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त्साई छी और वांग यी कौन, दिल्ली पहुंचे जिनपिंग के करीबियों की चर्चा क्यों?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचे। उनके साथ वांग यी और त्साई छी भी नई दिल्ली में है। इन दोनों नेताओं की मीडिया पर खूब चर्चा है। आइये जानते हैं चीन के प्रशासनिक हलकों में इनका प्रभाव।

Xi Jinping

त्साई छी और वांग यी। (AI-generated image)

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सात साल के लंबे अंतराल के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। चीनी राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। इसमें प्रमुख कारोबारी और चीन सरकार के अधिकारी शामिल हैं। जिनपिंग के साथ दो और प्रभावशाली शख्सियतें भारत आए। चीन की सियासत और विदेश नीति में इनका खासा प्रभाव है। आइये इनके बारे में जानते हैं।

 

त्साई छी: त्साई छी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सबसे करीबी नेता माना जाता है। यही कारण है कि 70 साल की उम्र होने के बावजूद चीन की सियासत में उनका कद घटा नहीं। कम्युनिस्ट पार्टी के संगठन और प्रशासनिक व्यवस्था में त्साई छी मजबूत पकड़ है। शी जिनपिंग के सबसे करीबी विश्वासपात्रों में शामिल त्साई छी सीपीसी सेंट्रल पार्टी स्कूल और नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस के मुखिया भी हैं। उनके पास सीपीसी केंद्रीय समिति के जनरल कार्यालय के निदेशक की भी जिम्मेदारी है।

 

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शी जिनपिंग के दाहिना हाथ त्साई छी को चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली शख्स माना जाता है। हालांकि वह अक्सर पर्दे के पीछे से काम करते हैं। पिछले साल पीएम मोदी जब शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में शामिल होने तियानजिन पहुंचे थे। तब त्साई छी ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी। ट्रंप के चीन पहुंचने पर उनसे मिलने वाले पहले नेता भी त्साई छी थे। त्साई छी को शी जिनपिंग का असली चीफ ऑफ स्टाफ कहा जाता है। 2017 के बाद त्साई छी का करियर बुलंदियों पर पहुंचा। उन्होंने 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में जगह दी गई। 2022 में उन्होंने सात सदस्यी पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया गया। 

 

वांग यी: चीन की विदेश नीति में वांग यी का प्रभाव किसी से ढका-छुपा नहीं है। वांग यी चीन की बदली विदेश नीति का चेहरा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने एक लेख में वांग यी को शी जिनपिगं की वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रचारक बताया था। वे चीन के उन गिने चुने राजनयिकों में से एक हैं, जिन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में जगह मिली। वे चीन के सबसे लंबे समय तक विदेश मंत्री रहने वाले नेताओं में से एक हैं। उनके पास केंद्रीय विदेश आयोग के कार्यायल के निदेशक की भी जिम्मेदारी है। हाल ही में अजीत डोभाल ने चीन की यात्रा की थी। इसमें सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बीजिंग में डोभाल की मुलाकात विदेश मंत्री वांग यी से हुई थी। 

 

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क्या पटरी आने लगे भारत-चीन के रिश्ते?

पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार से अधिक चले सैन्य गधिरोध के बाद भारत और चीन के बीच रिश्ते 2024 से पटरी पर आने लगे। दोनों देशों ने पिछले दो वर्षों में कई बैठकों का आयोजन किया, ताकि रिश्तों में विश्वास बहाली लाई जाए सके। पीएम मोदी पिछले साल सात अगस्त को चीन की यात्रा की थी। यहां तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लिया था। अब सात साल बाद शी जिनपिंग भारत पहुंचे। यह दोनों देशों के बीच सुधरते रिश्तों का संकेत है।

 

 


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