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जर्मन चांसलर ने ऐसा क्या कहा, जिससे ट्रंप खफा; सैनिकों की वापसी तक पहुंची बात

डोनाल्ड ट्रंप अभी तक फ्रांस के राष्ट्रपति से बेहद खफा था। उससे पहले ब्रिटिश पीएम स्टार्मर की भी आलोचना कर चुके हैं। अबकी बार उनकी नाराजगी जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स के प्रति सामने आई है। आइये समझते हैं पूरा मामला।

Donald Trump and Friedrich Merz.

डोनाल्ड ट्रंप और फ्रेडरिक मर्त्स। (AI-generated image)

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स के बीच मतभेद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर मर्त्स की न केवल आलोचना की, बल्कि उन्हें अपने देश पर अधिक ध्यान देने की नसीहत तक दे डाली। 27 अप्रैल को जर्मनी के चांसलर ने एक ऐसा बयान दिया। माना जा रहा है कि यह बयान ट्रंप को पसंद नहीं आया है। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ा है। हालांकि ट्रंप की तुलना में मर्त्स ने अधिक संयम भरा रुख अपनाया। बुधवार को जब उनसे ट्रंप के बारे में पूछा गया तो मर्त्स ने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति और मेरे बीच व्यक्तिगत संबंध पहले की तरह ही अच्छे बने हैं।'

 

डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्च पर निशाना साधा। उन्होने कहा कि उन्हें (मर्त्स) अपने टूटे हुए देश को ठीक करने और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर फोकस करना चाहिए। वह ईरान में दखल देखने में कम समय खर्च करें। दूसरी तरफ जर्मनी के अधिकारी ट्रंप के साथ विवाद को कम करने की कोशिश में जुटे हैं। मगर ट्रंप प्रशासन जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर विचार कर रहा है। न केवल जर्मनी, बल्कि यूरोप के अन्य देश से भी अमेरिका सैनिकों की वापसी हो सकती है।

 

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ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन मांगा था। मगर किसी भी देश ने उनका साथ नहीं दिया। इससे ट्रंप बेहद खफा है। अब वह यूरोपीय देशों में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती कम करने पर विचार कर रहे हैं। गुरुवार को ही ट्रंप ने कहा कि वह यूरोप में स्थित अन्य सैन्य अड्डों से भी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर सकते हैं।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह स्पेन और इटली से भी सैनिकों को बुलाने पर मंथन करने में जुटे हैं। जब उनसे इससे जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा क्यों न करूं? इटली ने हमारी कोई मदद नहीं की। स्पेन का व्यवहार बेहद खराब था। जब अमेरिका को उनकी जरूरत थी, तब वह नहीं आए। ट्रंप ने आगे कहा कि असल में ईरान मामले में अमेरिका को किसी प्रकार की सहायता की जरूरत नहीं थी।

सेना हटाने तक पहुंची बात

जर्मनी में अभी 36,000 से ज्यादा सक्रिय अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह यूरोप में अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी तैनाती है। गुरुवार रात डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, अमेरिका जर्मनी में सैनिकों की संभावित कटौती का अध्ययन और समीक्षा कर रहा है। इस संबंध में अगले कुछ समय में निर्णय लिया जाएगा।'

जर्मनी से क्यों नाराज हैं ट्रंप?

27 अप्रैल को छात्रों से बातचीत में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स ने बयान दिया कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है। मर्त्स ने कहा, 'ईरानी स्पष्ट रूप से बातचीत करने में बहुत कुशल हैं या यूं कहें कि बातचीत न करने में बहुत कुशल हैं। वह अमेरिकियों को इस्लामाबाद आने देते हैं और बिना किसी नतीजे के वापस चले जाते हैं। ईरानी नेतृत्व खासकर तथाकथित क्रांतिकारी बल पूरे देश (अमेरिका) को अपमानित रहा है। उम्मीद है कि यह सब जल्द से जल्द खत्म हो जाएगा।'

 

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ट्रंप ने कैसे जाहिर किया अपना गुस्सा?

चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स के बयान ने ट्रंप को बेहद नाराज कर दिया। अगले दिन यानी 28 अप्रैल को ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर जर्मन और मर्त्स दोनों की आलोचना की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स को लगता है कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होना ठीक है। उन्हें पता ही नहीं कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं! अगर ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होता तो पूरी दुनिया बंधक बन जाती। मैं अभी ईरान के साथ कुछ ऐसा कर रहा हूं, जो दूसरे देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले ही कर देना चाहिए था। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि जर्मनी की हालत इतनी खराब है, आर्थिक रूप से भी और दूसरे मामलों में भी। 


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