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अबकी ईरान पर कैसा हमला करेगा अमेरिका? ट्रंप की सेना ने बनाया घातक प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम चल रहा है। मगर यह किसी भी वक्त टूट सकता है, क्योंकि ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है। अब खबर है कि अमेरिकी सेना ने हमले की एक नई रणनीति बनाई है।

Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (AI-generated image)

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अमेरिकी सेना ईरान पर हमले का नया प्लान बना रही है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैडली कूपर गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप को नए प्लान की जानकारी देंगे। अगर मंजूरी मिली तो अमेरिकी सेना ईरान पर हमला करना शुरू कर देगी। एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सेंटकॉम ने ईरान पर शक्तिशाली और संक्षिप्त हमलों की योजना बनाई है। इन हमलों का मकसद बातचीत की मेच पर ईरान पर दबाव बनाना है।

इस्फान में दबा हो सकता है यूरेनियम

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी का मानना है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम इस्फान परमाणु प्लांट में ही दबा है। पिछले साल जून में अमेरिका ने यहां बमबारी की थी। इस साल भी इस्फान प्लांट को निशाना बनाया गया। यूरेनियम इसी प्लांट के अंदर दबा है। अब सेंटकॉम विशेष बलों के माध्यम से एक अभियान चलाना चाहता है, ताकि संवर्धित यूरेनियम को जब्त किया जा सके। हालांकि यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा होगा।

 

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कुछ हिस्सों पर कब्जे का प्लान

एक अन्य प्लान के मुताबिक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कुछ हिस्सों पर कब्जे की रणनीति रहा है। माना जा रहा है कि इसमें जमीनी सेना का इस्तेमाल किया जा सकता है और उसकी मदद से होर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए दोबारा खोला जाएगा। उधर, एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप कई देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाना चाहते हैं, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को स्वतंत्र तौर पर जारी रखा जा सके।

 

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अगर ईरान नहीं झुका तो क्या होगा?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप का मानना है कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाया जा सकता है। अगर इसके बावजूद ईरान नहीं झुकता है तो अमेरिका सैन्य विकल्प को चुनेगा। उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार को कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खाड़ी में रुकावट को और गहरा करेगी। समुद्री नाकाबंदी या प्रतिबंध लगाने का कोई भी प्रयास अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।


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