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सोमालिया में तुर्की ने ऐसा क्या किया, युगांडा भिड़ने पर उतर आया; विवाद की कहानी

युगांडा और तुर्की के रिश्ते काफी बिगड़ चुके हैं। कंपाला ने तमाम सैन्य समझौतों को निलंबित कर दिया है। आने वाले दिनों में कई और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। आइये जानते हैं कि विवाद की असल वजह क्या है?

Turkey Uganda Relations

युगांडा और तुर्की में तनाव। (AI-generated image)

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सोमालिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य मौजूदगी की वजह से युगांडा और अंकारा के रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। 20 सितंबर को युगांडा पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (UPDF) तुर्की के साथ अपने सभी तरह के सैन्य सहयोग को सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य समझौतों को तोड़ने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह तनाव अफ्रीका-यूरोप के बीच आर्थिक तनाव की वजह बन सकता है। 

 

युगांडा की सरकार 3 अरब डॉलर के रेलवे अनुबंध को तोड़ने पर भी विचार कर रही है। इसका ठेका तुर्की की कंपनी यापी मेर्केजी को मिला है। इसके अलावा तुर्की के नागरिकों को युगांडा से निष्कासित करने पर भी विचार चल रहा है। आइये समझते हैं कि विवाद की वजह क्या है, युगांडा इतना नाराज क्यों? सोमालिया में तुर्की का दखल क्या है?

 

अफ्रीकी संघ सहायता और स्थिरीकरण मिशन के तहत युगांडा के 4500 सैनिक सोमालिया में तैनात हैं। द्विपक्षीय समझौते के तहत भी 2000 अन्य जवानों को तैनात किया गया है। हाल ही में सोमालिया ने युगांडा से अपने सैन्य मिशन को खत्म करने का आग्रह किया। उसने कहा कि वह तुर्की से प्रशिक्षित अपने सोमाली सैन्य ब्रिगेडों की तैनाती करेगा। तुर्की से मिली ट्रेनिंग के बाद सोमलिया की सेना मजबूत हो रही है। उसने अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने ही हाथों में संभाल लिया है। 

 

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तुर्की ने कैसे दिया दखल?

तुर्की से बाहर अंकारा का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस सोमालिया में है। आतंकी समूह अल-शबाब के खिलाफ तुर्की सोमालिया की सेना को ट्रेनिंग दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में तुर्की ने सोमलिया में लगभग 25 हजार और अंकारा में करीब 10 हजार सोमाली सैनिक और कमांडो को ट्रेनिंग दी। तुर्की ने इसी साल जनवरी में सोमलिया में एफ-16 विमानों की तैनाती की। युगांडा का मानना है कि तुर्की की ट्रेनिंग और उसकी बढ़ती सैन्य मौजूदगी के कारण सोमालिया सैनिकों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। 

क्या विवाद के पीछे पैसे का भी मामला?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोमालिया में तैनात प्रत्येक युगांडा के सैनिक को हर महीने 1000 डॉलर रुपये मिलते थे। युगांडा को हर महीने उसे 50 लाख से 60 लाख डॉलर का भुगतान मिलता था। अगर सालाना की बात करें तो यह धनराशि 60 मिलियन से 72 मिलियन डॉलर के आसपास बनती है। युगांडा इसे एक बड़े वित्तीय झटके के तौर पर देखता है। अगर उसकी सेना सोमलिया से लौटती है तो कंपाला की यह आय तुरंत समाप्त हो जाएगी।

 

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अमेरिका का एंगल क्या है?

अफ्रीकी संघ सहायता और स्थिरीकरण मिशन के तहत युंगाडा समेत कई देशों ने सोमालिया में अपने सैनिक तैनात कर रखे हैं। मिशन को सबसे बड़ी आर्थिक मदद संयुक्त राष्ट्र सहायता कार्यालय से मिलती है। संयुक्त राष्ट्र सहायता कार्यालय को यह फंडिंग अमेरिका से हासिल होती है। जुलाई महीने से अमेरिका ने फंडिंग रोक दी है। इसके बाद मिशन की फंडिंग पर सवाल उठने लगे। यह भी कहा जाने लगा कि मिशन के तहत जिन अफ्रीकी देशों ने अपने सैनिकों को तैनात कर रखा है, क्या वह ऐसा करना आगे भी जारी रख पाएंगे।

तुर्की दूतावास के बाहर प्रदर्शन क्यों?

युगांडा के सेना प्रमुख जनरल मुहूजी कैनेरुगाबा से जुड़े समूह पैट्रियटिक लीग ऑफ युगांडा के समर्थकों ने राजधानी कंपाला स्थित तुर्की दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने युगांडा के राजनीतिक विश्लेषक फ्रेड लुम्बुये के प्रत्यर्पण की मांग की। फ्रेड ने 2013 से तुर्की में शरण ले रखी है। युगांडा पैट्रियटिक लीग ने 18 सितंबर को प्रदर्शन किया। दो दिन बाद युगांडा पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज ने तुर्की के साथ सभी रक्षा और सैन्य सहयोग को सस्पेंड कर दिया। राजनीतिक विश्लेषक फ्रेड लुम्बुये पर युगांडा में 15 आपराधिक मामले हैं। उन्हें दुष्प्रचार, उकसावे और कंप्यूटर से छेड़छाड़ से जुड़े मामलों में आरोपी बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि युगांडा लुम्बुये के मामले को तुर्की के खिलाफ एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। उसके खिलाफ कई और कदम उठा सकता है। 

किन विकल्पों पर विचार कर रहा युगांडा?

युगांडा अब अपने देश से तुर्की नागरिकों को निकालने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा करीब 3 अरब डॉलर के रेलवे अनुबंध को भी तोड़ने पर काम चल रहा है। मलाबा-कंपाला स्टैंडर्ड गेज रेललाइन का ठेका तुर्की की कंपनी यापी मेर्केजी को मिला था। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि तुर्की विवाद का समाधान तलाश रहा है, ताकि तुर्किश कंपनियों को युगांडा में कोई बड़ा नुकसान न उठाना पड़े।

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