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'गद्दार, सौदेबाज, दलाल...', ईरान की सरकार से खफा अपने, तख्तापलट होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब और तेज हो सकती है। ईरान का राष्ट्रवादी तबका, अपने ही नेताओं से नाराज है।

Iran Ali Khamenei

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई। Photo Credit: mb_ghalibaf/X

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ईरान के कट्टरपंथी गुटों में सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए बड़े अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है। कट्टरपंथी नेता आरोप लगा रहे हैं कि देश के कुछ प्रमुख नेता अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के जरिए इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ ही कदम उठा रहे हैं। 

जब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई का जनाजा निकल रहा था, तब लोगों ने उन्हें याद करने की जगह राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के खिलाफ नारेबाजी की और उन्हें सौदेबाज तक करार दिया। लोगों ने कहा है कि जो लोग शांति वार्ता में शामिल हैं, उन्हें मौत दी जाए। 

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ईरान की सरकार को गद्दार कौन बता रहा?

विदेश मंत्री अब्बास अरागची जैसे नेताओं के खिलाफ भी नारेबाजी हुई। कुछ लोग उन पर 'समझौतापरस्त' और 'देशद्रोही' होने का आरोप लगाते हुए पत्थर भी फेंकने लगे। कट्टरपंथी नेता कह रहे हैं कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची देश चला रहे हैं। 

ईरान में तख्तापलट की आशंका 

ईरान का राष्ट्रवादी तबका चाहता है कि ये नेता सुप्रीम लीडर के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं और अपनी सत्ता मजबूत कर रहे हैं। एक राष्ट्रवादी सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया लिखा, 'क्या ईरान में तख्तापलट होने वाला है?' महमूद नबावियन ने अमेरिका के साथ समझौते का विरोध किया और कहा कि यह अली खामेनेई के आदेशों के खिलाफ है। 

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अमेरिका से सीधी जंग चाहते हैं कि राष्ट्रवादी

ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक युद्धविराम लगभग टूट चुका है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले किए, जिसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की। राष्ट्रवादी गुट अब समझौता खत्म करने और फिर से युद्ध शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

मसूद पेजेश्कियन का तख्तापलट होगा?

ईरान के कट्टर राष्ट्रवादी गुट को 'जेब्हे-ये पायदारी' या एंड्योरेंस फ्रंट के नाम से जाना जाता है। दुनिया की नजरो में यह एक कट्टरपंथी संगठन है। यह संगठन खुद को 1979 की इस्लामिक क्रांति का सच्चे रक्षक मानता है। यह संगठन, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को खुलेआम धमकी दे चुका है। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया था कि आपकी गर्दन पर हमारी तलवार होगी।

 

मोहम्मद अली बख्शी ईरानी शासन के प्रति वफादार हैं और इस संगठन से जुड़े हैं। उन्होंने धमकी दी, 'मसूद पेजेश्कियन, अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हम आपके गले पर तलवार चलाएंगे। आप पर नरक की आग बरपेगी।'  सरकार अब इन कट्टरपंथी ताकतों को किनारे करने की कोशिश कर रही है। 

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ईरान सरकार कट्टरपंथियों से कैसे लड़ रही?

मंगलवार सांसद नबावियन को संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग में उनके पद से हटा दिया गया है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे नबावियन ने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले ही उसका मसौदा मीडिया में लीक किया था। उन्होंने समझौते से हटने का फैसला किया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान की वार्ता टीम अमेरिका के साथ बातचीत में सर्वोच्च नेता की तय सीमाओं का उल्लंघन कर रही है।  

क्या ईरान में तख्तापलट हो पाएगा?

ईरानी सरकार का विरोध करने वाला संगठन 'जेब्हे-ये पायदारी' खुद को क्रांतिकारी मानते हैं और इस्लामिक क्रांति का रक्षक समझते हैं। संगठन का आरोप है कि अब सरकार अली खामेनेई के मूल सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही है। यह संगठन मानता है कि ईरान से राजशाही खत्म कर इस्लामी गणतंत्र की स्थापना इसी गुट ने की थी। ईरान में आंतरिक कलह अब झलक रहा है लेकिन ईरान की सरकार के साथ खड़ा नजर आ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अभी ईरान का नियंत्रण है। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।


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