अमेरिका और ईरान ने रविवार को युद्धविराम का समझौता पर अंतिम फैसला कर लिया है। यह समझौता लगभग चार महीने से चल रहे युद्ध को अगले 60 दिनों के लिए रोक देगा। इस दौरान दोनों देश आगे की बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि समझौता पूरा हो गया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी इसकी पुष्टि की है।
दोनों तरफ से इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया जा रहा है। समझौते पर शुक्रवार 19 जून को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। यह 47 साल बाद अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की बैठक होगी। पाकिस्तान और कतर ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की।
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समझौते में क्या है?
समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोल दिया जाएगा, जिससे दुनिया भर के जहाज तेल ले जाने लगेंगे। अमेरिका अपनी नौसेना की ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी खत्म करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जहाजों के इंजनों को अब शुरू कर दो, तेल का कारोबार पूरी दुनिया में फैलने दो।
क्यों समझौता हुआ है?
यह जंग 4 महीने से जारी है। दुनिया में आर्थिक संकट की सबसे बड़ी वजह, इस युद्ध को माना जा रहा है। तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। भारत जैसे बड़े देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की किल्लत शुरू हो गई। कहीं पेट्रोल नहीं मिल रहा, कहीं गैस के लिए लंबी कतारें लगीं। समझौते के लिए वैश्विक दबाव भी बढ़ा। तनाव को बढ़ाने में अमेरिका को दुनिया ने जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप के मनमाने फैसलों की वजह से यह जंग लगातार खिंचती चली गई। अमेरिकी गोलीबारी में भारतीय नाविकों की भी मौत हुई। बढ़ते तनाव के बीच इसे राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
60 दिनों की बात में क्या-क्या तय होगा?
समझौते में लेबनान में चल रहे इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध को भी रोकने की बात कही गई है। कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अभी असहमतियां हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का मुद्दा 60 दिनों की बातचीत में तय होगा। दोनों पक्ष अभी भी इसमें समझौता नहीं कर पाए हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा है?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका हमला और नाकाबंदी ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने में सफल रहा। उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आलोचना भी की, जिन्होंने लेबनान में हमला कर समझौते को खतरे में डाला था।
इजरायल का रुख क्या है?
इजराइल इस समझौते से खुश नहीं है। वह चाहता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो और हिजबुल्लाह जैसी प्रॉक्सी सेना पर लगाम लगे। इजरायली मीडिया और नेता इसे बैड डील बता रहे हैं।
बाजारों पर असर क्या होगा?
समझौते की खबर से तेल की कीमतें गिर गईं। ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी सस्ता हो गया। शेयर बाजार में भी उछाल देखने को मिल सकता है। अगर सब कुछ सामान्य रहा तो दुनिया को तेल संकट से राहत मिल सकती है, भारत में भी आई आर्थिक अनिश्चितता दूर हो सकती है।
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ईरानी नागरिक क्या कह रहे हैं?
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में आम लोग राहत महसूस कर रहे हैं। युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। लोगों को उम्मीद है कि यह राहत स्थाई हो सकती है। अगले 60 दिनों में अगर परमाणु मुद्दे पर स्थायी समझौता नहीं हुआ तो युद्ध फिर शुरू हो सकता है। फिलहाल दोनों देश शांति की ओर बढ़ने का दावा कर रहे हैं।
कैसे समझौते पर आए दोनों देश?
28 फरवरी को हुए हमले के 4 महीनों बाद दोनों देश समझौते तक पहुंच पाए। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सबसे पहले शांति की कवायद शुरू की थी। जून 2025 से शुरू हुई मुनीर की ट्रंप से मुलाकात और ईरान के साथ संपर्क ने समझौते का आधार तैयार किया। युद्ध शुरू होने के बाद आसिम मुनीर ने तेहरान के दो दौरे किए, तुर्की-मिस्र के साथ मिलकर अप्रत्यक्ष बातचीत चलाई। पाकिस्तान ने अप्रैल में अस्थाई सीजफायर की नींव रखी। इस्लामाबाद से लेकर जिनेवा तक के दौरे, इस शांति वार्ता को तय करने में प्रभावी रहे। 19 को जिनेवा में स्थाई समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।