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सऊदी अरब ने क्यों बंद की अपनी सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन, इसका क्या असर होगा?

सऊदी अरब ने अपनी सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया। इससे न केवल उसका तेल निर्यात प्रभावित होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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सऊदी अरब ने बंद की तेल पाइपलाइन। (Photo Credit: Social Media)

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सऊदी अरब ने अब्कैक तेल फील्ड से यानबू बंदरगाह तक अपनी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। यह फैसला रियाद और मदीना क्षेत्र में पाइपलाइन पर ड्रोन अटैक के बाद लिया गया। यह पाइपाइन 1200 किमी लंबी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने कारण सऊदी अरब ने इसी पाइपलाइन के माध्यम से अपना अधिकांश तेल का निर्यात किया।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों को इराक से अंजाम दिया गया। इराक की सरकार ने मामले की जांच का आदेश दिया है, लेकिन अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली। खबरों के मुताबिक पाइपलाइन के 100 किमी हिस्से पर बमबारी के बाद धुएं का गुबार उठते देखा गया है। हमलों में पाइपलाइन को चलाने वाले उपकरणों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसी कारण अस्थायी तौर पर पाइपलाइन को बंद किया गया है। 

 

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अब्कैक-यानबू पाइपलाइन का संचालन सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरामको करती है। पाइपलाइन के बंद होने से रियाद का तेल निर्यात भी रुक गया है। सऊदी अरब अब होर्मुज के आसपास के तेल को यानबू पोर्ट तक नहीं पहुंचा पाएगा। सऊदी अरब को अपने पश्चिमी तट से अधिक तेल निकालना पड़ेगा। मगर यहां चुनौतियां भी अधिक हैं, क्योंकि लाल सागर तट पर हूती विद्रोही काफी मजबूत हो चुके हैं।

बाजार से गायब हो जाएगा 5 फीसद तेल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब इस पाइपलाइन से रोजाना चार से पांच मिलियन बैरल तेल का परिवहन करता था। यह वैश्विक आपूर्ति का 4 से 5 फीसद है। इस पाइपलाइन के बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।

 

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दो मोर्चों पर घिरा सऊदी अरब

घरेलू मोर्चे के अलावा लाल सागर में भी सऊदी अरब की चुनौतियां बढ़ रही हैं। बाब अल-मंडेब में जलडमरूमध्य में हूती विद्रोही मजबूत हुए हैं। विद्रोहियों का कहना है कि सऊदी अरब के खिलाफ उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी। रियाद ने हूतियों के खिलाफ अमेरिका से मदद मांगी, लेकिन अमेरिका ने दखल देने से इनकार कर दिया। मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अब सऊदी अरब न केवल इराक और यमन के मोर्चे पर घिर गया, बल्कि अलग-थलग भी पड़ गया है। 


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