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फ्रांस हो या इटली, पूरे यूरोप में एक जैसे प्रदर्शनों की वजह क्या है?

फ्रांस, इटली, पुर्तगाल और बेल्जियम की सरकारें भीषण विरोध प्रदर्शन की लहरों से जूझ रही हैं। खास बात यह है कि सभी देशों में प्रदर्शन की प्रकृति एक जैसी है।

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हिंसा की चपेट में फ्रांस। (Photo Credit: Social Media)

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यूरोप के कई देश हिंसा की चपेट में है। फ्रांस में सबसे अधिक हालात खराब हैं। इटली, बेल्जियम, यूनाइटेड किंगडम और पुर्तगाल में विरोध प्रदर्शन और हिंसा का दौर आरंभ हो गया। अल्बीनिया में प्रदर्शनकारी सब कुछ फूंकने पर तुले हैं। अधिकांश जगहों पर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत छात्रों से हुई। 

 

स्कूलों की जर्जर व्यवस्था और सुविधाओं की कमी से शुरू होने वाले ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई पर केंद्रित हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों की भीड़ बाजारों और दुकानों को लूट रही है। सरकारी इमारतों पर आगजनी कर रही है। पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमला कर रही है। आइये समझते हैं कि यूरोप के अलग-अलग देशों में हिंसक विरोध प्रदर्शन के पीछे की वजह क्या है?

 

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क्यों चल रहा फ्रांस?

फ्रांस में पिछले कुछ दिनों से छात्रों का आंदोलन जारी है। हिंसक विरोध प्रदर्शन के कारण फ्रांस की सरकार को सैकड़ों स्कूलों को बंद करना पड़ा। छात्रों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। इमारतें जर्जर हैं। भीषण गर्मी में भी एसी जैसी व्यवस्था नहीं है। बाद में महंगाई के मुद्दे पर कई संगठनों ने छात्रों का समर्थन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कब्जा कर लिया। सरकार का आरोप है कि हिंसक विरोध प्रदर्शन के पीछे लेफ्ट पर्टियां हैं।

 

पेरिस में सबसे अधिक तबाही: फ्रांस शनिवार को सबसे हिंसक विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। करीब साढ़े 5 लाख की भीड़ ने देश के अलग-अलग हिस्सों में भीषण उत्पात मचाया। आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ के दृश्य ने पूरे दुनिया को हैरत में डाल दिया। हिंसा की सबसे भयावह तस्वीरें राजधानी पेरिस से आईं। पेरिस के मेयर इमैनुअल ग्रेगोइरे के मुताबिक शहर के सभी सड़कें तबाह हो गई हैं। फ्रांस की पुलिस ने अभी तक 1200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि हिंसा की आग अभी थमी नहीं है। 150 से अधिक पुलिसकर्मियों को चोट आई है।

 

इन फ्रांसीसी शहरों में अराजकता: प्रदर्शनकारियों ने लिले और मार्सिले शहरों की नगरपालिकाओं में भीषण तोड़फोड़ की। लिमोज में 140 से ज्यादा पुराने टाउन हॉल को आग लगा दी। ल्योन में पर्यटन कार्यालय को तबाह कर दिया। राजधानी पेरिस के अलावा मार्सिले, नीस, नैनटेस, बोर्डो, लिमोज, लिले, टूलूज और स्ट्रासबर्ग समेत दर्जनों शहर हिंसा की भीषण चपेट में हैं।

यूरोप में हिंसक प्रदर्शन की वजह

  • स्कूलों की खस्ता हालत
  • बढ़ती महंगाई
  • महंगे आवास
  • सामाजिक असमानता
  • शिक्षकों की कमी
  • आवास संकट
  • कम वेतन

इटली में हिंसक प्रदर्शन क्यों?

फ्रांस की तरह ही इटली में हिंसक विरोध प्रदर्शन की आग मिलान तक पहुंच गई है। शनिवार को मिलान में प्रदर्शनकारियों ने भीषण उत्पात मचाया। पुलिस से झड़प के बाद कई स्थानों पर आगजनी की। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का आरोप है कि गुंडों ने प्रदर्शन की आड़ में अराजकता फैलाई है।

 

नकाबपोश दंगाइयों पर हिंसा भड़काने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शांतिपूर्ण मार्च आरंभ होने के बाद भीड़ में मौजूद नकाबपोश दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जवाब में पुलिस को पानी की बौछार करनी पड़ी और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। पुलिस ने 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। मिलान में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों पर आगजनी की। लूटपाट मचाई और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। इटली में विरोध प्रदर्शन की वजह मंहगाई और आवास संकट है।

पुर्तगाल में प्रदर्शन की वजह

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन भी विरोध प्रदर्शन की चपेट में है। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी देशभर के शहरों में सड़कों पर उतर चुके हैं। लोगों ने तंबू लगाकर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। फ्रांस और इटली की तरह यहां भी महंगाई और घरों की आसमान छूती कीमतों से जनता परेशान है। पुर्तगाल की जनता सरकार से महंगाई से निपटने और सस्ते आवास की मांग कर रही है। पोर्टो शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का अभियान चलाया। इसमें 37 से अधिक प्रदर्शनकारियों को चोट आई है।

दामाद से दंगे तक: क्यों चला अल्बानिया?

बाल्कन देश अल्बानिया की राजधानी तिराना के एक तटीय क्षेत्र में डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर एक लग्जरी होटल और रिसॉर्ट बनाना चाहते हैं। अल्बानिया की जनता पिछले कुछ महीनों से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ है। अल्बानिया में हिंसक विरोध प्रदर्शन का दौर यही से आरंभ हुआ। बाद में प्रदर्शनकारियों की मांगें बदल गईं। अब प्रदर्शनकारियों ने भारी भरकम शिक्षा शुल्क और विश्वविद्यालयों की खराब हालत को हथियार बनाया। प्रधानमंत्री एडी रामा का इस्तीफा भी मांगा।

 

शनिवार को पूरे अल्बानिया में हिंसा का सबसे भीषण रूप देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को आग लगा दी। आतिशबाजी से इमारतों और बाजारों को निशाना बनाया। पुलिस पर पथराव किया। पेट्रोल बम से सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाया। दंगाइयों ने डाकघर, बैंक और अदालतों को फूंक दिया। बढ़ती हिंसा के कारण पुलिस को रबर की गोलियां दागनी पड़ी।

 

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बेल्जियम में छात्र सड़क पर क्यों उतरे?

बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भी विरोध प्रदर्शन की वजह से हालात तनावपूर्ण हैं। ब्रुसेल्स और लीज में प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प हुई। सुरक्षाबलों को वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े। पुलिस का कहना है कि दंगाइयों ने उन पर पथराव किया और आतिशबाजी से हमला किया। बेल्जियम में छात्रों का यह आंदोलन विश्वविद्यालय पंजीकरण शुल्क के खिलाफ है। हालांकि हाई स्कूल छात्रों के प्रदर्शन पिछले कई हफ्तों से जारी हैं। उनका प्रदर्शन महंगी होती शिक्षा के खिलाफ है। फ्रांस में भी प्रदर्शन की शुरुआत ठीक ऐसे ही हुई।

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