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क्या जॉर्डन पर बड़ा हमला होने वाला है? अमेरिका की एडवाइजरी से हड़कंप

क्या ईरान जॉर्डन पर बड़ा हमले करने की तैयारी में है। क्या उसके बुनियादी ढांचे आईआरजीसी के निशाने पर हैं। जॉर्डन की राजधानी अम्मान स्थित अमेरिकी दूतावास की एडवाइजरी इसी तरफ इशारा कर रही है।

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जॉर्डन पर क्या बड़ा हमला होने वाला है? (Photo Credit: Google Maps)

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अमेरिका और ईरान के बीच जंग में जॉर्डन सबसे भयानक युद्धक्षेत्र बनकर उभरा है। पिछले पांच दिनों में यहां अमेरिका सेना पर ईरान ने चौथी बार हमला किया। शुक्रवार के हमले में दो सैनिकों की जान गई। एक सैनिक लापता है। वहीं इन हमलों में कई हेलीकॉप्टर क्षतिग्रस्त हैं और दर्जनों की तादाद में सैनिक घायल हैं। रविवार को जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास ने बताया कि एक विशिष्ट और विश्वसनीय खतरे के कारण अकाबा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और बंदरगाह को खाली करा लिया गया है।

 

एक्स पोस्ट में अमेरिकी दूतावास ने कहा, 'हम सभी अमेरिकियों को हवाई अड्डे या बंदरगाह की यात्रा करने से बचने की सलाह देते हैं। जॉर्डन के अधिकारियों के सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जारी रखें।' दूतावास ने सभी अमेरिकियों को जॉर्डन में सैन्य ठिकानों की यात्रा करने से भी बचने की सलाह दी। 

 

यह भी पढ़ें: अबकी अमेरिका सिर्फ दक्षिणी ईरान में ही बमबारी क्यों कर रहा, इसकी वजह क्या है?

 

पहले खबर आई कि जॉर्डन के अधिकारियों ने अकाबा एयरपोर्ट और बंदरगाह को खाली करवा लिया है। हालांकि बाद में खंडन किया और कहा कि कोई निकासी अभियान नहीं चलाया गया है। हालांकि ईरानी हमलों के बीच पूरे जॉर्डन में सायरन बज रहे हैं। जॉर्डन का अकाबा इजरायल के ईलात बंदरगाह के करीब है। 

 

जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर कितने हमले?

  • पहला हमला: किंग फैसल एयरबेस के आवासीय परिसर पर ईरान ने हमला किया। पांच अमेरिकी सैनिकों चोट आई।
  • दूसरा हमला: पूर्वी जॉर्डन के एक बेस को ईरान ने निशाना बनाया। यहां अमेरिका के काफी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों को नुकसान पहुंचा।
  • तीसरा हमला: मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर मिसाइल अटैक। 20 अमेरिकी सैनिक घायल हुए।
  • चौथा हमला: शुक्रवार को ईरान ने साल्टी लेक को दोबारा निशाना बनाया। दो अमेरिकी सैनिकों की मौत और एक घायल। चार अन्य सैनिक घायल।

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जॉर्डन को अधिक निशाना क्यों बना रहा ईरान?

इजरायल के करीब बसा जॉर्डन रणनीतिक लिहाज से अमेरिका के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिकी सेना के कई बेस हैं। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद कई खाड़ी देशों ने अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की क्षमता को सीमित कर दिया। इन देशों ने कहा कि ईरान के खिलाफ वह अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे।

 

इसके बाद अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से अपने सैनिकों और साजो-सामान को निकलकर जॉर्डन भेजा। ईरान के खिलाफ ताजा अभियान में जॉर्डन सबसे अहम केंद्र है। यही कारण है कि ईरान अब जॉर्डन को अधिक निशाना बना रहा है, ताकि खाड़ी के अन्य देशों को यह संदेश जा सके कि अमेरिकी सेना की मेजबानी करने की कीमत क्या होती है?

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