केंद्र सरकार ने लद्दाख के मशहूर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हुई हिरासत को तुरंत रद्द कर दिया है। सरकार ने यह आदेश 14 मार्च को जारी किया है। सरकार का कहना है कि इससे लद्दाख में शांति बहाल करने और बातचीत का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को जोधपुर सेंट्रल जेल में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत बंद किया गया था। यह फैसला लेह शहर में 24 सितंबर 2025 को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया था। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हो गई थी। 160 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
सरकार का आरोप था कि सोनम वांगचुक ने लोगों को भड़काया और अशांति फैलाई थी। सोनम वांगचुक को लद्दाख हिंसा का सबसे बड़ा विलेन बताया जा रहा था। सोनम वांगचुक को ही लद्दाख हिंसा का सूत्रधार तक बता दिया गया था।
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सरकार ने रिहाई का क्या कारण बताया?
गृह मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह बयान जारी किया है। सरकार का कहना है कि सोनम वांगचुक की हिरासत से लद्दाख में बंद, विरोध और अशांति का माहौल बना रहा, जिससे छात्र, नौकरी चाहने वाले, व्यापारी, टूर ऑपरेटर, पर्यटक और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
सरकार ने कहा कि सोनम वांगचुक ने NSA की अधिकतम 12 महीने की हिरासत का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है। अब शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत के लिए उनकी रिहाई जरूरी है। सरकार हाई-पावर्ड कमिटी जैसे प्लेटफॉर्म पर लद्दाख की मांगों को सुलझाने के लिए तैयार है।
त्सेरिंग दोरजे लकरूक, अध्यक्ष, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन:-
मेरा मानना है कि यह लद्दाख के लोगों के लिए अच्छी खबर है। दूसरी बात, यह सोनम वांगचुक की एक निजी जीत भी है। हम शुरू से ही यह कहते आ रहे हैं कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे। सरकार सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों को साबित करने में नाकाम रही।
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लद्दाख में क्या मांगें चल रही हैं?
लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। तब से लोग कई मांगें कर रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के जरिए लद्दाख के लोग अपनी मांगे रख रहे हैं। ये मांगें 2024 से तेज हुईं हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में सरकार मिल गई है। लद्दाख में अभी भी केंद्र का ही नियंत्रण है। आइए जानते हैं कि लद्दाख के लोग क्या चाह रहे हैं-
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले
- भारतीय संविधान की छठी अनुसूची लागू हो
- आदिवासी इलाके की संस्कृति और जमीन की सुरक्षा हो
- लद्दाख के लिए अलग लोक सेवा आयोग बने
- लद्दाख को एक की बजाय दो लोकसभा सीटें मिलें
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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
वांगचुक की पत्नी डॉ गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि हिरासत गैरकानूनी है और पुरानी FIR, वीडियो के आधार पर की गई है। सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च को फैसला सुनाने वाला था, लेकिन सरकार ने इससे तीन दिन पहले ही रिहाई का फैसला ले लिया।
क्या कह रहे हैं लोग?
करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता सज्जाद कारगिली ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा चाहिए, यह मांग जारी रहेगी। उन्होंने डेल्डन नामग्याल और स्मानला डोरजे की रिहाई की भी मांग की है। वह चाहते हैं कि 24 सितंबर के मामलों में सभी आरोप अब हटा लिए जाएं।
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NSA क्या है?
नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 एक सख्त कानून है। इसके तहत बिना ट्रायल के किसी को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। अगर सरकार को लगे कि कोई देश की सुरक्षा, रक्षा या विदेश संबंधों के लिए खतरा है। यह आम गिरफ्तारी से अलग है, क्योंकि इसमें चार्ज या कोर्ट ट्रायल की जरूरत नहीं पड़ती। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर देशभर में हंगामा हुआ था। वह पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जो लद्दाख में कई कल्याणकारी प्रोजेक्ट चला रहे हैं।