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ट्रंप गुस्सा, भारी दबाव; तब भी लेबनान से पीछे क्यों नहीं हटना चाहता इजरायल?

ईरान और अमेरिका वार्ता का अंतिम परिणाम क्या होगा, इजरायल के कदम पर निर्भर है। अगर इजरायल ने लेबनान में अपने हमलों को नहीं रोका तो समझौता खटाई में पड़ सकता है। इसलिए अमेरिका तेल अवीव पर दबाव बनाने में जुटा है।

Benjamin Netanyahu and Donald Trump

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप। (AI-generated image)

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अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौता हो गया है। अगले 60 दिनों में स्थायी युद्धविराम का लक्ष्य है। स्विट्जरलैंड में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच नई दौर की वार्ता शुरू हो चुकी है, लेकिन यह समझौता अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचेगा या नहीं, यह काफी हद तक इजरायल पर निर्भर करेगा। 

 

समझौता ज्ञापन के मुताबिक लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को रोकना होगा। इजरायल सेना को लेबनान से वापस आना होगा। इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सेना लेबनान से नहीं लौटेगी, जबिक डोनाल्ड ट्रंप उस पर दबाव बनाने में जुटे हैं। आइये समझते हैं कि इजरायल अपनी सेना को लेबनान से वापस नहीं बुलाने पर क्यों अड़ा है?

 

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लेबनान में इजरायल क्या कर रहा है?

समझौता होने के बाद भी इजरायली सेना लेबनान में भीषण बमबारी कर रही है। शुक्रवार को सबसे अधिक 150 स्थानों पर हमला किया था। 47 लोगों की जान गई थी। शनिवार को इजरायली हमले में 32 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इजरायली हमलों के बाद ईरान ने दोबारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया।  

पेंच कहां फंसा है?

हिजबुल्लाह और लेबनान की सरकार ने इजरायली सैनिकों की वापसी की मांग की। लेबनान सरकार चाहती है कि इजरायल के साथ सीधी वार्ता और उसके तहत सैनिकों की वापसी पर सहमति बने। जबकि हिजबुल्लाह की मंशा कुछ और है। वह चाहता है कि लेबनान मामले को भी ईरान के साथ होने वाली डील का हिस्सा मान जाए। नतीजा यह होगा कि अगर इजरायल लेबनान में अपने हमले नहीं रोकता है तो ईरान के पास डील को तोड़ने का विकल्प होगा।

अमेरिका क्या चाहता है?

डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि इजरायल लेबनान में अपने हमलों को कम करें, ताकि स्थायी युद्धविराम का रास्ता साफ हो सके। ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा था कि लेबनान और हिजबुल्लाह के साथ इजरायल के बर्ताव से खुश नहीं हैं। उन्हें यह काम तेजी से कर लेना चाहिए था। यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा। 

 

फ्रांस में भी जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था, 'इजरायल हिजबुल्लाह से बहुत लंबे समय से लड़ रहा है। बहुत से लोग मारे जा रहे हैं। किसी की तलाश में हर बार अपार्टमेंट बिल्डिंग गिराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन अपार्टमेंट में बहुत से लोग रहते हैं और वे सभी हिजबुल्लाह के सदस्य नहीं होते।'

लेबनान से पीछे क्यों नहीं हटना चाहता इजरायल?

अमेरिका के भारी दबाव और लाख कोशिशों की बावजूद इजरायल अपनी सेना को लेबनान से वापस नहीं बुलाने पर अड़ा है। इजरायल के मंत्री साफ कह चुके है कि अगर अमेरिका नाराज होता है तो हो, लेकिन सेना को वापस नहीं बुलाया जाएगा।

 

समझौते के तुरंत बाद इजरायली सेना ने एक नक्शा जारी किया। इससें बताया कि उसका कहां तक नियंत्रण हो चुका है। इजरायल लेबनान की इस कब्जे वाली भूमि को बफर जोन के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि इजरायल पर होने वाले हमलों को यही से निष्क्रिय किया जा सके। इजरायल यह भी नहीं चाहता है कि उसने लंबे संघर्ष के बाद जो जमीन हासिल की, उसे इतनी आसानी से दे दिया जाए। 

 

लेबनानी जमीन पर कब्जा ग्रेटर इजरायल के ख्वाब के अनुरूप भी है। इजरायल की मंशा लिटानी नदी के दक्षिण में स्थित पूरे भूभाग पर कब्जा करने और हिजबुल्लाह के नदी के उस पार धकेलने की है, ताकि इजरायल को होने वाले खतरे को कम किया जा सके।  

 

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कौन सा मॉडल अपनाना इजरायल? 

इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज के बयान से साफ होता है कि लेबनान की कब्जे वाली जमीन को इजरायल कैसे इस्तेमाल करना चाहता है? काट्ज ने कहा लेबनान में जिस मॉडल का अनुसरण किया जा रहा है, यह वही मॉडल है जिसका उपयोग आईडीएफ ने गाजा में राफा और बेत हनुन में किया था। शहरों को ध्वस्त करना और लोगों को बाहर निकालना, ताकि एक रक्षात्मक क्षेत्र की स्थापना की जा सके और इजरायली सीमावर्ती लोगों से खतरों को दूर किया जा सके।

इजरायल और हिजबुल्लाह में कब से जारी है जंग? 

हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जंग 8 अक्टूबर 2023 से जारी है। 2024 में इजरायल ने सबसे भीषण सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि बाद में अमेरिका के दखल पर युद्धविराम हो गया था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। 2 मार्च को खबर आई कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई इजरायली हमले में मारे जा चुके हैं। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट, ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। ताजा संघर्ष में लेबनान में इजरायली हमलों में 4057 लोगों की जान गई। 12,121 से अधिक लोग घायल हुए। दर्जनों गांव तबाह हो चुके हैं।


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