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ट्रंप ने बताया था जिहादी, अब अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर

अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट चुनाव में जीत दर्ज कर इतिहास बना दिया है। वह अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं।

abdul el sayed अब्दुल एल-सैयद

अब्दुल एल-सैयद, Photo Credit: Social Media

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अमेरिका में हुए 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है। इस चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पार्टी की हार हो रही है। इन चुनावों में अब्दुल अल-सैयद की चर्चा हो रही है और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर उन्होंने अमेरिकी राजनीति में इतिहास रच दिया। उन्होंने मिशिगन राज्य की सीनेट सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा दिया है और वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। इस जीत के बाद अब्दुल अल-सैयद ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर तंज कसते हुए कहा कि एक मजेदार विडंबना यह है कि संवैधानिक रूप से आप मुझे जनवरी में शपथ दिलाने के लिए बाध्य हैं। 

 

खास बात यह है कि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे माइक रोजर्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन हासिल था। इसके बावजूद अब्दुल ने उन्हें शिकस्त दे दी। उनकी जीत को अमेरिका की राजनीति में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब वह डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे, जो इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे थे। उनकी इस जीत की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। 

 

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क्यों है इतनी चर्चा?

अमेरिकी के इन चुनावों में ट्रंप की पार्टी लगातार पिछड़ती जा रही है लेकिन अब्दुल अल-सैयद से मिली हार उनकी पार्टी के लिए एक करारा झटका है। उनकी सीट एक हाई प्रोफाइल सीट थी और उनके खिलाफ खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रचार किया था। प्रचार के दौरान ट्रंप ने कहा था, 'यह हमारे लिए एक और अहम चुनाव है। हम नहीं चाहते कि कोई जिहादी (मुस्लिम) आए। सोचिए, उसे अपनी सीट पर बैठने के लिए मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ेगा।'

 

ट्रंप ने अपने भाषण में आगे उन पर तंज कसते हुए कहा था, 'हमारे पास 100 सीनेटर होंगे, जिनमें से ज्यादातर तो सीधे अंदर जा सकेंगे, लेकिन अब्दुल के लिए हमें एक खास मेटल डिटेक्टर मंगाना पड़ेगा।' उनके इस बयान के बाद सैयद और भी ज्यादा चर्चा में आ गए थे और अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर इस सीट पर टिक गई थी। 

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद ?

अब्दुल अल-सैयद का पूरा नाम अब्दुलरहमान मोहम्मद एल-सैयर है। उनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉयट इलाके में हुआ। उनके पिता मिस्र से आकर अमेरिका में बसे थे। अब्दुल ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से बायोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। वह रोड्स स्कॉलर भी रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले वह डॉक्टर, रिसर्चर और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। 

राजनीति में बनाई पहचान

अब्दुल ने साल 2015 में डेट्रॉयट शहर के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख के तौर पर काम शुरू किया था। उस समय वह अमेरिका के किसी बड़े शहर के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले सबसे कम उम्र के अधिकारियों में शामिल थे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने, स्कूलों में सीसे के जहरीले असर को रोकने और नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों को कम करने जैसे मुद्दों पर काम किया।

 

साल 2022 से 2025 तक उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग में भी अहम जिम्मेदारी संभाली। चुनाव के दौरान उन्होंने आम लोगों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और महंगाई से परेशान परिवारों को राहत देने का वादा किया। उनकी राजनीति को अमेरिकी राजनीति में प्रगतिशील विचारों वाली राजनीति के रूप में देखा जाता है।

 

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मुस्लिम होने के कारण विवाद

चुनाव प्रचार के दौरान अब्दुल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं ने उनके मुस्लिम होने और इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनके विचारों को लेकर निशाना साधा। ट्रंप ने उन्हें लेकर विवादित टिप्पणियां भी कीं। अब्दुल अमेरिका की ओर से इजरायल को दी जाने वाली सैन्य मदद बंद करने की वकालत करते रहे हैं। इस वजह से चुनाव में यह मुद्दा काफी गर्म रहा। अमेरिका में सीनेट के कुल 100 सदस्य होते हैं लेकिन अब तक इस सदन में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं पहुंचा था। 


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