इजरायल के सियासी दलों ने विदेशी ताकतों पर चुनाव को प्रभावत करने का आरोप लगाया है। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन जस्टिस नोआम सोहलबर्ग ने शिन बेट को विदेशी हस्तक्षेप की जांच करने का आदेश दिया है। सबसे अधिक शक कतर पर गहरा रहा है। इजरायली मीडिया और सियासी दलों का आरोप है कि कतर ने अरब वोट को प्रभावित करने की नीयत से भारी भरकम फंड इजरायल भेजा। हालांकि कतर की सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उधर, चुनाव पैनल के डायरेक्टर का कहना है कि बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के दावे बेबुनियाद लगते हैं।
नेतन्याहू और उनके गठबंधन ने आरोप लगाया कि चुनाव को चुराया गया है। वहीं विपक्षी दलों ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की। हालांकि यह भी कहा कि अभी यह सिर्फ शक है। जब तक शक साबित नहीं हो जाते है तब तक नतीजों को प्रभावित करने का कोई प्रयास न किया जाए।
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इजरायली मीडिया के मुताबिक शिन बेट कई दिनों से पूरे मामले में निगाह रख रही थी। शक है कि कतर ने गैर-कानूनी तरीके से फंडिंग के माध्यम से अरब वोटर्स को एकजुट करने का प्रयास किया है। इजरायल के चैनल 12 ने दावा किया गया कि जिन चैनलों से पैसा भेजा गया है, वह पहले आतंकवादियों को भेजे जाने वाले रास्ते से काफी मिलता-जुलता है।
क्या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ?
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब पार्टियों पर चुनाव को चुराने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि गैर-कानूनी वोटर मोबिलाइजेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। वहीं चुनाव वाले दिन Ra'am पार्टी के दिन कार्यकर्ताओं को पैसा बांटने के आरोप में पकड़े जाने का भी उल्लेख किया। लिकुड पार्टी का कहना है कि चुनाव में विदेशी दखल दिया गया। पार्टी ने पूरी जांच की मांग की। गुरुवार को भी रा'आम पार्टी के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपों पर कतर क्या बोला?
इजरायल के आरोपों पर कतर के विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया। चुनाव में दखल देने और नतीजों को प्रभावित करने के लिए फंडिंग से जुड़े आरोपों का खंडन किया। कतर ने कहा कि पहले उन्होंने कतर पर नेतन्याहू को खरीदने का आरोप लगाया, फिर इजरायली वामपंथियों को और अब अरब वोटों को खरीदने का। अगर ये दावे सच होते तो जाहिर है कि पूरा इजरायल ही कतर का होता।
साजिश की आड़ में गड़बड़ न करें: विपक्षी नेता
विपक्षी नेता आइजेनकोट ने चेतावनी दी कि विदेशी साजिश की आड़ में कोई सियासी फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने हेरफेर से बचाने के लिए पूरी ताकत लगाने की बात कही। बी'याचद नंबर 2 याइर लैपिड से मुलाकात के कुछ देर बाद ही आइजेनकोट ने डेमोक्रेट्स के चेयरमैन याइर गोलान से मुलाकात की। इन मुलाकातों को सरकार गठन की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष याइर गोलान ने चुनाव की निष्पक्षता की जांच की मांग की। यह भी आरोप लगाया कि कतर और नेतन्याहू के कार्यालय के संबंध हैं। गोलान का कहना है कि नेतन्याहू चुनाव रिजल्ट को संदेह के घेरे में लाने और अरब वोटर्स की वैधता पर सवाल उठाने की खातिर ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
इजरायल का सियासी समीकरण क्या कह रहा?
बेंजामिन नेतन्याहू गुट: इस समूह में लिकुड, शास, यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म, ओत्ज़मा यहूदी और रिलीजियस जायोनिज़्म पार्टियां शामिल हैं। अभी तक इस गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। यह बहुमत के आंकड़ा 61 से आठ कम है।
आइजेनकोट गुट: इस समूह में याशर, बी'याचद, डेमोक्रेट्स और यिसराइल बेयतेनु जैसी पार्टियां शामिल हैं। गुट को कुल 48 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि यह बहुमत से 13 कम है। गादी आइजेनकोट याशर पार्टी के अध्यक्ष हैं। 21 सीटों के साथ उनकी पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी हो सकती है। हालांकि तमाम एग्जिट पोल्स में आइजेनकोट की पार्टी को बढ़त मिलते दिखाया गया था।
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इजरायल के चुनाव में कौन किंगमेकर?
नफ़्ताली बेनेट की बी'याचद पार्टी और यूसुफ जबरीन की जॉइंट लिस्ट को 12-11 सीटें मिल सकती हैं। वित्त मंत्री मिनिस्टर बेजलेल स्मोट्रिच की रिलीजियस जायोनिज्म पार्टी को छह सीटें मिलने का अनुमान है। इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू गुट में शामिल यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म पार्टी गादी आइजेनकोट की सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। उन्होंने इस्लामिक रा'आम पार्टी से गठबंधन लेने की छूट रहेगी।
इजरायल के चुनाव में अरब पर्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं। रा'आम को 8 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिलती दिख रही हैं। इन दोनों अरब पर्टियों को कुल 19 सीटें मिलने का अनुमान है। 2020 में अरब पर्टियों को 15 सीटों से अधिक पर जीत मिली थी। इजरायल की जायोनिस्ट पार्टियों ने अरब दलों के साथ सहयोग करने से मना कर दिया है। इस स्थिति में किसी भी गुट के पास बहुमत नहीं है।