नेपाल पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर अपील की है कि अफवाहों पर भरोसा न करें। यह दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री अपने पास रख ली और उसे बांटा नहीं। यह चेतावनी विपक्षी नेता सीपीएन (UML) के सचिव महेश बस्नेत के आरोपों के बाद आई है, जिन्होंने कहा था कि राहत सामग्री सेना और पुलिस की बैरकों और कार्यालयों में रखी जा रही है। कुछ खाना सड़ने के लिए छोड़ दिया गया।
नेपाल पुलिस ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि सोशल मीडिया के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाकर बेबुनियाद और भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। पुलिस ने बताया कि पिछले महीने आई भयानक बाढ़ के बाद नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान लगातार खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
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नेपाल पुलिस और सेना पर सवाल क्यों उठे?
पुलिस के बयान के मुताबिक सेना और पुलिस पर राहत सामग्री कब्जे में लेने या उसे सड़ने के लिए छोड़ने के आरोप झूठे और निराधार हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे भोटेकोशी नदी उफान पर आ गई और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई इलाकों में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इस दौरान जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।
नेपाल में बाढ़ से कितनी मौतें हुईं?
बुधवार तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,365 हो गई जबकि 5,326 लोग अब भी लापता हैं। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों के जवान फंसे और प्रभावित लोगों को बचाने, लापता लोगों की तलाश करने, घायलों को इलाज दिलाने, शवों की देखभाल करने और राहत सामग्री बांटने के काम में लगे हुए हैं।
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अफवाहों से सेना और पुलिस डर गई
पुलिस ने कहा कि आपदा के दौरान बिना पुष्टि किए फैलाए जा रहे आरोपों से बचाव और राहत कार्य में जुटे सुरक्षा कर्मियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। इससे जनता के बीच सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास भी पैदा हो सकता है और आपदा प्रबंधन के संवेदनशील कामों में रुकावट आ सकती है।
अखबार द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक नेपाल पुलिस ने यह भी साफ किया कि उसके पास कोई राहत सामग्री रखी हुई नहीं है। पुलिस ने जनता और सभी संबंधित लोगों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहें या अपुष्ट खबरें ना फैलाएं जिनसे भ्रम पैदा हो या राहत कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों का हौसला कमजोर पड़े।
'सेना-पुलिस ने तबाह की राहत सामग्री'
महेश बस्नेत ने आरोप लगाया था कि एक राहत शिविर में पीड़ितों ने खाने की कमी की शिकायत की थी जबकि राहत सामग्री सेना और पुलिस के पास रखी हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि सब्जियां और अन्य खाने-पीने का सामान सड़ने के लिए छोड़ दिया गया और वन-डोर सिस्टम के तहत राहत सामग्री सुरक्षा प्रतिष्ठानों के भीतर ही रखी गई।
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हेलीकॉप्टरों को उड़ने से रोक रही है सेना?
महेश बस्नेत ने यह भी आरोप लगाया था कि बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों को उड़ान भरने से रोका गया। इसके साथ ही उन्होंने आपदा से निपटने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री
बालेंद्र शाह
, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और स्वयंसेवी संगठन हामी नेपाल की भी आलोचना की थी। नेपाल सरकार, पुलिस और सेना ने इन अफवाहों को गलत बताया है।