logo

ट्रेंडिंग:

जंग के मुहाने पर इथियोपिया और इरिट्रिया, इजरायल, UAE और सऊदी के कौन से हित जुड़े

इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच तल्ख बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो चुका है। दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटे हैं। वहीं इथियोपिया की सेना भी उत्तर की तरफ बढ़ने लगी है।

Ethiopia and Eritrea

इथियोपियाई सेना। ( Photo Credit: Social Media)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी का माहौल है। इस बीच दो अफ्रीकी देशों के मध्य जंग जैसे हालत बनने लगे हैं। इथियोपिया के टिग्रे शहर में दोबारा संघर्ष छिड़ने की आशंका जताई जा रहा है। इथियोपिया ने इरिट्रियाई सैनिकों पर जमीन कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्हें अपने शेरारो और गुलोमाकाडा जैसे शहरों से तुरंत लौटने का आदेश दिया। 

 

इथियोपिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि इरिट्रिया हॉर्न ऑफ अफ्रीका में विद्रोहियों लड़ाकों को हथियार मुहैया करा रहा है। जवाब में इरिट्रिया ने इथियोपिया पर आक्रमण करने का आरोप लगाया। पिछले कई हफ्तों से दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी से युद्ध के संकेत मिलते हैं। अगर युद्ध छिड़ा तो इस बार भी टिग्रे इसका सबसे बड़ा केंद्र होगा।

 

यह भी पढ़ें: भारत ने तेल खरीदना बंद किया! रूस को नहीं हो रहा भरोसा; मॉस्को ने क्या कहा?

 

इरिट्रिया और इथियोपिया के बीच दुश्मनी दशकों पुरानी है। दोनों देशों ने 1998 से 2000 तक जंग लड़ी। करीब 18 साल बाद 2018 में शांति समझौता किया। दो साल बाद ही टिग्रे शहर में गृह युद्ध भी छिड़ गया। यहां इथियोपिया और इरिट्रिया की सेना ने मिलकर टिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) के विरुद्ध जंग लड़ी।

 

2022 में दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता हुआ। 2020 के नवंबर महीने में इरिट्रियाई सैनिकों ने टिग्रे में एक दिन में सबसे भीषण नरसंहार किया था। हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने समय-समय पर इस दावे को खारिज किया, लेकिन अब इथियोपिया खुलकर कह रहा है कि टिग्रे में इरिट्रिया के सैनिकों ने नागरिकों का नरसंहार किया था।

इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच तनातनी क्यों?

बयानबाजी: 8 फरवरी को इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन टिमोथियोस ने इरिट्रिया पर सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया। दावा किया कि पड़ोसी देश की सेना उनकी जमीन पर कब्जा कर रही है। 9 फरवरी को इरिट्रिया के सूचना मंत्रालय ने दावों का खंडन किया। फरवरी में पहली बार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने इरिट्रियाई सैनिकों पर ट्रिग्रे युद्ध के वक्त सामूहिक हत्या का आरोप जड़ा। 

 

समुद्र तक पहुंच: इथियोपिया एक जमीन से घिरा देश है। उसकी कोई सीमा समुद्र से नहीं लगती है। इथियोपिया हर हाल में लाल सागर तक पहुंच पाना जाता है। इरिट्रिया की सीमा लाल सागर से लगती है। पिछले साल इथियोपिया को प्रधानमंत्री ने समुद्र तक पहुंच को अस्तित्व का मुद्दा बताया था। यही कारण है कि इरिट्रिया ने इथियोपिया पर आक्रमण करने का आरोप लगाया। उसका कहना है कि इथियोपिया युद्ध से लाल सागर तट पर स्थित अस्सैब बंदरगाह को वापस पाना चाहता है। बता दें कि 1993 में इथियोपिया से अलग होने के बाद यह बंदरगाह इरिट्रिया के हिस्से में आ गया था।

 

सोमालीलैंड: हाल ही में इजरायल ने सोमालीलैंड को मान्यता दी है। माना जा रहा है कि इथियोपिया भी जल्द सोमालीलैंड को देश के तौर पर मान्यता दे सकता है। अगर उसने ऐसा किया तो बदले में उसे लाल सागर तक पहुंच मिल सकेगी। इस मामले में अंदरखाने उसे इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन मिल रहा है। जबकि तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब सोमालिया के समर्थन है। अब यही देश इथियोपियो के खिलाफ इरिट्रिया का समर्थन करने में जुटे हैं।

 

सूडान एंगल: सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के गृह यु्द्ध चल रहा है। सऊदी अरब सूडान की सेना के साथ खड़ा है। वहीं आरएसएफ को संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन मिला है। सूडान की सीमा इथियोपिया से लगती है। हाल ही में सैटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ है कि इथियोपिया ने सूडान सीमा के करीब एक ट्रेनिंग कैंप बनाया है। यहां आरएसएफ लड़ाकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसकी फंडिंग यूएई कर रहा है। 

 

लाल सागर पर कब्जे की होड़: हॉर्न ऑफ अफ्रीका में असल जंग कब्जे की है। हर कोई लाल सागर पर अपना प्रभुत्व चाहता है। तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र खुलकर सोमालिया और इरिट्रिया का समर्थन इसलिए कर रहे हैं ताकि यहां उनका दबदबा बना रहे। सऊदी अरब की पूरी दक्षिणी सीमा लाल सागर से जुड़ी है। उसके ठीक सामने सोमालिया और इरिट्रिया पड़ते हैं। ऐसे में सऊदी अरब दूसरे छोर पर भी अपना दबदबा जमाना चाह रहा, ताकि उसे किसी चुनौतियों का सामना न करना पड़ा।

 

यह भी पढ़ें: क्या है डीकपलिंग? जिसकी मदद से चीन ने अपना परमाणु परीक्षण छिपाया

 

संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल बेहद करीबी है। उनका मानना है कि यहां तुर्की और सऊदी अरब का दबदबा उनके हित में नहीं होगा। इस वजह से दोनों देश सोमालीलैंड का समर्थन करते हैं। यमन में यूएई ने एसटीसी का समर्थन किया, ताकि लाल सागर से लगने वाली यमन की सीमा और दूसरी तरफ सोमालीलैंड पर दबदबा बना रहे। अगर इथियोपिया इरिट्रिया के बंदरगाह पर कब्जा कर लेता है तो सोमालीलैंड से इरिट्रिया तक संयुक्त अरब अमीरात और यूएई का प्रभुत्व होगा।

 

 

Related Topic:#International News

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap