अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ा जा रहा युद्ध भयानक रंग लेता जा रहा है। ईरान ने मध्य पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी बेसों पर भीषण तबाही मचाई है। इस बीच मंगलवार को अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल मिनटमैन III का परीक्षण किया है।
1970 के दशक में पहली बार इस मिसाइल की टेस्टिंग शुरू की गई थी। इन मिसाइलों को मजबूत साइलों में रखा जाता है। इसके अलावा इन्हें केबलों के माध्यम से भूमिगत प्रक्षेपण नियंत्रण केंद्र से जोड़ा जाता है। यह मिसाइल अमेरिकी सेना को ग्लोबल स्ट्राइक की क्षमता प्रदान करती है। इन मिसाइलों का निर्माण बोइंग कंपनी करती है। ठोस ईंधन से चलने वाली मिनुटमैन III मिसाइलें 13,000 किलोमीटर तक परमाणु बम ले जा सकती हैं।
यह भी पढ़ें: 'ईरानी जहाज को डुबो दिया, फिर भी PM मोदी ने कुछ नहीं कहा', राहुल गांधी का निशाना
हवा, जमीन और समुद्र से दागी जा सकती
मिनटमैन III मिसाइल को 'डूम्सडे मिसाइल' भी कहा जाता है। यह मिसाइल 1945 में हिरोशिमा पर इस्तेमाल किए गए परमाणु बमों से 20 गुना अधिक शक्तिशाली परमाणु बम ले जा सकती है। मिनटमैन IlI मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा से हमला करने में सक्षम हैं। अमेरिका ने इस मिसाइल को इस तरह से डिजाइन किया है कि अगर किसी ने उस पर परमाणु हमला किया तो यह उसका जवाब देगी।
क्या अमेरिका कर रहा परमाणु परीक्षण?
परीक्षण के बाद अमेरिकी स्पेस फोर्स ने बताया कि बिना हथियार का रॉकेट (GT 254) पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल आइलैंड्स के पास अपने लक्ष्य पर लगा। एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने बताया कि मिसाइल परीक्षण इसलिए किया गया है, ताकि उसके प्रभाव और सटीकता की जांच की जा सके।
यह भी पढ़ें: यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की कनाडा में हत्या, खालिस्तान का विरोध बना वजह?
कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और पाकिस्तान समेत तमाम देशों पर गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण का आरोप लगाया था। उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका को भी परीक्षण शुरू करने चाहिए। ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका के एरिया 51 के पास स्थित सैन्य अड्डे पर 100 से अधिक रहस्यमय भूकंपों के झटके महसूस किए गए। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इसकी वजह क्या है।