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बिना फौज और हवाई अड्डे वाले लिकटेंस्टीन से भारत को मिलेगा क्या?

लिकटेंस्टाइन ऐसा देश है, जिसका अपना कोई एयरपोर्ट ही नहीं है। यहां न सेना है, न ही इस देश पर कोई कर्ज है। भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच 90 के दशक से कूटनीतिक रिश्ते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लिकटेंस्टाइन प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी प्रिंसेज सोफी। Photo Credit: PMO/X

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी प्रिंसेज सोफी। Photo Credit: PMO/X

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भारत में एक शाही दौरे की खूब चर्चा है। एक छोटे से देश के राजकुमार और राजकुमारी मेहमान बनकर आए। देश इतना छोटा है कि नोएडा और चंडीगढ़ जैसे शहर, उस देश को भौगोलिक सीमा में टक्कर दे दें। सिर्फ 160 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की आबादी 50 हजार भी नहीं है। भारत के इस देश से रिश्ते 30 साल से ज्यादा पुराने हो चले हैं। इन रिश्तों को नए सिरे से लिखने लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस अपनी पत्नी प्रिंस सोफी के साथ भारत आए थे। 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर के बीच वे भारत में रहे और पुराने संबंधों की मजबूती पर मोहर लगाई। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टीन के राजकुमार एलोइस और राजकुमारी सोफी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कूटनीतिक स्तर पर वार्ता भी हुई। प्रिंस एलोइस और सोफी राजघाट भी गए और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। प्रिंस एलोइस ने कहा कि लिकटेंस्टीन की यह पहली राजकीय यात्रा भारत के साथ रिश्ते की अहमियत दिखाती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों देश इनोवेशन, उन्नत निर्माण, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ा सकते हैं।

आकार और आबादी में बेहद छोटा यह देश भारत के लिए बेहद अहम है। प्रिंस एलोइस ने वादा किया है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थाई सीट के लिए समर्थन देंगे। भारत के हक में कई यूरोपीय देश पहले भी आवाज उठा चुके हैं। भारत ने प्रिंस एलोइस को शुक्रिया भी कहा है। 

यह भी पढ़ें: अवसर से आशंका तक, FTA पर भारत और यूरोपियन यूनियन की चुनौतियां क्या हैं?

लिकटेंस्टाइन क्यों खास है?

लिकटेंस्टाइन मध्य यूरोप के आल्प्स क्षेत्र में बसा एक छोटा देश है। इसका आधिकारिक नाम प्रिंसिपैलिटी ऑफ लिकटेंस्टाइन है। यह ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच स्थित है। राजधानी वडूज है और सबसे बड़ी नगरपालिका शान है। यहां की आधिकारिक भाषा जर्मन है। देश की स्थापना 23 जनवरी 1719 को हुई। उस समय रोमन सम्राट चार्ल्स VI ने वडूज और शेलेनबर्ग को जोड़कर इसे रियासत का दर्जा दिया था। 1866 में जर्मन परिसंघ भंग होने के बाद यह पूरी तरह स्वतंत्र हो गया। यहां राजतंत्र है और प्रिंस हंस-एडम II 1989 से गद्दी पर हैं।

कैसे चलता है देश का शासन?

लिकटेंस्टाइन का क्षेत्रफल 160.5 वर्ग किमी है। साल 2025 तक यहां की आबादी लगभग 41,237 थी। यह देश स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया से घिरा है और एक लैंडलॉक स्टेट है। यहां करीब 11 नगरपालिकाएं है। राजकुमार एलोइस उत्तराधिकारी और रीजेंट की भूमिका में हैं। प्रधानमंत्री ब्रिगिट हास हैं और उप प्रधानमंत्री साबिने मोनाउनी हैं। यहां की संसद का नाम लांडटाग है। इसमें 25 सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल अधिकतम चार साल का होता है।

मार्च 2003 में हुए जनमत संग्रह में प्रिंस के अधिकार बढ़ाए गए। इसके बाद प्रिंस सरकार को हटा सकते हैं, जजों को नामित कर सकते हैं और कानूनों पर वीटो लगा सकते हैं। 2012 के जनमत संग्रह में इन अधिकारों को फिर से मंजूरी मिली। उस समय 76 प्रतिशत मतदाताओं ने वीटो सीमित करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं है यह देश

लिकटेंस्टाइन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है लेकिन शेंगेन क्षेत्र और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा है। यह संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ और यूरोपीय परिषद का भी सदस्य है। स्विट्जरलैंड के साथ इसका सीमा शुल्क और मुद्रा समझौता है। यहां स्विस फ्रैंक चलता है।

कैसी है यहां की अर्थव्यवस्था?

अर्थव्यवस्था में वित्तीय सेवाओं की बड़ी भूमिका है। निर्माण कंपनी हिल्टी देश की सबसे बड़ी नियोक्ता है। कॉर्पोरेट मुनाफे पर कर की दर 12.5 प्रतिशत है। 2008 के कर विवाद के बाद देश ने अपनी छवि सुधारने के प्रयास किए। 

सेना और एयरपोर्ट तक नहीं है

लिकटेंस्टाइन की अपनी सेना नहीं है। सेना को वित्तीय कारणों से फरवरी 1868 में भंग कर दिया गया था। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राष्ट्रीय पुलिस के पास है। देश में कोई हवाई अड्डा नहीं है। सबसे नजदीकी बड़ा हवाई अड्डा स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख है, जो सड़क मार्ग से करीब 130 किमी दूर है।

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भारत और लिकटेंस्टाइन के रिश्ते कैसे हैं?

भारत और लिकटेंस्टाइन की रियासत के बीच राजनयिक संबंध 1993 में स्थापित हुए थे। भारत का स्विट्जरलैंड में राजदूत, लिकटेंस्टाइन का भी राजदूत होता है। साल 2023 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 30वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। लिकटेंस्टाइन की तरफ से भारत के कई उच्चस्तरीय दौरे हुए हैं। भारत के साथ टैक्स और ब्लैक मनी को लेकर भी करार हुए हैं।

19-20 फरवरी 2026 को प्रिंस एलोइस भारत आए थे। वह नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इससे पहले भी साल 2018 और 2010 में वह भारत आए थे। साल 2013 में वह निजी यात्रा पर भी भारत आए थे। लिकटेंस्टाइन की विदेश मंत्री डॉमिनिक हैसलर भी कई बार भारत आ चुकी हैं।

भारत की तरफ से भी दौरे हुए हैं। 7 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल लिकटेंस्टाइन गए। यह किसी भारतीय कैबिनेट मंत्री का वहां पहला आधिकारिक दौरा था। उन्होंने वादुज कैसल में प्रिंस एलोइस से मुलाकात की, प्रधानमंत्री ब्रिजिट हास से बातचीत की और उप-प्रधानमंत्री सबाइन मोनाउनी के साथ बैठक की। उन्होंने हिल्टी कंपनी के मुख्यालय का भी दौरा किया। इससे पहले दिसंबर 2023 में विदेश मंत्रालय के सचिव (वेस्ट) संजय वर्मा ने वादुज में पहली विदेश कार्यालय परामर्श बैठक की थी। अप्रैल 2016 में तत्कालीन राज्य मंत्री वीके सिंह भी लिकटेंस्टाइन गए थे।

भारत और लिकटेंस्टाइन के व्यापारिक रिश्ते कैसे हैं?

साल 2025 में जनवरी से अगस्त तक के बीच दोनों देशों के बीच कुल 3.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 0.69 मिलियन डॉलर और आयात 2.68 मिलियन डॉलर था। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक लिकटेंस्टाइन से भारत में 105.82 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। 


लिकटेंस्टाइन की कई कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और 8 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही हैं। इनमें हिल्टी कॉर्पोरेशन सबसे बड़ी कंपनी है, जो भारत में 1500 से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। 10 मार्च 2024 को भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच मुक्त व्यापार समझौता नई दिल्ली हुआ था।

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सांस्कृतिक रिश्ते कैसे हैं?

लिकटेंस्टाइन और भारत सांस्कृतिक तौर पर जुड़ रहे हैं। हर साल जून में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग कार्यक्रम आयोजित होते हैं। नवंबर 2023 में वादुज में इंडिया वीक मनाया गया, जिसमें योग कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। 2019 में लिकटेंस्टाइन पोस्ट ने महात्मा गांधी पर तीन स्मारक डाक टिकट जारी किए थे। लिकटेंस्टाइन में भारतीय समुदाय बहुत छोटा है। वहां सिर्फ 29 भारतीय निवासी हैं, क्योंकि रहने की अनुमति के लिए स्विस या लिकटेंस्टाइन का जीवनसाथी होना जरूरी है। करीब 50-60 भारतीय लिकटेंस्टाइन में काम करते हैं लेकिन ऑस्ट्रिया या स्विट्जरलैंड में रहते हैं।

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