दो साल में बांग्लादेश दोबारा सुलग उठा है। 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ कथित छात्रों का गुस्सा फूटा था। अबकी बार कपड़ा फैक्ट्रियों पर काम करने वाले मजदूर नाराज हैं। पूरे देशभर में आंदोलन की आग भड़क चुकी है। मजदूरों ने ढाका-नारायणगंज रोड जाम कर दिया। अलग-अलग स्थानों ने हिंसा और आगजनी की खबर आ रही है। एक मजदूर की जान भी गई। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल है। इनमें साफ दिख रहा है कि बांग्लादेश की पुलिस बेरहमी से मजदूरों को पीट रही है।
इस बीच राजधानी ढाका, गाजीपुर और नारायणगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की कुल 24 प्लाटूनों की तैनाती गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सावर और अशुलिया क्षेत्र में 200 से अधिक कपड़ा फैक्ट्रियों में छुट्टियां घोषित करनी पड़ी।
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गाजीपुर में हालात सबसे चिंताजनक हैं। प्रदर्शनकारियों ने यहां एक पुलिस बॉक्स को आग के हवाले कर दिया। ढाका-तंगैल हाईवे को जाम कर दिया। एक पिकअप वैन पर आग लगा दी। लाठी-डंडों से लैस मजदूरों ने कालियाकैर, कोनाबारी और चंद्रा समेत कई इलाकों में स्थित फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर बीजीबी की तैनाती की गई है।
नाराजगी की असली वजह: महंगाई बढ़ी, लेकिन वेतन नहीं
बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग साढ़े नौ हजार रुपये बनती है। 2023 में आखिरी बार न्यूनतम वेतन तय किया गया था। तत्कालीन शेख हसीना सरकार ने न्यूनतम मासिक वेतन को 8,000 टका से बढ़ाकर साढ़े 12 हजार टका किया था। पिछले तीन साल से मजदूरों के न्यूनतम वेतन में कोई इजाफा नहीं हुआ। इसके उलट 2023 में औसत वार्षिक महंगाई में करीब 9.88 फीसद का इजाफा हुआ। 2024 में यह बढ़कर लगभग 10.47 फीसद हो गई। 2026 में 8.34 फीसद महंगाई दर रिकॉर्ड की गई।
सरकार ने लगाया विदेशी साजिश का आरोप
उधर, बांग्लादेश की सरकार ने मजदूरों के आंदोलन के पीछे विदेशी साजिश का इशारा किया। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में मजदूरों का प्रदर्शन कोई असली आंदोलन नहीं है। यह आम मजदूरों का इस्तेमाल करके देश को अस्थिर करने की एक सोची-समझी सियासी साजिश है।
सख्ती से निपटेगी सरकार: गृह मंत्री
बांग्लादेश के गृह मंत्री ने कुछ औद्योगिक समूहों पर पूरे कपड़ा उद्योग में अस्थिरता पैदा करने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि बाहरी लोग तोड़फोड़ और आगजनी को अंजाम देने में जुटे हैं। सरकार इनके खिलाफ सख्ती से निपटेगी।
पड़ोसी देश पर भी आरोप
मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अवामी लीग सरकार में काम करने वाले कंपड़ा मालिक, पूर्व मंत्री, राज्य मंत्री और सांसदों का इसमें सीधा सियासी एजेंडा और भूमिका है। उन्होंने माफिया और रिएक्शनरी ग्रुप्स पर पड़ोसी देश से आने वाली साजिशों को लागू करने का आरोप लगाया, ताकि बांग्लादेश को अस्थिर किया जा सके। हालांकि मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है।
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क्यों आंदोलन करने पर उतरे मजदूर?
बांग्लादेश में प्रदर्शनरत कपड़ा मजदूरों की प्रमुख मांग कम से कम 30 हजार टका वेतन प्रतिमाह करने की है। इसके अलावा मजदूर पुलिस उत्पीड़न रोकने की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेश सरकार भी बिगड़ते हालात से वाकिफ है। बुधवार को मिनिमम वेज बोर्ड की पहली बैठक बुलई। इसमें तय किया गया कि नया वेज स्ट्रक्चर दिसंबर में लागू होगा और मजदूरों को अगले साल जनवरी से बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा।
कैसे तय होगा बढ़ा हुआ वेतन?
अगली बैठक में फैक्ट्री मालिक और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे अपना-अपना वेतन प्रस्ताव रखेंगे। एक तटस्थ सदस्य भी होगा। वह अपना प्रस्ताव पेश करेगा। इन सभी प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इसके बाद ही मजदूरों के न्यूनतम वेतन पर मुहर लगेगी।
विपक्ष किसके साथ?
शेख हसीना को अपदस्थ करने में अहम भूमिका निभाने वाले नेशनल सिटिजन पार्टी के मुखिया नाहिद इस्लाम ने भी कपड़ा मजदूरों का समर्थन किया। नाहिद ने कहा कि पुलिस को एक्शन नहीं, बल्कि बातचीत करनी चाहिए। तर्क दिया कि बढ़ती महंगाई में साढ़े 12 हजार टका प्रतिमाह वेतन पर्याप्त नहीं है। आगे कहा कि हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश में किसी और मजदूर का खून बहे। जमात-ए-इस्लामी के मुखिया और विपक्षी नेता शफीकुर रहमान ने भी मजदूरों का समर्थन किया। सरकार से मजदूरों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की।