अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अकेले जंग लड़ रहे ईरान की मदद अब रूस कर रहा है। अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी दे रहा है। अमेरिकी सैनिकों, जहाजों और विमानों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी, रूस, ईरान तक पहुंचा रहा है।
रूस के पास अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजरी है, जो अब ईरान के काम आ रहा है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि रूस, अपनी सैटेलाइट क्षमताओं का इस्तेमाल, ईरान के लिए कर रहा है। अमेरिकी ठिकाने, इसी वजह से तबाह हो रहे हैं।
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग में रूस अब सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है। अभी यह साफ नहीं है कि रूस को इसके बदले में क्या मिल रहा है। कुछ ईरानी ड्रोन हमलों में अमेरिकी ठिकानों पर निशाना साधा गया है।
कैसे नुकसान पहुंचा रहा है रूस?
रविवार को कुवैत में अमेरिकी सैनिकों के अस्थायी ठिकाने पर ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरान के पास इतनी अत्याधुनिक सैटेलाइट लोकेशन नहीं है, जिसकी मदद से वह हमला कर सके। रूसी तकनीक की मदद से यह काम, उनके लिए आसान हो रहा है। |
UAE के ठिकानों को चुन-चुनकर तबाह कर रहा है ईरान। Photo Credit: PTI
चीन का ईरान पर रुख क्या है?
कई अमेरिकी अखबारों ने लिखा है कि चीन ईरान को आर्थिक मदद, स्पेयर पार्ट्स और मिसाइल कंपोनेंट्स देने की तैयारी में है। चीन अभी तक युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुआ है। चीन, ईरान के तेल पर बहुत निर्भर है। चीन चाहता है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से जहाज सुरक्षित गुजर सकें। CNN ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन ज्यादा सतर्क है। वह युद्ध जल्दी खत्म होना चाहता है क्योंकि यह उसके एनर्जी सप्लाई को खतरे में डालता है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पेट हेगसेथ:- अमेरिकी लोग निश्चिंत रहें, उनके कमांडर-इन-चीफ को पता है कि कौन किससे बात कर रहा है। जो कुछ भी गलत हो रहा है, चाहे पब्लिक हो या बैक-चैनल, उसे मजबूती से रोका जा रहा है। रूस और चीन इस युद्ध में वास्तव में कोई फैक्टर नहीं हैं।
ईरान का रक्षक कैसे बना है रूस?
रूस और ईरान साल 2023 से मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर सहयोग कर रहे हैं। ईरान, रूस को शाहेद ड्रोन और शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल देता है। इन मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन पर के खिलाफ हो रहा है। रूस में ईरान के घातक ड्रोन की बड़ी फैक्ट्रियां भी हैं। ईरान इस मदद के बदले, रूस से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को मजबूत करने में मदद मांग रहा है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में अब तक 50,000 से ज्यादा सैनिक, 200 से ज्यादा फाइटर जेट और दो एयरक्राफ्ट कैरियर उतार दिया है। सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर का दावा है कि जंग का मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना है। अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की ढाल, ईरान की मिसाइल क्षमताएं हैं।