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अबकी अमेरिका सिर्फ दक्षिणी ईरान में ही बमबारी क्यों कर रहा, इसकी वजह क्या है?

अमेरिका दक्षिणी ईरान में फारस की खाड़ी से सटे शहरों और कस्बों में भीषण बमबारी कर रहा है। बुनियादी ढांचे को तबाह किया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे अमेरिका की एक बड़ी सैन्य रणनीति है।

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अमेरिका-ईरान जंग। (AI-generated image)

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अमेरिकी सेना लगातार सात रातों से ईरान पर भीषण बमबारी कर रही है। मगर अबकी बार की कार्रवाई रणनीतिक रूप से काफी सधी और एक क्षेत्र तक सीमित है। विशेषज्ञ इसके पीछे एक बड़े संघर्ष की तस्वीर देख रहे हैं, जबकि अमेरिकी सेना को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जीत दिख रही है। खाड़ी देशों को चिंता है कि कहीं अमेरिका की यह बमबारी उनकी सुरक्षा को ही खतरे में न डाल दे, क्योंकि ईरान ने इन देशों को उनके बुनियादी ढांचे पर हमला करने की धमकी दी है। 

 

युद्धविराम से पहले अमेरिका ने राजधानी तेहरान के आसपास भीषण बमबारी की थी। अबकी उसका निशाना दक्षिण ईरान यानी वह इलाका है, जो फारस की खड़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सटा है। अमेरिका इसी इलाके को निशाना क्यों बना रहा है, उसकी रणनीति और आने वालों दिनों की सैन्य तैयारी क्या है? आइये समझते हैं।

 

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ईरान अब किसे बना रहा निशाना?

  • विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एक व्यवस्थित तरीके से दक्षिणी ईरान पर हमला करके आईआरजीसी और उसकी नेवी को कमजोर बनाने में जुटा है, ताकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ को कमजोर किया जा सके। पिछले एक हफ्ते से दक्षिणी ईरान में जारी हमलों से यह संकेत भी मिलते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप किसी भी हाल में इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर ईरान का एकाधिकार नहीं चाहते हैं। 

 

  • विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेना दक्षिणी तटीय ईरान पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला करके आईआरजीसी की मारक क्षमता को सीमित करना चाहती है, क्योंकि इसी क्षेत्र से ही आईआरजीसी न केवल होर्मुज, बल्कि खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करता है।

 

  • शुरुआत में अमेरिका ने दक्षिण ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन अब सड़कों, पुलों, सुरंगों, एयरपोर्ट और बिजली लाइन पर बमबारी शुरू कर दी है। नतीजा यह हुआ कि प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास काफी हद तक देश के अन्य हिस्से से कट चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जाने वाली सड़कें बंद हो चुकी हैं। र्मोजगान प्रांत में सड़कों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।

 

  • बंदर अब्बास के दक्षिण में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी लगा रखी है। उत्तर में ईरान के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों और सुरंगों को तबाह कर दिया है। आज यह शहर लगभग पूरी तरह कट चुका है। इंटरनेट और टेलीफोन सेवा तक ठप हो गई है।

असली मकसद क्या?

इन बुनियादी ढांचों पर हमले के पीछे अमेरिका का मकसद आईआरजीसी को होर्मुज से दूर रखना। उसकी पहुंच को सीमित रखना। सैन्य साजो-समान किसी भी तरह फारस की खाड़ी तक न पहुंचे। अमेरिका अपने जमीनी अभियान के तहत फारस की खाड़ी पर स्थित ईरान के द्वीप पर कब्जा कर सकता है या खाड़ी के तट पर अपने सैनिकों की तैनात कर सकता है।

क्या 'असली' लड़ाई की जमीन तैयार कर रहा अमेरिका?

अब दुनियाभर में इस बात की अटकलें तेज होने लगी हैं कि अमेरिका दक्षिणी ईरान में सड़क और पुलों को इस वजह से नष्ट कर रहा है, ताकि जब वह जमीनी हमला करे तो आईआरजीसी वहां तक न पहुंच सके। ईरान के नेता भी इसे जमीनी हमले से पहले जमीन तैयार करने की रणनीति मान रहे हैं। ईरानी सांसद अमीर-हुसैन साबेती का कहना है कि दक्षिण के परिवहन रूटों को तबाह करना शायद जमीनी हमले की भूमिका है। क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल द्वीपों या तटीय क्षेत्र में कब्जा करने के किसी भी कोशिश से पहले ईरानी सेनाओं की आवाजाही में बाधा डालेंगे।

 

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चाबहार पर हमला क्यों किया?

अमेरिका ने चाबहार स्थित एक समुद्री निगरानी टावर को भी तबाह किया है। उसका आरोप है कि आईआरजीसी इसका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की पर नजर रखने और उन पर हमला करने के लिए करता था। टावर नष्ट होने से आईआरसीजी की क्षमता सीधे तौर पर कम हुई है।

जमीनी हमले का विकल्प खुला है या नहीं?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस जमीनी हमले के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका का ईरान में जमीनी सेना भेजने का कोई इरादा नहीं है। जबकि ट्रंप ने एक सप्ताह पहले फॉक्स न्यूज से बातचीत में जमीनी हमले के बारे में पूछने पर कहा था, 'कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत होती है। हमारे पास अन्य लोग हैं, जो हमारे लिए जमीनी अभियान चलाएंगे। माना जा रहा है कि ईरान का खार्ग द्वीप अमेरिका के निशाने पर है। यह तेल निर्यात का सबसे बड़ा टर्मिनल है। 


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