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होर्मुज समझौते के करीब ओमान-ईरान, इसमें क्या खास; इसकी सफलता ट्रंप पर क्यों टिकी

ओमान और ईरान के बीच होर्मुज समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में चल रही है। मगर इसकी सफलता काफी हद तक ट्रंप के अगले कदमों पर टिकी है।

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अंतिम चरण में होर्मुज समझौता। (Photo Credit: Google Maps)

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अगर सब सही रहा तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों का आवागमन जल्द ही शुरू हो सकता है। ओमान और ईरान समझौते के बेहद करीब हैं। जल्द ही समझौते का ऐलान भी हो सकता है। यह जलमार्ग बेहद अहम है। दुनिया का करीब 20 फीसद तेल और गैस यही से गुजरता है।

 

28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद था। 60 दिनों का सीजफायर हुआ, लेकिन अमेरिका ने इसे बीच में ही तोड़ दिया। दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई। कई देशों में ऊर्जा संकट गहराया। कच्चे तेल की कीमतें सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गईं। आइये समझते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा नया समझौता क्या है। इसमें क्या-क्या शामिल है और क्या ये टिक पाएगा?

 

सबसे पहले समझते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कहां पर स्थित है? अगर नक्शे पर नजर दौड़ाएंगे तो मध्य पूर्व में फारस की खाड़ी में एक बेहद संकरा रास्ता दिखेगा। इसके एक तरफ ईरान है, जबकि दूसरी तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात है। बंदर अब्बास के ठीक सामने स्थित संकरा जलमार्ग ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है।

 

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नए समुद्री गलियार पर फोकस

समझौते के तहत ईरान और ओमान एक नए वाणिज्यिक जहाजरानी गलियारे पर बातचीत करने में जुटे हैं। हाल ही में कुछ जहाजों ने ओमान के तट के किनारे से गुजरने की कोशिश की तो ईरान ने उन पर हमला किया। इसके बाद विवाद और गहरा गया था। ईरान का कहना था कि जहाज उसके ही निर्धारित रास्ते का पालन करे। हालांकि नए समझौते में दोनों देश एक नए जलमार्ग पर विचार कर रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बातचीत की पुष्टि की और बताया कि नए शिपिंग कॉरिडोर के तकनीकी, कानूनी, सुरक्षा और पर्यावरणीय पहलुओं पर वार्ता चल रही है।

नए समझौते में क्या है?

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने समझौते के बारे में कुछ अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेहरान और मस्कट के बीच यह समझौता हुआ है कि जलमार्ग का बड़ा हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरेगा। कुछ ही हिस्सा ओमान के जलक्षेत्र में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अस्थायी मार्ग बंद रहेंगे। नए शिपिंग मार्गों का इस्तेमाल दो से चार महीने या इससे अधिक समय तक किया जा सकता है। उधर, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यहां से गुजरने वाले जहाजों पर तेहरान का नियंत्रण होगा। इसके अलावा शुल्क लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। 

होर्मुज: ईरान का सबसे बड़ा हथियार

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका ने जब ईरान पर हमला किया तो अधिकांश लोगों का मानना था कि तेहरान कुछ दिनों ही ढह जाएगा। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने ईरान को अपनी ताकत दिखाने का मौका दिया। 

 

ईरान की सेना और आईआरजीसी ने इस अहम समु्द्री मार्ग को बंद कर अमेरिका को दो बार बातचीत के मेज पर लौटने पर विवश किया। ट्रंप ने होर्मुज को खुलवाने का खूब दबाव बनाया। ईरान की समुद्री नाकेबंदी की। बुशहर से चाबहार तक दो हफ्ते भीषण बमबारी की। लेकिन अमेरिका होर्मुज को खुलवा नहीं पाया। आज भी पूरी तरह से यहां ईरान का कंट्रोल है।  

सबसे बड़ा सवाल: क्या पूरी तरह से खुल जाएगा होर्मुज?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि समझौते होने के बाद क्या ट्रैफिक सामान्य हो जाएगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर करेगा। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका की आक्रामकता दिखाई, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी और ईरान के हितों को नुकसान पहुंचाया तो यह द्विपक्षीय समझौता भी खटाई में पड़ सकता है। मतलब साफ है कि ईरान किसी भी तरह से होर्मुज पर अपना नियंत्रण छोड़ना नहीं चाहता है।

 

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बातचीत में अमेरिका शामिल नहीं

होर्मुज समझौते की खास बात यह है कि पूरी बातचीत ओमान और ईरान के बीच चल रही है। इसमें सीधे तौर पर अमेरिका का कोई दखल नहीं है। अभी तक यह साफ नहीं है कि समझौता स्थायी है या अस्थायी। ईरान ने ओमान से कहा कि दोनों देशों के अपने-अपने जलक्षेत्र में स्ट्रेट का प्रबंधन करना चाहिए, ताकि नौवहन पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके। 

क्या ईरान के नियंत्रण को स्वीकारेगा अमेरिका?

अमेरिका शुरुआत से ही कहता आया है कि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण नहीं होगा। आवागमन स्वतंत्र होगा। उसने यह भी कहा कि ईरान को कोई शुल्क नहीं लगाने देंगे। अब खतरा यह है कि शुल्क लगाने और नियंत्रण नहीं छोड़ने पर अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। नौसैनिक नाकेबंदी बढ़ा सकता है। इससे स्थिति सुधारने की जगह और बिगड़ सकती है, क्योंकि ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाएगा तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा नहीं खुलेगा।

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