5 शहर, 3 करोड़ लोग; खामेनेई के जनाज़े पर ईरान को कौन सा डर सता रहा?
ईरान की राजधानी तेहरान से दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का सुपुर्द-ए-खाक कार्यक्रम शुरू हो चुका है। उम्मीद है कि करीब 3 करोड़ लोग समारोह का हिस्सा बनेंगे। पांच शहरों में जुलूस निकाला जाएगा।

छह दिनों तक चलेगा अली खामेनेई का अंतिम विदाई समारोह। (Photo Credit: Social Media)
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम विदाई का छह दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो चुका है। 9 जुलाई को उन्हें दफनाया जाएगा। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को इराक के कर्बला और नजफ समेत पांच शहरों में ले जाया जाएगा। उम्मीद है कि खामेनेई के जनाज़े में लगभग 3 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। दुनिया भर के नेता, अधिकारी और प्रमुख हस्तियां भी तेहरान पहुंच रही हैं।
ईरान की सरकार छह दिनों तक चलने वाले आयोजन से चिंतित भी है। उसे हमले और भगदड़ का डर सता रहा है। यही कारण है कि तेहरान के अलावा उन शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है, जहां से खामेनेई का जनाज़ा निकलना है। बासिज फोर्स को अलर्ट पर रखा गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती है।
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ईरान का तीसरा सबसे बड़ा कार्यक्रम
तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला में अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को रखा है, लेकिन ईरान की सरकार ने लोगों से मस्जिद में अधिक देर तक न रुकने की अपील की है, ताकि भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी और कासिम सुलेमानी के बाद यह ईरान के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा जनाज़ा कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि पिछले कार्यक्रमों से भी बड़ी भीड़ जुटेगी।
गलती दोहराना नहीं चाहता ईरान
उधर, कार्यक्रम आयोजन से पहले ही ईरान ने अभूतपूर्व सुरक्षा अभियान चलाया, ताकि साल 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी और हाल ही में 2020 में कासिम सुलेमानी के जनाज़े में हुई घटनाओं को दोहराया न जा सके। बता दें कि ईरान में अंतिम विदाई कार्यक्रमों में हादसों का पुराना इतिहास है।
भीड़ प्रबंधन पर सबसे अधिक फोकस
ईरान की सरकार का सबसे अधिक फोकस भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर है। अली खामेनेई का ताबूत पड़ोसी देश इराक भी जाएगा। वहां भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां है। यही कारण है कि हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीमा पार जुलूस के संबंध में इराकी अधिकारियों के साथ बगदाद में बैठक भी की।
जब जनाज़े में हुए हादसे
अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का जनाज़ा: तीन जून 1989 को मौजूदा इस्लामिक ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना था। उनका भी पार्थिव शरीर तेहरान के मोसल्ला में रखा गया। जब उनके पार्थिव शरीर को दफनाने की खातिर ले जाया जाने लगा तो उस वक्त लगभग 10 लाख लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
लोगों ने तबूत छूने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया तो भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। खुमैनी का ताबूत टूट गया। कफन फट गया। नतीजा यह हुआ कि हेलीकॉप्टर से शव को निकालना पड़ा। एक दिन सुपुर्द-ए-खाक को टालना पड़ा। भगदड़ में बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवाना पड़ा, लेकिन ईरान ने कभी वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं की।
जब सुलेमानी के जनाज़े में हुई भगदड़: अमेरिका ने 3 जनवरी 2020 को इराक के बगदाद एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी को मारा था। 1989 में खुमैनी के अंतिम यात्रा के बाद ईरान में सबसे बड़ा सुपुर्द-ए-खाक सुलेमानी का आयोजित किया गया। उनके शव को भी इराक और ईरान के कई शहरों में घूमाया गया। बाद में सुलेमानी के गृहनगर करमान ले जाया गया। यहां बैरियर गिरने से भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 56 लोगों की जान गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए।
ईरान को कितना बड़ा डर सता रहा?
गोपनीय दस्तावेज और तेहरान नगर पालिका के सूत्रों के हवाले जर्मन अखबार डाई वेल्ट ने बड़ा दावा किया। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरानी अधिकारियों ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह के दौरान 1,500 से 3,000 लोगों की मौत की आशंका जताई है। इससे निपटने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
मोजतबा की हत्या का भी डर
ईरान को यह भी डर सता रहा है कि अगर मोजतबा खामेनेई समारोह में शामिल होते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने समारोह में शामिल होने का अनुरोध किया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने इसे खारिज कर दिया है। उन्हें आशंका है कि इजरायल मोजतबा की हत्या कर सकता है या उनके गुप्त ठिकाने तक पहुंच सकता है।
खामेनेई का एक भी बेटा नहीं पहुंचा
शुक्रवार को राजधानी तेहरान में आयोजित कार्यक्रम में न तो मोजतबा खामेनेई पहुंचे और न ही तीन अन्य भाई। सिर्फ परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर मोजतबा के ससुर गुलाम-अली हद्दाद आदेल ही पहुंचे। उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान, कोम और मशहद में अली खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक में होने वाली नमाज की अगुवाई मोजतबा की जगह वरिष्ठ धर्मगुरु करेंगे।
37 साल के शासन का हुआ अंत
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को भीषण बमबारी में अली खामेनेई को निशाना बनाया था। करीब चार महीने बाद उनको सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। कहा जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से जनाज़े में देरी हुई है। 1939 में मशहद में जन्मे अली खामेनेई ने लगभग 37 वर्षों तक ईरान में शासन किया।
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कब-कहां पहुंचेगा अली खामेनेई का जुलूस?
तेहरान: अली खामेनेई का आखिरी विदाई समारोह 3 जुलाई से शुरू हो चुका है। तीन दिनों तक उनका पार्थिव शरीर राजधानी तेहरान में ही रखा जाएगा।
कोम: 6 जुलाई को तेहरान से एक जुलूस में उनका पार्थिव शरीर करीब 120 किमी दूर स्थित कोम शहर ले जाया जाएगा। अली खामेनेई ने कोम के ही मदरसे से अपनी पढ़ाई की थी। यह शिया मुसलमानों की विद्वत्ता का सबसे बड़ा केंद्र है। सात जुलाई तक खामेनेई का पार्थिव शरीर यहां रहेगा।
नजफ: आठ जुलाई को पार्थिव शरीर को इराक ले जाया जाएगा। नजफ इंटरनेशल एयपोर्ट पर एक समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद जुलूस नजफ शहर ले जाया जाएगा। बता दें कि इमाम अली का मकबरा नजफ में ही स्थित है।
कर्बला: यहां पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन और अब्बास शहीद हुए थे। यहीं पर ही इमाम हुसैन और उनके सौतेले भाई अब्बास के मकबरे हैं। यहां हर साल लाखों शिया मुस्लिम आते हैं। यह शिया इस्लाम की धार्मिक आस्था का सबसे बड़े केंद्र में से एक है।
मशहद: 9 जुलाई को अली खामेनेई की जन्मस्थली मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। मशहद को ईरान का सबसे पवित्र शहर माना जाता है। अली खामेनेई शुरुआती जीवन इसी शहर में बीता।
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