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'छात्रों को गायब किया जा रहा', बलोच एक्टिविस्ट ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बलूचिस्तान में छात्रों और युवाओं के गायब होने के मामलों पर विवाद बढ़ गया है। बलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन बलोच ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

Sammi Deen allegations against govt

मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच, Photo Credit: sammideenbaluch/Instagram

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में छात्रों और युवाओं के जबरन गायब किए जाने के मामलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच ने दावा किया है कि हाल के दिनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और शांतिपूर्ण राजनीतिक संगठनों से जुड़े युवाओं को उनके घरों, हॉस्टलों और शैक्षणिक संस्थानों से उठाया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में सम्मी दीन बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान में लोगों के जबरन गायब किए जाने की घटनाएं नई नहीं हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में छात्रों के लापता होने के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई से इलाके में पहले से मौजूद तनाव और गहरा हो सकता है।

 

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सम्मी दीन बलोच ने लगाए गंभीर आरोप

सम्मी दीन बलोच ने आरोप लगाया कि सरकार इन कार्रवाइयों को आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा बताकर सही ठहराने की कोशिश करती है। उन्होंने लिखा, 'अगर यही तरीका शांति लाने का होता तो आज बलूचिस्तान खून-खराबे, असुरक्षा और नफरत के इस माहौल में नहीं होता। हकीकत यह है कि यह नीति शांति नहीं, बल्कि और ज्यादा नफरत और हिंसा को जन्म दे रही है। जब युवाओं को बिना किसी अपराध और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के वर्षों तक सरकारी हिरासत में रखा जाता है उनके साथ अमानवीय व्यवहार, यातनाएं और अपमान किया जाता है तो उनके मन में राज्य के खिलाफ गुस्सा और बदले की भावना खुद राज्य की नीतियां पैदा करती हैं।'

 

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मानवाधिकार कार्यकर्ता ने दावा किया कि कई युवाओं को बिना किसी आरोप या न्यायिक प्रक्रिया के लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार, यातना और अपमान किया जाता है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं युवाओं में गुस्सा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

पाकिस्तान सरकार ने पहले भी खारिज किए हैं आरोप

सम्मी दीन बलोच ने सरकार से दमनकारी नीतियों की समीक्षा करने और यह विचार करने की अपील की कि वर्षों से जबरन गायब किए जाने, फर्जी मुठभेड़ों और सामूहिक सजा जैसी कार्रवाइयों के बावजूद बलूचिस्तान में स्थायी शांति क्यों नहीं स्थापित हो सकी। उनका कहना है कि अशांति की जड़ दमनकारी नीतियां और लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।

 

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हालांकि, पाकिस्तान सरकार पहले भी इस तरह के आरोपों से इनकार करती रही है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां कानून के दायरे में रहकर काम करती हैं और उनका उद्देश्य आतंकवाद पर काबू पाना तथा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इसलिए जबरन गायब किए जाने के आरोपों को सरकार निराधार बताती रही है।


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