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दावोस पहुंचे हैं डोनाल्ड ट्रंप, वहां भारत के 6 राज्यों के CM क्या कर रहे हैं?

स्विटज़रलैंड के दावोस मं जहां एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप पहुंचे हैं वहीं पर भारत की तरफ से पीएम मोदी नहीं गए हैं बल्कि कुछ केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री गए हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated

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स्विटज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक शुरू हो चुकी है। 5 दिवसीय इस आयोजन के लिए न सिर्फ अलग अलग देशों के दिग्गज जुट रहे हैं बल्कि ट्रंप खुद इस बार वहां पर उपस्थित हैं। हालांकि इस बैठक में न ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गए हैं और न ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। भारत की तरफ से कुछ केंद्रीय मंत्री और कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों का डेलीगेशन गया हुआ है।

 

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में दुनिया की आर्थिक दिशा तय होती है। इस साल 2026 की बैठक में भारत की उपस्थिति अब तक की सबसे मजबूत है, जिसमें केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और 100 से अधिक शीर्ष CEOs शामिल हैं। इस बार विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों (CMs) का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी दावोस में गया हुआ है। पहले जहां फोकस मुख्य रूप से केंद्र सरकार पर रहता था, अब राज्य स्तर पर निवेश आकर्षित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। यह भारत की आर्थिक विकास की कहानी को विकेंद्रीकृत (decentralized) रूप से पेश करने का प्रयास है, जहां राज्य अपनी अनोखी क्षमताओं को वैश्विक मंच पर दिखा सकें।

 

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मुख्यमंत्री क्यों गए हैं दावोस?

भारत दुनिया की काफी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है। दावोस में मुख्यमंत्रियों की भागीदारी का मुख्य कारण है राज्य-स्तरीय निवेश को बढ़ावा देना। केंद्र सरकार ने इस बार 'भारत की सबसे विकेंद्रीकृत प्रतिनिधिमंडल' तैयार किया है, जहां CMs सीधे वैश्विक CEOs से मिलकर MoUs साइन कर रहे हैं और अपने राज्यों के बारे में यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वह निवेश के काफी अनुकूल है। इससे न केवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ेगा, बल्कि भारत की ग्रोथ को पूरे देश में फैलाने का संदेश भी जाएगा। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर BJP, TDP, Congress, JMM जैसे दलों के CMs साथ हैं, जो निवेश पर राष्ट्रीय एकता दिखाता है। पढ़ते हैं किसने क्या कहा और किसको क्या मिला?


1. देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस दावोस में राज्य को वित्तीय हब और मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के रूप में प्रमोट कर रहे हैं। उन्होंने 10 एमओयू पर साइन किए हैं। बताया जा रहा है कि जो एमओयू उन्होंने साइन किया है उसे प्रदेश में 15 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं। वह पिछले साल भी दावोस के विजिट पर गए थे पिछले साल 16 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट का उन्हें आश्वासन मिला था।


2. एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश)

आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू 'द आंध्र प्रदेश एडवांटेज' थीम के साथ दावोस पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमरावती को ग्लोबल सिटी बनाने, IT और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आकर्षित करना है। उनका फोकस पोर्ट-लेड डेवलपमेंट, तेज बिजनेस स्पीड, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव संसाधनों पर है।


3. ए. रेवंत रेड्डी (तेलंगाना)

तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी 'तेलंगाना राइजिंग 2047' विजन को वैश्विक मंच पर ला रहे हैं। उनका उद्देश्य टेक्नोलॉजी, AI और स्टार्टअप्स में निवेश को लाना है। राज्य की प्रगतिशील नीतियां और निवेशक अनुकूल इकोसिस्टम को हाइलाइट कर वे वैश्विक CEOs से मिलकर लंबी अवधि की ग्रोथ प्लान साझा करेंगे। यह दावोस में तेलंगाना की पहली बड़ी उपस्थिति है, जो राज्य को इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करेगी।


4. मोहन यादव (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव कृषि, फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस कर रहे हैं। उनका उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक क्षमताओं को वैश्विक निवेशकों के सामने रखना है। दावोस में वे पैनल डिस्कशन्स में भाग लेंगे, जहां मध्य प्रदेश के सस्टेनेबल डेवलपमेंट का मॉडल दिखाया जाएगा। मध्य प्रदेश इजरायल के साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर समझौते की कोशिश कर रहा है।


5. हेमंत सोरेन (झारखंड)

झारखंड के CM हेमंत सोरेन का यह पहला WEF दौरा है। उनका उद्देश्य एनर्जी ट्रांजिशन, मिनरल्स, क्रिटिकल मिनरल्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एनर्जी सिक्योरिटी पर निवेश आकर्षित करना। सोरेन राज्य को ग्रीन एनर्जी और माइनिंग हब के रूप में प्रमोट करेंगे, ताकि झारखंड की आर्थिक क्षमता वैश्विक स्तर पर पहचानी जाए।


6. हिमंता बिस्वा सरमा (असम)

असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा राज्य को उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश कर रहे हैं। RBI डेटा के अनुसार, असम सबसे तेज बढ़ता राज्य है। उनका उद्देश्य ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और टूरिज्म में फंड और पार्टनरशिप हासिल करना है। 


उत्तर प्रदेश और गुजरात

उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन पर फोकस कर रहा है, ताकि UP में ज्यादा से ज्यादा निवेश को लाया जा सके। यूपी के डेलिगेशन को 9750 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेट मिला है। यूपी की तरफ से वित्र मंत्री सुरेश खन्ना डेलिगेशन की अगुवाई कर रहे हैं।

 

वहीं, गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी 'विकसित गुजरात @2047' विजन को प्रमोट कर रहे हैं, हालांकि यूपी और गुजरात के मुख्यमंत्री खुद इसमें शामिल नहीं हुए। सांघवी ने कहा कि गुजरात ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस, जीसीसी, टेक्सटाइल पार्क और नए प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने की दिशा में एमओयू साइन किया है।

 

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ग्रोथ को नई ऊंचाई

दावोस 2026 में CMs की भागीदारी भारत की आर्थिक रणनीति का एक स्मार्ट कदम है। इससे न केवल राज्यों में FDI बढ़ेगा, बल्कि जोखिम को डाइवर्सिफाई कर पूरे देश की ग्रोथ मजबूत होगी। यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ दिल्ली या मुंबई तक सीमित नहीं, बल्कि हर राज्य वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है।

 


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