बांग्लादेश की जमीन से 17 साल दूर रहने के बाद जब तारिक रहमान बीते साल बांग्लादेश लौटे, यह साफ हो गया था कि वह प्रधानमंत्री बन सकते हैं। शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा था तो यह मुकाबला भी बेहद आसान रहा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, जमात की तुलना में ज्यादा उदार है, इसलिए लोगों ने मोहम्मद तारिक पर भरोसा जताया और उन्हें प्रचंड बहुमत भी मिला।
12 फरवरी के चुनावों ने ढाका में 19 महीने की राजनीतिक अस्थिरता को खत्म कर दिया है। 2024 में बांग्लादेश के युवाओं ने एक हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा था। शेख हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। BNP की जीत के बाद दिए गए भाषण में तारिक रहमान ने एकजुट बांग्लादेश की अपील की और उन्होंने संदेश दिया कि वह शेख हसीना का प्रत्यर्पण चाहते हैं।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में 1 सीट जीतने वाली 'BJP' के तारिक रहमान से कैसे हैं रिश्ते?
अगले सप्ताह तारिक रहमान शपथ ले सकते हैं। उनका भारत पर रुख क्या होगा, किन आशंकाओं से भारत घिरा है, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे होने वाले हैं, आइए समझते हैं-
भारत को खटकेगी तारिक रहमान की नीति
तारिक रहमान का पहला बयान'बांग्लादेश प्रथम' है। भारत, पड़ोसी प्रथम की नीति मानता है। जीत के बाद अपने पहले भाषण में तारिक रहमान ने एकता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह जीत लोकतंत्र और लोगों की है। पुरानी सरकार द्वारा छोड़ी गई कमजोर अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने नई शुरुआत की बात कही।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर सवाल पर उन्होंने साफ कहा, 'बांग्लादेश और उसके लोगों के हित हमारी विदेश नीति तय करेंगे।' उन्होंने भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते रखने की बात की, लेकिन किसी को मालिक नहीं मानने पर जोर दिया। अलग बात है कि उनकी पार्टी, पाकिस्तान के तरफ ज्यादा झुकाव रखती है।
यह भी पढ़ें: भारत के साथ अब कैसे होंगे बांग्लादेश के रिश्ते? तारिक रहमान ने बता दिया
भारत से रिश्ते फिर से पटरी पर लौटेंगे?
बीएनपी की जीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर बधाई दी। मोदी ने दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जिक्र किया और शांति व समृद्धि की प्रतिबद्धता दोहराई। बीएनपी ने भी मोदी के मैसेज का स्वागत किया और कहा कि वे भारत के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण रिश्ते चाहते हैं।
एक बीएनपी नेता ने उम्मीद जताई कि मोदी को तारिक की शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया जाएगा। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, भारत के खिलाफ रही है। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथी ताकतों के इशारे पर, भारत के चिकन नेक कहे जाने वाले सिलिगुड़ी कॉरिडोर को कमजोर करने के दावे कर चुके हैं।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या सोचते हैं तारिक रहमान?
शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में निर्वासित हैं। बांग्लादेश की अदालत ने नवंबर 2025 में उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई है। बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद ने फिर से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। तारिक रहमान ने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भ करेगा। बीएनपी सरकार प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत से हसीना को वापस मांगेगी। भारत, राजनीतिक शरणार्थी को कभी लौटाने का पक्षधर नहीं है।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में अगर तारिक रहमान PM बने तो भारत और हिंदुओं से कैसे होंगे रिश्ते?
तारिक रहमान कब लेंगे शपथ?
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान अगले हफ्ते प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बीएनपी ने भारी बहुमत हासिल किया है। यह चुनाव 2024 में छात्रों के आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला बड़ा चुनाव था। बीएनपी को 299 सीटों में से 209 सीटें मिलीं, जबकि उसके सहयोगियों को 3 और सीटें आईं।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में BNP को बहुमत, तारिक रहमान अगले PM? जमात का बुरा हाल
20 साल से विदेश में थे, सीधे प्रधानमंत्री बनने आए
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत पाकर 20 साल बाद सत्ता में वापसी की है। तारिक रहमान 17 साल के लंदन निर्वासन से दिसंबर 2025 में वापस लौटे थे। चुनाव में वोटिंग लगभग 59 प्रतिशत रही। अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोका गया था। शेख हसीना ने इसे नकली चुनाव बताया है।