीं है।'
राष्ट्रपतियों के वीटो ने उलझाया
डोनाल्ड टस्क की पार्टी को यूरोप समर्थक माना जाता है। पार्टी ने चुनाव के वक्त से ही एलान किया था कि उनकी सरकार अदालतों की आजादी को बहाल करेगी। डोनाल्ड टस्क की सरकार ने कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल में दो बार बदलाव का प्रयास किया, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति आंद्रेज दुदा और मौजूदा राष्ट्रपति करोल नॉवरोकी ने वीटो लगा दिया।
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डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एना कोर्विन-पियोट्रोस्का को जज नियुक्त किया, लेकिन राष्ट्रपति नवरोकी ने उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में खामियां निकाली और शपथ दिलाने से मना कर दिया। अब एना कोर्विन-पियोट्रोस्का को कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल का मुखिया बनाया गया है।
क्यों अहम हैं कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल?
कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल पोलैंड की विशेष संवैधानिक अदालत है। यह सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से अलग है। कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल यह तय करता है कि देश की संसद में बना कानून संविधान के मुताबिक है या नहीं। मतलब पोलैंड में कानून की व्याख्या करने का अधिकार इसी ट्रिब्यूनल के पास है। साल 1985 में इसकी स्थापना हुई। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं।
रक्षा मंत्री से मिले राष्ट्रपति
पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नावरोकी शुक्रवार को अफ्रीकी देश सेनेगल जा रहे थे। उन्हें यहां एक खेल कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। हालांकि बीच रास्ते से वह वापस आ गए। इसके बाद उन्होंने सियासी दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। सबसे पहली मीटिंग प्रेसिडेंशियल पैलेस में रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिज से हुई। कामिज पीएम डोनाल्ड टस्क के सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। वे क्रिश्चियन-कंजर्वेटिव पोलिश पीपल्स पार्टी के नेता हैं।
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