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'दिखावा खत्म हुआ...', अमेरिका की दादागिरी पर एस. जयशंकर ने दिया करारा जवाब

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और भारत के रिश्तों पर कहा कि अगर आतंकवाद से जुड़ी हुई हमारी चिंताएं नहीं समझी जाएंगी, तो ये अमेरिका-भारत के रिश्तों को प्रभावित कर सकती हैं।

S Jaishankar

विदेश मंत्री एस जयशंकर। Photo Credit: PTI

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और भारत के रिश्तों को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ रुकावटें आई हैं। उन्होंने इसकी वजह व्यापार समझौते की रफ्तार और उसकी जटिलता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद को बताआ और इसको लेकर भारत की ओर से चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका आंतकवाद से जुड़ी भारत की चिंताओं को नहीं समझता है तो इसका अगर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' की रणनीति का बचाव करते हुए अमेरिका को करारा जवाब दिया। 


जयशंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में अमेरिका के पूर्व राजनयिक डेनियल रसेल के साथ बातचीत करते हुए अमेरिका के साथ रिश्तों पर अपनी बात रखी।   एस. जयशंकर ने कहा है कि पड़ोसी देश से फैलने वाला आतंकवाद भारत की मुख्य चिंताओं में से एक है और अगर नई दिल्ली के पार्टनर देश इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते हैं, तो इससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ता है। 

 

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संबंध और कैसे सुधरेंगे?

भारत और अमेरिका के संबंधों के बारे में विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल किया गया। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगर मैं पीछे हटकर संबंधों को देखूं तो मैं देखता हूं कि दुनिया के ज्यादातर देशों के अमेरिका के साथ संबंध मुश्किल रहे हैं। मेरा मतलब है कि यह कोई सांत्वना की बात नहीं हो सकती, लेकिन यह एक सच्चाई है।' जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्तों में रुकावट की एक बड़ी वजह व्यापार समझौते की रफ्तार और उसकी जटिलता रही है।

 

उन्होंने कहा कि भारत में छोटे उत्पादकों, कृषि उत्पादकों और कारखानों का बड़ा आधार है। इसलिए व्यापार समझौते पर बातचीत में कई तरह के हितों को ध्यान में रखना पड़ता है। इसी वजह से बातचीत शुरुआत में जितनी आसान समझी गई थी, उससे ज्यादा जटिल हो गई। उन्होंने कहा कि अब व्यापार समझौते को लेकर कमोबेश समझ बन गई है लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका की तरफ से क्या बदला है।

अमेरिका को दिया करारा जवाब

जयशंकर ने अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में हुए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पारस्परिक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद अमेरिका में सेक्शन 301 के तहत एक नई प्रक्रिया शुरू हुई है और यह प्रक्रिया अभी चल रही है। उन्होंने इसे भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत में अनिश्चितता की एक और वजह बताया। भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' पर अमेरिका की ओर से चिंता जाहिर किए जाने पर एस जयशंकर ने जवाब दिया है। 

 

उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका में यह बात कही जाती थी कि भारत के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं होने चाहिए और उसे मुख्य रूप से वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्ते पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब यह दिखावा खत्म हो गया है और आज हर देश दूसरे देशों के साथ खुले तौर पर रिश्ते बना रहा है। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका भी आज चीन, रूस, यूक्रेन, एशिया और यूरोप के साथ अपने रिश्ते संभाल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की नीति भारत अपनाता रहा है, आज वॉशिंगटन भी वैसा ही कर रहा है।

 

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आतंकवाद मुख्य चिंता

इस पूरी बातचीत में एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका की ओर से भारत का साथ ना देने और भारत का पक्ष ना समझने पर नाराजगी जाहिर की है। पाकिस्तान का जिक्र करते हुए एस. जयशंकर ने कहा, 'भारत में हमारे लिए जो बात खास तौर पर अहम है, वह आतंकवाद का मुद्दा है। हमें लगता है कि एक देश के तौर पर शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसे दशकों से किसी पड़ोसी देश की सोची-समझी और जानबूझकर अपनाई गई नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा हो, जैसा हमने किया है।'

 

इसके बाद उन्होंने कहा, 'अगर कोई ऐसी चीज जो हमारे लिए बहुत अहम है, उसे लेकर काफी समझ, कद्र या सहानुभूति न हो, तो मुझे लगता है कि इससे भी समस्या पैदा होती है। अगर मेरा पार्टनर मेरी किसी मुख्य चिंता को पूरी तरह नहीं समझता या उसकी कद्र नहीं करता, तो जाहिर है कि इसका असर रिश्ते पर पड़ता है।' एस. जयशंकर के इस बयान को अमेरिका के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। 


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