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यूक्रेन के बाद अब ग्रीनलैंड में हो जाएगा अमेरिका बनाम यूरोप?

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड का कंट्रोल करने की जरूरत है। इस पर यूरोपीय नेताओं ने आपत्ति जताई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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वेनेजुएला में जिस तरह से सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया, उसकी कुछ देश आलोचना कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे वाजिब ठहराते हुए कहा था कि मादुरो ड्रग्स कार्टेल का सपोर्ट करते थे।

 

वेनेजुएला में अचानकर जो कुछ हुआ, उसके बाद छोटे-छोटे देश भी घबरा गए हैं। ट्रंप ने भी अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कही है। ट्रंप का कहना है कि वह 2019 में ही ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करना चाहते थे। उनका तर्क है कि अमेरिकी सेना के लिए ग्रीनलैंड जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया।

 

हालांकि, ट्रंप के इन इरादों पर यूरोपीय नेताओं ने नाराजगी जताई है। फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई है। सबका कहना है कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है।

 

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ट्रंप क्या चाहते हैं?

रविवाव को ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कंट्रोल लेने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है, क्योंकि डेनमार्क इसे नहीं संभाल पाएगा।

 

ट्रंप ने तर्क दिया था कि NATO क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड का कंट्रोल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'ग्रीनलैंड हर जगह रूसी और चीनी जहाजों से भरा हुआ है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से ग्रीनलैंड की जरूरत है और डेनमार्क ऐसा नहीं कर पाएगा।'

 

 

वहीं, व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने भी कहा कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि डेनमार्क कैसे ग्रीनलैंड पर कंट्रोल कर सकता है?

 

मिलर ने सवाल उठाते हुए कहा, 'डेनमार्क के क्षेत्रीय दावे के आधार क्या हैं? ग्रीनलैंड को डेनमार्क की कॉलोनी बनाने का उनका आधार क्या है?'

 

हालांकि, उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने के लिए अमेरिका कोई मिलिट्री ऑपरेशन चलाएगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में मिलिट्री ऑपरेशन के बारे में सोचने या बात करने की जरूरत नहीं है।

 

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ग्रीनलैंड पर अमेरिका VS यूरोप!

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने जो इरादे जाहिर किए हैं, उसके बाद अमेरिका और यूरोप में एक बार फिर तनातनी शुरू हो गई है। अब तक यूक्रेन को लेकर अमेरिका और यूरोप की राय बंटी हुई रहती थी। मगर अब ग्रीनलैंड को लेकर भी दोनों में तनातनी शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।

 

ग्रीनलैंड, डेनमार्क की कॉलोनी है और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) का हिस्सा भी है।

 

ट्रंप के बयान पर मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन औऱ यूके ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेड्रिक्सन के साथ मिलकर एक साझा बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है और डेनमार्क और ग्रीनलैंड से जुड़े मामलों में फैसला लेने का अधिकार सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड का है।

 

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि डेनमार्क को NATO पर भरोसा है। उन्होंने ट्रंप की उस बात को खारिज कर दिया कि डेनमार्क, ग्रीनलैंड की सुरक्षा नहीं कर सकता।

 

उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि ग्रीनलैंड चीनी निवेश से भरा हुआ है। और न ही यह कि ग्रीनलैंड के चारों ओर चीनी युद्धपोत घूम रहे हैं।' उन्होंने कहा कि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर और निवेश करने के लिए स्वागत है।

 

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि 'किसी भी सदस्य को NATO को दूसरे सदस्य पर न तो हमला करना चाहिए और न ही धमकाना चाहिए, वरना NATO का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।'

 

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ग्रीनलैंड क्या चाहता है?

बताया जा रहा है कि ट्रंप की बयानबाजी के बाद डेनमार्क ने अपने विदेश मंत्री को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ अर्जेंट मीटिंग करने को कहा है।

 

वहीं, ग्रीनलैंड का कहना है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन कहा कि वह अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहते हैं।

 

ट्रंप ने पिछले महीने ही लुइसियाना के गवर्नर लैंड्री को ग्रीनलैंड में अपना विशेष दूत नियुक्त किय है। लैंड्री का कहना है कि ट्रंप ग्रीनलैंड को आर्थिक अवसर दे रहे हैं लेकिन उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका इस पर जबरदस्ती कब्जा करेगा।

 

लैंड्री ने कहा, 'मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप एक आजाद ग्रीनलैंड का समर्थन करते हैं, जिसके अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध मजबूत हों।' उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास यूरोप के मुकाबले ग्रीनलैंड को देने के लिए बहुत कुछ है।

 

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ग्रीनलैंड से अमेरिका को क्या मिलेगा?

वेनेजुएला ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने X पर ग्रीनलैंड का एक नक्शा पोस्ट किया, जिसके साथ 'SOON' लिखा था।

 

 

ग्रीनलैंड, दुनिया का सबसे बड़ा आइलैंड है लेकिन यहां की आबादी सिर्फ 57 हजार है। डेनमार्क की कॉलोनी होने के कारण यह NATO का सदस्य भी है।

 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप और उत्तर अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड की स्ट्रैटजिक लोकेशन इसे अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए एक अहम जगह बनाती है। इसके अलावा यहां खनिजों का भंडार भी है, जिससे अमेरिका की चीन पर निर्भरता कम हो सकती है।


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