2 हफ्ते का प्लान था, 4 साल बीते, रूस-यूक्रेन ने युद्ध में क्या खोया, क्या पाया?
जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तब उसका कहना था कि 2 हफ्ते में वह जीत हासिल कर लेगा। अब 4 साल बीत चुके हैं लेकिन आज भी दोनों देशों का युद्ध जारी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के 4 साल पूरे, Photo Credit: Sora Ai
रूस और यूक्रेन का युद्ध हुए 4 साल पूरे हो चुके हैं। शांति कायम करने की तमाम कोशिशें बेकार चली गई हैं और आज भी दोनों देश एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। इन चार साल में इन दोनों देशों ने तो जन और धन गंवाया ही है, दुनिया के कई देशों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। अमेरिका और यूरोप के तमाम देशों ने भी खूब हथियार और पैसे झोंके हैं, डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म कराने का दावा तक किया लेकिन शांति स्थापित नहीं हुई। शुरुआत में रूस को उम्मीद थी कि वह चंद दिनों में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा लेकिन उसकी यही उम्मीद उसके लिए भूल साबित हुई।
अब स्थिति ऐसी है कि चाहकर भी व्लादिमीर पुतिन युद्ध को खत्म नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, शांति की अपील कर रहे यूक्रेन को यूरोपीय देशों से जबरदस्त समर्थन मिला है। नतीजा यह हुआ है कि भारी भरकम नुकसान के बावजूद यूक्रेन आज भी रूस के आगे नहीं झुका है और उससे लगातार लड़ रहा है। आइए समझते हैं कि इन 4 साल में रूस, यूक्रेन और बाकी दुनिया ने क्या खोया और क्या पाया।
कितने का नुकसान?
वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन चार साल में यूक्रेन को जितना नुकसान हुआ है, उसे फिर से बनाने में उसे लगभग 588 बिलियन डॉलर यानी लगभग 53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने होंगे। इसे आंकड़े को ऐसे समझिए कि भारत ने इस साल अपना जो बजट पेश किया है, वह 50.65 लाख करोड़ का है। यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों में बसे बख्मुत, तोर्तेस्क और वोवचांस्क जैसे शहर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। WHO के मुताबिक, अब तक 2800 से ज्यादा हमले अस्पतालों को निशाना बनाकर किए गए हैं। रूस ने यूक्रेन के एनर्जी सेंटरों को भी निशाना बनाया है जिसके चलते करोड़ों लोगों तक बिजली भी नहीं पहुंच रही है।
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यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से में अभी भी बारूद का धुआं फैला हुआ है। संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि साल 2022 से लेकर अब तक यूक्रेन में 15 हजार से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसे इस बात की जानकारी ही नहीं मिल पा रही है कि रूस में कितने लोग मारे गए हैं। यूक्रेन के मुताबिक, जिन इलाकों पर रूस ने कब्जा किया है, वहां से 20 हजार से ज्यादा बच्चों को या तो जबरन भगा दिया गया है या उनका अपहरण कर लिया गया है।

यूनाइटेड नेशन्स रिफ्यूजी एजेंसी के मुताबिक, इस युद्ध के चलते 59 लाख से ज्यादा से ज्यादा यूक्रेनी नागरिक देश छोड़ने को मजबूर हुए हैं और 37 लाख से ज्यादा यूक्रेनी नागिरक अपना घर छोड़कर देश में ही कहीं और शरण लेकर रह रहे हैं। दोनों देशों में से किसी ने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया है कि उनके कितने सैनिक मारे गए हैं।
युद्ध से दोनों देशों को पैसों का बहुत नुकसान हुआ है। हथियारों पर अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं और कमाई के साधन सीमित होते जा रहे हैं। एक समय रूस की इकॉनमी 9 प्रतिशत सालाना की रफ्तार से बढ़ रही थी लेकिन युद्ध के बाद यह 1 प्रतिशत पर आ गई है। तेल और गैस से होने वाली कमाई भी घटी है और पांच साल में इन दोनों से सबसे कम कमाई हुई है।
क्या असर हुआ है?
रूस को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि यूक्रेन से लड़ाई उस पर इतनी भारी पड़ जाएगी। युद्ध लंबा खिंचा तो खजाने पर बोझ पड़ा। नतीजतन रूसी सरकार ने VAT को 20 पर्सेंट से बढ़ाकर 22 पर्सेंट कर दिया है। रूस के वित्त मंत्रालय का कहना है कि ये पैसे रक्षा और सुरक्षा पर खर्च किए जाएंगे। देश कई हिस्सों में घरेलू चीजें महंगी हो गई हैं, इंटरनेट के बिल, घर का किराया और बाकी चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं।
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कहां से कितनी मदद मिली?
एक तरफ जहां रूस लगभग अपने भरोसे लड़ रहा है तो यूक्रेन को पश्चिमी देशों से खूब मदद मिल रही है। जर्मनी के Kiel इंस्टिट्यूट के मुताबिक, 2022 से यूरोप ने यूक्रेन को लगभग 201 बिलियन यूरो यानी 21 तकरीबन 21 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है। वहीं, अमेरिका ने इतने ही समय में 115 बिलियन डॉलर यानी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है। हालांकि, जो बाइडन के चुनाव हारने के बाद डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए तो उन्होंने हथियारों की सप्लाई और पैसे देने में कमी कर दी है।
दूसरी तरफ, उत्तरी कोरिया ने रूस की मदद के लिए हजारों सैनिक भेजे हैं। इतना ही नहीं, नॉर्थ कोरिया ने करोड़ों की संख्या में आर्टिलरी शेल भी भेजे हैं। ईरान और चीन ने भी रूस की थोड़ी बहुत मदद की है।
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कितने लोग और सैनिक मारे गए?
हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि उनके देश के 55 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं। रूस ने इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी कभी नहीं दी। BBC और मीडियाजोना की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस के 1.77 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं। इन दोनों संस्थानों का कहना है कि यह संख्या स्थानीय अधिकारियों, मरने वाले के परिवार वालों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के आधार पर बताई गई है। वहीं, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) का अनुमान है कि अब तक यूक्रेन से 1 लाख से 1.4 लाख और रूस से 3.25 लाख सैनिक मारे जा चुके हैं। अनुमान के मुताबिक, रूस के 12 लाख लोगों से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
किसने, कितना कब्जा कर लिया?
इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की रिपोर्ट कहती है फरवरी महीने तक रूस ने यूक्रेन के 19.5 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इस हमले से पहले ही क्रीमिया और पूर्वी डोनबास पर रूस कब्जा कर चुका था। रूस लगातार कोशिश कर रहा है कि वह पूर्वी डोनेत्स्क इलाके पर कब्जा कर सके ताकि यूक्रेन को पश्चिमी देशों की ओर से मिलिट्री सपोर्ट न मिल पाए।
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वहीं, यूक्रेन का मानना है कि अगर यह इलाका उसके हाथ से निकल गया तो भविष्य में भी उस पर हमला किया जा सकेगा। डोनाल्ड ट्रंप कई बार बातचीत भी करवा चुके हैं लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच कोई निकल नहीं सका है।

क्यों शुरू हुआ था युद्ध?
यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ था जब यूक्रेन ने NATO में शामिल होने की बात कही थी। 30 यूरोपीय और दो अमेरिकी देशों वाले इस संगठन में यूक्रेन के शामिल होने का नतीजा होता कि अगर यूक्रेन पर हमला होता तो ये सारे देश उसके साथ खड़े होते। रूस की इच्छा थी कि यूक्रेन ऐसे किसी देश में शामिल न हो। तमाम धमकियों के बावजूद जब यूक्रेन ने कोई लचीला रुख नहीं दिखाया तब रूस ने कई इलाकों पर हमला कर दिया था।
मौजूदा हालात में यह स्पष्ट नहीं है कि यह युद्ध अभी कितने दिन, कितने महीने या कितने साल और चलेगा। व्लादिमीर पुतिन का स्पष्ट कहना है कि रूस अपने भविष्य, सच्चाई और न्याय के लिए लड़ रहा है। दूसरी तरफ वोलोदिमीर जेलेंस्की भी कहते है कि किसी भी स्थिति में यूक्रेन नहीं झुकने वाला है।
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