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नवी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार, इजरायल विरोध में क्यों उतरा?

रंगभेद के खिलाफ काम करने वाले लोगों को कानूनी मदद देने वाली भारतीय मूल की नवी पिल्लई को मिले शांति के नोबेल पुरस्कार का इजरायल ने खुलकर विरोध किया।

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नोबेल पुरस्कार विजेता नवी पिल्लई। (Photo Credit: ICC)

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भारतीय मूल की तमिल न्यायविद नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वीडिश अकादमी के फैसले का इजरायल ने खुलकर विरोध किया। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में नवी पिल्लई को इजरायल के खिलाफ झूठ और नफरत फैलाने का आरोप लगाया। यहां तक कि उन्हें कट्टरपंथी महिला करार दिया। 

 

दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल के खिलाफ मानवसंहार के आरोप में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया। नवी पिल्लई दक्षिण अफ्रीफा में पली-बढ़ीं। उन्होंने इजरायल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समर्थित तीन सदस्यीय पैनल की अगुवाई की। उनकी ही कमेटी ने दुनिया को बताया कि इजरायल ने गाजा में मानवसंहार को अंजाम दिया था। 

 

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संयुक्त राष्ट्र ने 22 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया कि इजरायल बच्चों को सीधा निशाना बना रहा है। मानवीय सहायता को प्रतिबंधित करने से भुखमरी फैली। स्वास्थ्य व्यवस्था को एक व्यवस्थित तरीके से तबाह किया गया। पिल्लई की अगुवाई वाले पैनल ने पहली बार इजरायल को मानवसंहार का दोषी ठहराया। 

 

 

 

 

7 अक्टूबर को इजरायल पर हमले की बरसी के ठीक दो दिन बाद नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने की टाइमिंग ने इजरायल को भड़का दिया है। नवी पिल्लई के आयोग ने हमास के साथ युद्ध से पहले इजरायल पर गाजा और पूर्वी यरुशलम को कब्जे में लेने का आरोप लगाया था। बाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी इजरायल के कब्जे को गैर-कानूनी बताया।

कट्टरपंथी महिला को मिला नोबेल: इजरायल

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में कहा, 'नोबेल पुरस्कार समिति ने अपनी नैतिक समझ खो दी है। उसने अपना सबसे बड़ा सम्मान एक ऐसी कट्टरपंथी महिला को दिया है, जिसने एकमात्र यहूदी देश के खिलाफ झूठे और नफरत भरे आरोप गढ़ने और उन्हें फैलाने के दम पर अपना करियर बनाया।'

 

इजरायली पीएमओ ने आगे कहा, 'नवी पिल्ले की सबसे बड़ी उपलब्धि एक भ्रष्ट सरकारी वकील को सही ठहराना था। यह वकील इजरायल के खिलाफ पिल्लई के मनगढ़ंत आरोपों का इस्तेमाल करने लगा था, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि पिल्लई की कट्टरपंथी और भीड़-तंत्र वाली सोच का हिस्सा बनकर वह खुद पर लगे रेप के आरोप से बच जाएगा।'

 

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'न्याय का मजाक उड़ाया गया'

नेतन्याहू के दफ्तर ने आगे लिखा, 'करीम खान पर आईसीसी के ही कर्मचारियों ने रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उसने इजरायल के खिलाफ झूठा केस बनाने के लिए पिल्लई के झूठ का सहारा लिया। पिल्लई ने झूठ फैलाया। खान ने उन्हें हथियार बनाया। अब नोबेल समिति के गुमराह सदस्य उस महिला को सम्मानित कर रहे हैं, जिसने यहूदियों को बुरा-भला दिखाने और न्याय का मजाक उड़ाने का काम किया।'

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